#Corona positive: मतभेद भूलकर मलयेशिया को मलेरिया रोधक दवा देने को तैयार भारत
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मलयेशिया के साथ विभिन्न मुद्दों पर हालिया महीनों में पैदा हुए मतभेदों को भुलाकर भारत कोरोना संक्रमण से निपटने में उसकी मदद करने को तैयार हो गया है। मलयेशिया के उप विदेश मंत्री कमरुद्दीन जाफर ने बुधवार को बताया कि नई दिल्ली ने उसके खिलाफ लगे निर्यात प्रतिबंधों में ढील देकर मलेरिया रोधी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा देने पर सहमति जता दी है।
जाफर ने कहा कि 14 अप्रैल को भारत ने 89,100 गोलियों का आयात करने की अनुमति मलयेशिया को दे दी है। हम भारत से और ज्यादा गोलियां देने का आग्रह करेंगे, लेकिन यह वहां उपलब्धता पर निर्भर करेगा। हालांकि मलेशियाई मंत्री के दावे के संबंध में पूछे जाने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने फिलहाल मीडिया को कोई अधिकृत जवाब नहीं दिया है। सूत्रों का कहना है कि मलयेशिया ने भारत से 10 लाख गोलियों की मांग की थी।
दक्षिणपूर्व एशियाई देशों में कोरोना संक्रमण के मरीजों की संख्या के हिसाब से मलयेशिया दूसरे नंबर पर है। वहां अभी तक 5 हजार से ज्यादा संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं और 82 लोगों की मौत इस जानलेवा महामारी से हो चुकी है।
पिछले महीने रोक लगाई थी भारत ने
भारत ने पिछले महीने 25 मार्च को मलेरिया रोधी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इस दवा को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान बेहद मददगार घोषित किया था। इसके बाद कोरोना वायरस की जानलेवा महामारी से जूझ रहे सभी देशों ने भारत से इस दवा की मांग शुरू कर दी थी। इसके चलते कुछ दिन पहले भारत ने अपनी जरूरत का आकलन करने के
70 फीसदी उत्पादन करता है भारत
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की वैश्विक सप्लाई का 70 फीसदी उत्पादन भारत में किया जाता है। भारतीय दवा कंपनियां प्रति माह करीब 40 लाख टन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा का उत्पादन करती हैं, जिसे बढ़ाकर 70 लाख टन तक किया जा सकता है। यदि भारतीय कंपनियां पूर्ण क्षमता से काम करें तो प्रति माह करीब 35 करोड़ गोलियां तैयार कर सकती हैं।
दोनों देशों के संबंध फिर हो सकते हैं मधुर
माना जा रहा है कि भारत की तरफ से मलयेशिया को दवा सप्लाई करने का निर्णय लेने से दोनों देशों के संबंध फिर से मधुर हो सकते हैं। फरवरी में पद से इस्तीफा देने वाले मलयेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद द्वारा कश्मीर में धारा 370 हटाने, नागरिकता संशोधन कानून लागू करने जैसी भारतीय नीतियों की कटु आलोचना ने दोनों देशों के संबंध खराब कर दिए थे।
मलयेशिया ने भारत में भगोड़ा घोषित जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण से भी इंकार कर दिया था। इसके चलते भारत ने मलयेशिया के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ लिए थे और राजनीतिक संपर्कों में भी कमी कर दी थी। लेकिन महातिर के इस्तीफ के बाद आई नई सरकार लगातार भारत के साथ संबंध सुधारने का प्रयास कर रही है।