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कोविड-19: मामूली लक्षण वाले रोगियों पर मोलनुपिराविर दवा कारगर, हेटेरो ने मांगी आपात इस्तेमाल की मंजूरी

Fri, 09 Jul 2021 04:58 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, हैदराबाद
पीटीआई, हैदराबाद Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 09 Jul 2021 04:58 PM IST
सार

दवा कंपनी हेटेरो ने देश के औषधि महानियंत्रक से मोलनुपिराविर दवा के आपात इस्तेमाल की मंजूरी मांगी है। कंपनी ने दावा किया है कि यह दवा मामूली लक्षण वाले कोरोना रोगियों के लिए कारगर है। 
 

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Covid-19: Molnupiravir drug effective on patients with mild symptoms, Hetero seeks approval for emergency use
मोलनुपिराविर दवा - फोटो : twitter

विस्तार

एंटीवायरल विशेषता वाली दवा मोलनुपिराविर तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में कोरोना रोगियों के इलाज में असरकारक पाई गई है। इसे तैयार करने वाली दवा निर्माता कंपनी हेटेरो ने दावा किया है कि इसके सेवन से मामूली लक्षण वाले कोविड-19 रोगियों के मानक उपचार की तुलना में जल्दी स्वस्थ हुए हैं। 

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दवा निर्माता कंपनी ने यह भी बताया कि उसने भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से मोलनुपिराविर दवा के देश में आपात इस्तेमाल को मंजूरी देने का अनुरोध किया है। हेटेरो ने कोविड-19 के मामूली लक्षण वाले रोगियों पर तीसरे चरण के तुलनात्मक क्लीनिकल अध्ययन की शुरुआत की थी। इन अध्ययन का उद्देश्य मोलनुपिराविर दवा समेत मानक देखभाल की प्रभाव क्षमताओं और सुरक्षा की सिर्फ मानक देखभाल से तुलना करना है।
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इस वर्ष अप्रैल में हेटेरो ने भारत में मोलनुपिराविर दवा का उत्पादन एवं आपूर्ति करने वाली कंपनी एमएसडी के साथ लाइसेंसी समझौता किया। उक्त कंपनी भारत के अलावा निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के 100 से अधिक देशों में दवा की आपूर्ति करती है। अंतरिम परिणामों में पता चला कि 14 दिन की निगरानी के दौरान जिन लोगों की मानक देखभाल की गई, उनकी तुलना में जिस समूह को मोलनुपिराविर दवा दी गई उन मरीजों में से बहुत कम को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी।
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कंपनी ने कहा, 'तीसरे चरण के ट्रायल में पता चला कि मानक देखभाल की तुलना में मोलनुपिराविर का उपचार देने पर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत कम पड़ी, सेहत में सुधार आने में कम समय लगा और मामूली लक्षण वाले कोविड मरीज जल्द संक्रमण मुक्त हुए जिसकी पुष्टि आरटी-पीसीआर जांच में हुई।'


दवा निर्माता ने कहा कि दोनों ही समूहों में किसी की मृत्यु नहीं हुई और जो भी दुष्परिणाम सामने आए, वे गंभीर प्रकृति के नहीं थे इसलिए दवा बंद करने की जरूरत नहीं पड़ी।

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