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लॉकडाउन: वे प्रवासी जो घर नहीं पहुंच पाए, रास्ते में ही तोड़ा दम

Sun, 03 May 2020 04:03 AM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Sun, 03 May 2020 04:03 AM IST
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Covid 19 Lockdown Migrant workers who fails to reach their home and died during journey
लॉकडाउन में प्रवासी मजदूर - फोटो : social media
प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक सलामत पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा ट्रेनें चलाने की प्रक्रिया तो शुरू हुई। लेकिन इस विलंब के कारण कुछ मजदूरों की लाख जद्दोजहद और मजबूत इरादों ने बीच में ही दम तोड़ दिया। धर्मवीर और तबारत मंसूर नामक दो मजदूरों की जिंदगी अपनों के बीच पहुंचने से पहले ही थम गई। इन दोनों को जब लॉकडाउन के बाद जब कोई रास्ता न सूझा, तो दोनों दुर्गम पथ की परवाह किए बिना ही साइकिल पर सवार होकर निकल पड़े। इनमें से एक की मौत दिल्ली से बिहार जाने के दौरान बेहोशी के कारण हुई, जबकि दूसरे की मौत महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश जाने के दौरान हुई। इन जैसे कई प्रवासी मजदूर काम बंद हो जाने, अपने पास पैसे खत्म हो जाने, अपने सिर पर छत नहीं होने के चलते सैकड़ों और हजारों किलोमीटर दूर स्थित अपने-अपने घरों के लिए पैदल, साइकिल या रिक्शा-ठेला जो भी मिला उस पर सवार होकर निकल पड़े।
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बीते शुक्रवार की रात, पहली विशेष ट्रेन 1200 से अधिक फंसे हुए प्रवासियों को तेलंगाना से लेकर झारखंड के हटिया पहुंची, जहां से बसों में सवार होकर उन्हें अपने-अपने जिलों में ले जाया गया। लेकिन इसी बीच, उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर के एक अस्पताल में 32 वर्षीय धर्मवीर की मौत हो गई। वह 28 अप्रैल को अन्य मजदूरों के साथ दिल्ली से बिहार के खगड़िया तक करीब 1200 किमी के सफर पर साइकिल से निकला था।
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साइकिल से 390 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जिंदगी ने छोड़ा साथ

इससे एक दिन पहले, 50 वर्षीय तबारत की मध्य प्रदेश के सेंधवा में मौत हो गई। वह उत्तर प्रदेश के महाराजगंज स्थित अपने घर के लिये महाराष्ट्र के भिवंडी से 390 किमी साइकिल चला कर सेंधवा तक ही पहुंच पाया। उसके साथ यात्रा कर रहे रमेश पवार ने बताया, ‘बरवानी में सेंधवा के पास बृहस्पतिवार को उसकी मौत हो गई, जो थकान और दिल का दौरा पड़ने से हुई।’ पवार ने इस पलायन के बारे में बताया कि 11 लोगों का समूह 25 अप्रैल को साइकिल से महाराजगंज के लिए रवाना हुआ था। तबारत का शव उसके साथ के अन्य लोग महाराजगंज ले जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने लॉकडाउन के प्रतिबंधों के चलते इसकी इजाजत नहीं दी।

तेलंगाना से पैदल निकली किशोरी भी हार गई हिम्मत

तेलंगाना से पैदल ही छत्तीसगढ़ के बीजापुर के लिये 150 किमी के सफर पर निकली 12 वर्षीय जामलो कदम लॉकडाउन के दौरान जान गंवाने वाले बच्चों में शामिल है। वह तेलंगाना में मिर्च के एक खेत में काम करती थी।एक अधिकारी ने बताया कि वह 15 अप्रैल को घर के लिये चली थी और 18 अप्रैल सुबह अपने गांव से करीब 50 किमी पहले ही ही उसकी मौत हो गई। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, ‘उसकी कोविड-19 जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई।’

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अपनों की बीच रह गई थी बस कुछ गज की दूरी

इंसाफ अली (35) उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिला स्थित अपने गांव पहुंच गया था लेकिन वह घर नहीं पहुंच सका। अंग्रेजी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक उसने मुंबई से 1500 किमी की दूरी तय की थी। उसके मठकांवना गांव पहुंचने पर उसे इस हफ्ते सोमवार सुबह क्वारंटीन में भेज दिया गया। लेकिन दोपहर भूखे-प्यासे अली की मौत हो गई।

मुरैना का 200 किमी से अधिक के सफर में हारे रणवीर सिंह

वहीं, 39 वर्षीय रणवीर सिंह दिल्ली के एक रेस्तरां में ‘डिलीवरी बॉय’ के रूप में काम करता था। वह मध्य प्रदेश के मुरैना के लिये 200 किमी से अधिक का सफर कर आगरा तक पहुंचा था, जहां उसकी मौत हो गई। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत का कारण दिल का दौरा पड़ने को बताया गया।

हालांकि, महानगरों और अन्य शहरों से प्रवासी कामगारों और दिहाड़ी मजदूरों का पलायन आजादी के बाद से लोगों का संभवत: सबसे बड़ा पलायन है। कुछ लोग घर पहुंच गए, कुछ रास्ते में हैं और कुछ ने बीच रास्ते में ही जिंदगी को अलविदा कह दिया। 
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