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COVID-19 Home Testing kits: ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच कोरोना किट की मांग कितनी बढ़ी, क्यों है किट के महंगे होने की आशंका

Wed, 12 Jan 2022 05:12 PM IST
प्रतिभा ज्योति प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Wed, 12 Jan 2022 05:12 PM IST
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सार
जो लोग लैब में टेस्ट नहीं करवा पा रहे हैं या जो टेस्ट के लिए बाहर जाने में झिझक रहे हैं,  ज्यादतर वे ही स्व-परीक्षण किट खरीद रहे हैं।
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COVID-19 Home Testing kits corona kits demand increase amidst rising cases of corona and fear of omicron Sale of self-testing kits rises as Covid-19 cases spike Why is the kit likely to be expensive
कोरोना टेस्ट - फोटो : pti

विस्तार

देश भर में कोरोना संक्रमण में हो रही  लगातार वृद्धि के बीच घर पर खुद ही जांच करने वाले कोरोना किट की मांग बहुत बढ़ गई है। खासतौर पर दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में जहां कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे सरकार को किट के महंगे होने और कालाबाजारी करने की आशंका सताने लगी है।


स्व-परीक्षण किट की बड़े पैमाने पर बिक्री स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच चिंता भी पैदा कर रही है क्योंकि पॉजिटिव रिपोर्ट आने वाले लोगों को ट्रैक करने, उन्हें अलग करने और उनका रिकॉर्ड रखना भी मुश्किल हो रहा है। पिछले सप्ताह मुंबई में अकेले एक कंपनी ने पांच लाख से अधिक स्व-परीक्षण किट बेचे गए हैं। स्वपरीक्षण करने वाले लगभग सात किट बाजार में उपलब्ध हैं। एक को छोड़कर ये सभी परीक्षण नाक के स्वाब-आधारित टेस्ट हैं और सभी केमिस्ट की दुकानों और ऑनलाइन उपलब्ध है।


लोग आरटी-पीसीआर की तुलना में रैपिड टेस्ट का विकल्प क्यों चुन रहे हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि स्व-परीक्षण किट रातों-रात लोगों में मशहूर हो गया है क्योंकि यह कोरोना टेस्टिंग करने का आसान तरीका बन गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ डॉक्टर तेजी से परीक्षण के साथ-साथ आरटी-पीसीआर टेस्टिंग के लिए भी कह रहे हैं जिसमें औसतन 48-72 घंटों का समय लग रहा है। ऐसे में लोग इतने घंटों का इंतजार नहीं करना चाहते।

कोरोना किट की मदद से आसानी और तेजी से परीक्षण हो जाता है और यदि व्यक्ति पॉजिटिव आता है तो जल्दी अपना इलाज शुरू करा सकता है। बहुत सारे लोग कोरोना के हल्के लक्षणों को देखते हुए बाहर से टेस्ट कराने के बजाए स्व-परीक्षण ही करना पसंद कर रहे हैं जिस वजह से कोरोना किट की मांग बढ़ी है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि लोगों ने कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच घरों में किट को स्टॉक करना भी शुरू कर दिया है।

रैपिड जांच किट
रैपिड जांच किट - फोटो : पीटीआई
मांग कितनी बढ़ी
पुणे स्थित ‘कोविसेल्फ’ टेस्ट किट कंपनी माईलैब्स डिस्कवरी सॉल्यूशन के संस्थापक हंसमुख रावल ने मीडिया को दिए अपने बयान में बताया है कि दिसंबर के अंत से लेकर जनवरी के पहले हफ्ते में घर पर कोरोना जांच करने वाली टेस्ट किट की बिक्री 400-500 प्रतिशत बढ़ी है। कंपनी ने अकेले मुंबई में एक से सात जनवरी के बीच पांच लाख किट बेचे हैं। प्रति रैपिड टेस्टिंग किट की कीमत 250 रुपये है। 

दिल्ली में कितनी मांग
इसी कंपनी ने दिल्ली में लगभग 2.5 लाख किट बेची हैं। दिल्ली रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट एलायंस  के अध्यक्ष संदीप नांगिया के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में हर दिन लगभग 5,000-10,000 सेल्फ-टेस्टिंग किट बेचे जाते हैं और इनकी बहुत मांग है।

अन्य कंपनियां जो इसी तरह के परीक्षण किट बनाती हैं,  उसकी बिक्री में भी इसी तरह के रुझान देखे देख जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि मेरिल कंपनी ने भी मांग में सप्ताह-दर-सप्ताह 50 फीसदी की वृद्धि देखी है। कंपनी का दावा है कि उसके पास हर महीने 20 मिलियन किट बनाने की क्षमता है।

अस्पताल में कोरोना की जांच कराते लोग
अस्पताल में कोरोना की जांच कराते लोग - फोटो : अमर उजाला
दिसंबर से मांग में होने लगी वृद्धि
रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना केस कम होने पर इसकी बिक्री लगभग बंद ही हो गई थी, लेकिन दिसंबर में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के आने के बाद जैसे ही फिर से मामले बढ़ने लगे, घर पर जांच करने वाले किट की मांग भी शुरू हो गई। 

हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह मान रहे है कि घर पर करने वाले ये टेस्ट मानसिक तनाव भी बढ़ा रहे हैं। क्योंकि यदि रिपोर्ट निगेटिव आई, तो लोग तसल्ली के लिए बाहर आरटीपीसीआर टेस्ट कराते हैं। यह मानसिक तनाव बढ़ाता है। दूसरी बात यह है कि हर बार और हर बार सही रिपोर्ट आए, इसकी भी गारंटी नहीं होती। 

आईसीएमआर
आईसीएमआर - फोटो : Social media
किट को कब मिली मंजूरी
कोरोना की घर पर जांच करने वाले टेस्ट किट को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर ने कोरोना की दूसरी लहर का पीक लगभग खत्म होने पर पिछले साल मई में इसकी मंजूरी दी थी। आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक जिस व्यक्ति में कोरोना के लक्षण है या जो आरटीपीसीआर में कंफर्म पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आया है, वहीं इस टेस्ट किट से जांच कर सकता है।

होम टेस्टिंग के लिए कम्पनी के सुझाए गए तौर तरीके से ही ये टेस्ट करना होगा। टेस्ट के बाद जिन मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी उन्हें  उन्हें होम आइसोलेशन को लेकर आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन को मानना होगा। 

15 मिनट में हो जाती हैं जांच
इस किट से टेस्ट करने वाले जिन मरीजों का रिजल्ट निगेटिव आता है उन्हें आरटीपीसीआर टेस्ट जरूर करवाने की सलाह दी जाती है। किट से स्वपरीक्षण करने पर  15 मिनट के अंदर जांच की रिपोर्ट मिल जाती है। यह सिंगल पैक में किसी भी दवा दुकान में मिल सकती है। इसे रखने के लिए रेफ्रिजरेटर की जरूरत भी नहीं पड़ती। साथ ही टेस्ट के लिए लाइन में लगने और इंतजार की भी आवश्यकता नहीं है। 
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