{"_id":"5ec511149b722471644a4eaf","slug":"covid-19-health-bulletin-live-updates-on-coronavirus-health-ministry-and-mha-pc-icmr","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना बुलेटिनः 42298 संक्रमित हुए ठीक, भारत में मृत्यु दर काफी कम : स्वास्थ्य मंत्रालय","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कोरोना बुलेटिनः 42298 संक्रमित हुए ठीक, भारत में मृत्यु दर काफी कम : स्वास्थ्य मंत्रालय
Wed, 20 May 2020 04:54 PM IST
Rohit Ojha
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rohit Ojha
Updated Wed, 20 May 2020 04:54 PM IST
विज्ञापन
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल
- फोटो : ANI
स्वास्थ्य मंत्रालय व गृह मंत्रालय ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में आज कोरोना वायरस से जुड़ी नई जानकारियां और तथ्य सामने रखे। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि यह संतोषजनक है कि 42,298 लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हुए हैं और और सक्रिय मामलों की संख्या 61,149 है।
विज्ञापन
15 देशों में भारत के मुकाबले 83 फीसदी मौतें ज्यादा
लव अग्रवाल ने कहा कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में हमारी स्थिति काफी अच्छी है जबकि जनसंख्या के मामले में हम उनसे कहीं अधिक हैं। 15 देशों में भारत के मुकाबले 83 फीसदी मौतें ज्यादा हो रही हैं। अच्छी बात यह है कि भारत में मृत्यु दर काफी कम है। अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल ठीक होने की दर 39.62 प्रतिशत है जबकि लॉकडाउन के आरंभ में यह दर 7.1 प्रतिशत थी।
विज्ञापन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि देश में कोविड-19 के वर्तमान में जितने मामले हैं उनमें 6.39 प्रतिशत मरीज को अस्पताल में उपचार कराने की जरूरत है। कोविड-19 के बारे में संवाददाता सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि करीब 2.94 प्रतिशत मामलों में ऑक्सीजन सहायता देने की जरूरत है, तीन प्रतिशत को आईसीयू (सघन चिकित्सा कक्ष) की और 0.45 प्रतिशत मामलों में जीवनरक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर सपोर्ट) की जरूरत है।
विज्ञापन
देश में लॉकडाउन 25 मार्च से लागू है और अब इसका चौथा चरण चल रहा है जो कि 31 मई को खत्म होगा। क्या सरकार कोविड-19 के उपचार की योजना से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को हटाने पर विचार कर रही है, इस सवाल पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा कि इसके असर के बारे में समीक्षा के बाद इस पर कोई फैसला होगा।