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कोर्टरूम लाइव : दिल्ली की हवा पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- घरों में भी मास्क पहन रहे लोग, पूछा- पटाखों पर प्रतिबंध का क्या हुआ

Sun, 14 Nov 2021 06:12 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 14 Nov 2021 06:12 AM IST
सार

किसानों पर आरोप लगाने का फैशन हो गया है, पराली से केवल 20 फीसदी प्रदूषण... 80 फीसदी प्रदूषण पटाखे जलाने, वाहनों, फैक्टरियों के धुएं, धूल से। - सर्वोच्च न्यायालय

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Courtroom Live : On the air of Delhi, the Supreme Court said people wearing masks even in homes, asked - what happened to the ban on firecrackers
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

राजधानी दिल्ली की हवा शनिवार को दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित होने के बीच सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा है। शीर्ष कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को आपातकालीन कदम उठाने के लिए कहा। अदालत ने दो दिन के लिए लॉकडाउन लगाने की सलाह भी दी। 

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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद दिल्ली सरकार ने सभी स्कूल 7 दिन के लिए बंद कर दिए। साथ ही, राज्य कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश के साथ सभी तरह की निर्माण गतिविधियों पर 17 नवंबर तक रोक भी लगा दी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक में तय किया गया कि लॉकडाउन का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा जाएगा।
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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की विशेष पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा, किसानों पर आरोप लगाने का फैशन हो गया है, लेकिन क्या आपने देखा कि पिछले सात दिन से दिल्ली में पटाखे चल रहे हैं। पराली से केवल 20 फीसदी प्रदूषण होता है। 80 फीसदी पटाखे, वाहनों, फैक्टरियों के धुएं, धूल से होता है। 
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केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के कदमों से अवगत कराया। इसमें पराली जलाने से निपटने की कार्ययोजना शामिल है। पीठ ने कहा, किसानों को दोष देने के बजाय राज्य सरकारों व केंद्र को प्रदूषण के मुद्दे को सुलझाने के लिए एकसाथ आना चाहिए। राजनीति से उठकर काम करने की जरूरत है।

कोर्टरूम में इस तरह हुए सवाल-जवाब

  • पीठ (सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से) : स्थिति कितनी गंभीर है, लोग घरों में भी मास्क पहन रहे हैं। आपने क्या कदम उठाए हैं?
  • मेहता : पंजाब में पांच-छह दिनों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ी हैं, नतीजा हम यहां देख रहे हैं।
  • चीफ जस्टिस : आप इस तरह पेश कर रहे हैं, जैसे कि किसान जिम्मेदार हैं। दिल्ली के लोगों का क्या? पटाखों, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के कदमों के बारे में क्या? पहले हम दिल्ली को देखेंगे। बाद में अन्य राज्यों को। हम दो-तीन दिनों में अच्छा महसूस करना चाहते हैं।
  • मेहता : मेरे कहने का ये  मतलब नहीं है कि इस समस्या के लिए किसान जिम्मेदार हैं।
  • दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा : दिल्ली में 30 सितंबर को एक्यूआई 84 था जो अब 474 है। यह 20 सिगरेट पीने के बराबर है, भले ही आप स्मोकर हों या नहीं। हालांकि, कोर्ट दूसरे कारकों को देख रहा है, लेकिन यह संभवत: पराली के कारण ही है।
  • जस्टिस सूर्यकांत : पटाखों पर भी प्रतिबंध था लेकिन उसका क्या हुआ। सात दिनों से क्या चल रहा है? दिल्ली पुलिस क्या कर रही है? प्रदूषण कैसे नियंत्रित किया जाए? प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हमें दो-तीन दिनों की अल्पकालिक योजनाओं की आवश्यकता है।

हमें सरकारों से लेना-देना नहीं, समाधान चाहिए
जस्टिस चंद्रचूड़ ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा से कहा- हमें सरकारों से कोई लेना-देना नहीं है। हमें समाधान चाहिए। आपने स्कूल खोल दिए। बच्चे स्कूल जाने के लिए सड़कों पर हैं। आप छोटे बच्चों को प्रदूषण, महामारी और डेंगू के संपर्क में ला रहे हैं। पीठ ने पूछा, एक्यूआई को हम कितनी जल्दी 200 अंक तक ला सकते हैं? क्या दो दिन का लॉकडाउन लगाया जाना चाहिए या और कुछ करने की जरूरत है? लोग दिल्ली में कैसे रहेंगे?

सोमवार तक बताएं क्या उपाय किए
पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार को सोमवार तक राजधानी में वायु प्रदूषण की स्थिति से निपटने के उपायों के बारे में सूचित करने के लिए कहा।

एनसीआर : कहां-कितना प्रदूषण शीर्ष पर नोएडा

नोएडा 464
गाजियाबाद 441
दिल्ली 437
फरीदाबाद 423
ग्रेटर नोएडा 408
हापुड़ 383
स्रोत : सीपीसीबी

दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के तीन
शहर/देश एक्यूआई
दिल्ली (भारत) 556
लाहौर (पाकिस्तान) 354
सोफिया (बुल्गारिया) 178
कोलकाता (भारत) 177
जाग्रेब (क्रोएशिया) 173
मुंबई (भारत) 169
बेलग्रेड (सर्बिया) 165
चेंगदु (चीन) 165
स्रोत : आईक्यू एयर

पराली जलाने की 4 हजार घटनाएं
सफर के अनुसार शुक्रवार को पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की 4 हजार से अधिक घटनाएं हुई हैं। इसके कारण शनिवार को वायु प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही है।

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