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सड़क परिवहन मंत्रालय और एनएचएआई में भ्रष्टाचार की शिकायत पहुंची पीएमओ

Tue, 22 Sep 2020 05:44 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 22 Sep 2020 05:44 AM IST
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Corruption complaint of Road Transport Ministry and NHAI reached in pmo
NHAI

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी से मंत्रालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करने को कहा है। ईडी ने यह निर्देश प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को दी गई एक शिकायत के संबंध में दिया है। एक सड़क निर्माण कंपनी ने पीएमओ को 21 नवंबर को लिखे पत्र में मंत्रालय और राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण प्राधिकरण (एनएचएआई) में व्याप्त भ्रष्टाचार के बारे में शिकायत की थी। उन्होंने टोल ऑपरेट ट्रांसफर (टीओटी) मॉडल के तहत बंडल तीन के टेंडर आवंटन में गड़बड़ी से सरकार को 6500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान बताया है।

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शिकायत में कहा गया है कि बंडल तीन के तहत नौ राजमार्ग पर 566.265 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए रिजर्व प्राइस 4995.4 करोड़ रुपये रखा गया था। ट्रैफिक के घनत्व को देखते हुए इन नौ राजमार्ग पर ठेके की अवधि के दौरान 12,450 करोड़ से लेकर 15,500 करोड़ रुपये तक का टोल संग्रह होना अनुमानित था अर्थात रिजर्व प्राइस के आसपास ठेका दिए जाने पर सरकार को 7000 से 10,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका थी।
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कंपनी ने तारीखें और समय बताते हुए शिकायत की कि उनसे मंत्रालय और एनएचएआई के अधिकारियों ने टेंडर आवंटन के लिए 120 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी। उनका कहना है कि सीसीटीवी की जांच से साबित हो जाएगा कि इस कंपनी के प्रतिनिधि उक्त अधिकारियों से बताए गए समय पर मिले या नहीं।
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रिश्वत की मांग करने वालों में एनएचएआई के मेंबर फाइनेंस, मेंबर प्रोजेक्ट और चीफ जनरल मैनेजर जैसे शीर्ष अधिकारी थे जबकि मंत्रालय की ओर से स्वयं मंत्री नितिन गडकरी के स्टाफ के सदस्य थे। शिकायत में सभी अधिकारियों के नाम, पदनाम, उनसे मुलाकात का दिन और समय बताया गया है।

अंतत: यह टेंडर एक अन्य कंपनी क्यूब मोबिलिटी इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड को 5011 करोड़ रुपये में दे दिया गया जोकि रिजर्व प्राइस से महज 15 करोड़ रुपये अधिक है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्हें भी यही दाम बताया गया था लेकिन उन्होंने रिश्वत देने से इनकार कर दिया था, इसलिए यह ठेका उन्हें नहीं मिला।


उनकी इस शिकायत को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा विभिन्न जांच एजेंसियों को भेजा गया। इनमें से प्रवर्तन निदेशालय ने सड़क परिवहन मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी को इस मामले की जांच करने को कहा है। निदेशालय का कहना है कि यदि इसमें फेमा या मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कोई जानकारी मिलती है तो प्रवर्तन निदेशालय के संज्ञान में लाया जाए।

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