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कोरोना वायरस: शोध में दावा, उच्च आर्द्रता वाले मौसम में कम हो जाएगा कोविड-19 का प्रसार

Thu, 26 Mar 2020 10:06 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 26 Mar 2020 10:06 AM IST
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coronavirus warm humid weather may combat spread of coronavirus disease new study suggests
कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

एक नए शोध में दावा किया गया है कि गर्म और आर्द्र मौसम कोरोना वायरस बीमारी के प्रसार को कम कर सकता है। इसमें कहा गया है कि एशियाई देशों में मानसून आने से वायरस के प्रसार में कमी आएगी। भारत में इस वायरस के कारण 10 लोगों की और दुनिया में 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है।

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मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के दो शोधकर्ताओं ने 22 मार्च तक कोविड-19 के संक्रमण डाटा का विश्लेषण किया। जिसमें उन्होंने पाया कि मामलों के दो मापदंडों- तापमान और आर्द्रता के साथ सहसंबंध हैं। अध्ययन में पाया गया है कि 90 प्रतिशत मामले 3 से 17 डिग्री के बीच तापमान वाले देशों में रिपोर्ट किए गए और यहां और 4 से 9 जी/एम3 के बीच पूर्ण आर्द्रता थी।
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एक शोधकर्ता युसूफ जमील ने कहा, 'तापमान, आर्द्रता और प्रसार के बीच संबंध समय के साथ विकसित हो रहा है। तापमान और कोरोनावायरस के प्रसार के बीच संबंध कमजोर दिख रहा है क्योंकि हमारे पास अमेरिका के गर्म राज्यों जैसे फ्लोरिडा और लुइसियाना और गर्म देशों जैसे ब्राजील, भारत, मलेशिया से कई नए मामले आ रहे हैं। आर्द्रता एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है क्योंकि मेरा पेपर सुझाव देता है लेकिन प्रयोगशाला में इसकी पुष्टि की जानी चाहिए।'
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वहीं भारतीय अधिकारी आर्द्रता नहीं मापते हैं। इस महीने दिल्ली में औसत सापेक्ष आर्द्रता 47 प्रतिशत, मुंबई में 60 प्रतिशत रही है। सापेक्ष आर्द्रता हवा में जलवाष्प का एक अनुपात है जो किसी दिए गए तापमान पर वाष्प की अधिकतम मात्रा को पकड़ सकता है। कोविड-19 सार्स-कोव-2 वायरस के कारण होता है। जो सार्स-कोव से काफी मिलता-जुलता है। इसका नाम सीवीयर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम है जो सबसे पहले 2003 में सामने आया था। यह वायरस उच्च तापमान पर जीवित रहने या संक्रमित करने की क्षमता खो देता है।


एमआईटी के शोध पहला ऐसा है जिसने यह सुझाव दिया है कि अकेले तापमान कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए काफी नहीं है और आर्द्रता की भी इसमें भूमिका है। चूंकि आर्द्रता एक कारक है, तापमान में वृद्धि और गर्मियों के करीब आने से अमेरिका और यूरोप में कई क्षेत्रों को मदद नहीं मिल रही है क्योंकि वे सूखे रहते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा, हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि पर्यावरणीय कारकों के कारण वायरस के कम प्रसार की संभावना गर्मियों में उत्तरी यूरोप और उत्तरी अमेरिका (अमेरिका और कनाडा) के अधिकांश हिस्सों में सीमित हो जाएगी। एमआईटी विश्लेषण से पता चला है कि 22 जनवरी से 21 मार्च के बीच प्रत्येक 10 दिन की अवधि में नए मामलों की अधिकतम संख्या 4 से 10 डिग्री के बीच और 3 से 9 जी/एम3 के बीच पूर्ण आर्द्रता वाले क्षेत्रों में दर्ज किए गए थे।

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