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कोविशील्ड वैक्सीन: सीरम ने नकारा दुष्प्रभाव का दावा, कहा- टीका पूरी तरह सुरक्षित व इम्युनोजेनिक
Tue, 01 Dec 2020 12:56 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 01 Dec 2020 12:56 PM IST
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कोरोना वैक्सीन (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका द्वारा तैयार कोरोना वैक्सीन 'कोविशील्ड' वैक्सीन का परीक्षण कर रहे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (सीआईआई) ने इसके दुष्प्रभाव के आरोप को पूरी तरह खारिज किया है। बता दें कि इस वैक्सीन के परीक्षण के दौरान चेन्नई के एक प्रतिभागी ने दावा किया है कि उस पर वैक्सीन का दुष्प्रभाव हुआ है। सीरम का कहना है कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है। जांचकर्ताओं ने भी इस बात को माना है।
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सीआईआई ने एक बयान जारी कर कहा, 'कोविशील्ड पूरी तरह सुरक्षित और इम्युनोजेनिक है। वैक्सीन परीक्षण के दौरान चेन्नई के प्रतिभागी के साथ कोई हादसा नहीं हुआ है। सभी विनियामक और नैतिक प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों का पालन किया गया।' युवक के आरोप पर मुख्य जांचकर्ता, डीएसएमबी और आचार समिति ने कहा कि प्रतिभागी को हुई समस्या का वैक्सीन परीक्षण से संबंध नहीं था। बयान में कहा गया कि कंपनी की प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखने के लिए कानूनी नोटिस भेजा गया था, जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
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The legal notice was sent to safeguard the reputation of the company which is being unfairly maligned: Serum Institute of India https://t.co/EWKYE5MKgm
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) December 1, 2020
ये है पूरा मामला
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका द्वारा तैयार कोरोना वैक्सीन चेन्नई में परीक्षण के दौरान एक अक्तूबर को 40 वर्षीय एक व्यक्ति को लगाई गई तो 10 दिन बाद उसे मस्तिष्क संबंधी तकलीफ शुरू हो गई। उसने अपने पत्नी और बच्चे पहचानने से इंकार कर दिया।
परिवार ने पांच करोड़ रुपये मुआवजा मांगा
परिवार ने परीक्षण पर सवाल उठाते हुए आइसीएमआर के महानिदेशक, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, ड्रग कंट्रोलर डीन को नोटिस भेज मानसिक शारीरिक रूप से हुई क्षति और भविष्य में इलाज के लिए पांच करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की।
इसके बाद, सीआईआई ने रविवार को कोविड वैक्सीन परीक्षण में शामिल प्रतिभागी को लेकर बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि वैक्सीन परीक्षण और प्रतिभागी की चिकित्सा स्थिति का कोई संबंध नहीं है। सीआईआई ने प्रतिभागी के परिवार द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में कंपनी के ऊपर लगे आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और गलत बताया। सीआईआई के बयान में कहा गया, कंपनी को प्रतिभागी की चिकित्सा स्थिति को लेकर चिंता थी, लेकिन वह वैक्सीन परीक्षण पर अपनी चिकित्सा समस्याओं के लिए झूठा आरोप लगा रहा था।
कंपनी मांग सकती है 100 करोड़ रुपये हर्जाना
बयान में कहा गया, मेडिकल टीम ने पहले ही प्रतिभागी को इस बात की जानकारी दी थी कि उसकी चिकित्सा समस्या का वैक्सीन परीक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। कंपनी ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद प्रतिभागी का सार्वजनिक जाकर बयान देना पैसा ऐंठने के लिए था। इसमें कहा गया कि कंपनी की छवि धूमिल करने के प्रयास को लेकर वह प्रतिभागी से 100 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग कर सकती है।