Coronavirus Testing: देश में बढ़ते कोरोना के मामलों के बीच क्यों कम हुए कोविड टेस्ट, हफ्ते भर में 15.4 फीसदी घटे नमूने
कोविड-19 भारत डॉट ओआरजी से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर सात दिन में औसत जांच 15.4 फीसदी घटकर सात जून को 3,75,145 नमूनों पर सिमट गई। जबकि 15 मई को 4,43,471 नमूनों की जांच की गई थी। कोविड के ऑमिक्रोन स्वरूप से संक्रमितों के मामले बढ़ने से साल की शुरुआत में रोजाना 17 लाख नमूने जांचे जा रहे थे...
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देश में पिछले कुछ दिनों से एक बार फिर कोविड-19 के नए केसों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। गुरुवार को देशभर में संक्रमण के 7,240 नए मामले आए हैं। जो पिछले तीन महीनों में एक दिन में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। बावजूद इसके कोरोना वायरस की जांच की रफ्तार बहुत ही धीमी है। कुछ राज्यों को छोड़ दें तो महामारी बढ़ने के बावजूद देशभर में कोरोना की जांच में तेजी नहीं आई है।
कोविड के मामलों पर नजर रखने वाली स्वतंत्र संस्था कोविड-19 भारत डॉट ओआरजी से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर सात दिन में औसत जांच 15.4 फीसदी घटकर सात जून को 3,75,145 नमूनों पर सिमट गई। जबकि 15 मई को 4,43,471 नमूनों की जांच की गई थी। कोविड के ऑमिक्रोन स्वरूप से संक्रमितों के मामले बढ़ने से साल की शुरुआत में रोजाना 17 लाख नमूने जांचे जा रहे थे। इस समय के जांच नमूनों से यह चार गुना आंकड़ा था।
रैपिड एंटीजन किट की मांग बढ़ी
हालांकि जिन राज्यों में संक्रमितों की संख्या बढ़ी है, वहां जांच में भी थोड़ी तेजी आई है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर जांच में कमी आई है। मई के मध्य में कोविड-19 की सबसे अधिक जांच महाराष्ट्र और केरल में की गई। हालांकि रैपिड एंटीजन किट की मांग बढ़ी है। इसके जरिए लोग घर पर ही कोविड-19 की जांच कर लेते हैं। जांच किट की मांग बढ़ने के कारण देश में रैपिड एंटीजन किट की सबसे बड़ी उत्पादक पुणे की माई लैब प्रतिदिन 15 लाख जांच किट बना रही है।
माई लैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बीते एक महीने में कोविसेल्फ किट की मांग 30 से 40 फीसदी बढ़ी है। मई के मध्य में उत्तर भारत में ज्यादा मांग थी, लेकिन अब दक्षिण और पश्चिम भारत में ज्यादा मांग देखी जा रही है। हम हर दिन 15 लाख जांच किट बना रहे हैं। जानकारों के अनुसार, घर पर होने वाली ज्यादातर जांच सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं की जाती। ये सभी किट मोबाइल एप्लिकेशन से जुड़ी होती हैं, जो भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सुरक्षित बैक एंड सर्वर से जुड़े हैं, जहां पॉजिटिव जांच के आंकड़े संग्रहीत किए जाते हैं। कई लोग जांच के दौरान मोबाइल एप का उपयोग नहीं करते हैं, जिससे राष्ट्रीय टेस्टिंग डाटाबेस में इनके आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाते हैं।
पॉजिटिविटी दर करीब सात से आठ फीसदी
दिल्ली की प्राइवेट लैब संचालकों ने अमर उजाला से कहा कि बढ़ते मामलों के बाद हाल में कोविड-19 जांच की मांग में थोड़ी तेजी आई है, लेकिन ज्यादा नहीं है। फिलहाल महामारी की दूसरी और तीसरी लहर में जितनी जांच हो रही थी अभी उतनी जांच नहीं हो रही है। आजकल घरों में ही कोरोना की जांच का विकल्प आ गया है। इस वजह से भी लोग प्राइवेट लैब में नहीं आ रहे हैं। आरटी-पीसीआर जांच की मांग 20 फीसदी बढ़ी है, लेकिन यह गिने-चुने हिस्सों में है। फिलहाल हम जांच के लिए सरकार की ओर से नमूना संग्रह नहीं कर रहे हैं। प्रयोगशाला की जांच में पॉजिटिविटी दर करीब सात से आठ फीसदी है क्योंकि ज्यादातर वे लोग ही जांच कराने आ रहे हैं, जिनमें इसके लक्षण दिख रहे हैं।
देश में कोविड के 7,240 नए मामले आए
देश में 99 दिनों बाद एक दिन में कोरोना वायरस के 7,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जो दैनिक मामलों में करीब 39 फीसदी की वृद्धि है। जबकि दैनिक संक्रमण दर 111 दिनों बाद दो फीसदी से ज्यादा दर्ज की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते 24 घंटे में संक्रमण के 7,240 मामले दर्ज किए गए, जिससे महामारी के मामलों की कुल संख्या 4,31,97,522 हो गई है। बढ़ते मामले देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों को सतर्कता बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर संक्रमण का प्रसार रोकने के उपाय करने के लिए कहा है।