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कोरोनावायरस: म्यांमार सीमा पर आतंकी कर रहे हैं मास्क की कालाबाजारी

Fri, 06 Mar 2020 07:06 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 06 Mar 2020 07:06 PM IST
सार

म्यांमार में यह मास्क पहले 53 रुपये यानी 1000 ‘म्यांमार क्यात’ में मिलता था। अब वहां पर बीस से तीस हजार क्यात में मिल रहा है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत एक हजार रुपये से ज्यादा है।

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coronavirus: Terrorists at myanmar border are involved in black marketing of surgical masks
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

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कोरोनावायरस अब दुनिया के कई देशों में पांव पसारने लगा है। सभी देशों की सरकारें अपने लोगों को इस वायरस से बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। दूसरी तरफ आतंकी समूह हैं, जो इस वायरस की आड़ में कमाई करने में लगे हैं।


म्यांमार सीमा पर सक्रिय मणिपुर के आतंकी समूह पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) और रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ) के सदस्य कोरोना वायरस से बचाव करने वाले सर्जिकल मास्क को मनमर्जी के रेट पर बेच रहे हैं।

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म्यांमार के बाजार में यह मास्क पहले 53 रुपये यानी 1000 ‘म्यांमार क्यात’ में मिलता था। कोरोना वायरस फैलने के बाद यही मास्क अब वहां पर बीस से तीस हजार क्यात में मिल रहा है। यानी भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत एक हजार रुपये से ज्यादा है।
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टेंगनूपाल जिले में पीएलए/आरपीएफ ने आसपास के उद्योगपतियों को सर्जिकल मास्क तैयार करने और थोक में सप्लाई करने के लिए कहा है। पीएलए/आरपीएफ का मकसद है कि म्यांमार-चीन बॉर्डर पर कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव के चलते से ये सर्जिकल मास्क ऊंची कीमतों पर बेच कर राजस्व एकत्रित किया जाए। चीन और थाईलैंड के सीमावर्ती इलाकों में भी ये मास्क भेजे जा रहे हैं। 
 

बता दें कि कोरोनावायरस फैलने के बाद चीन में रोजाना 400 मिलियन सर्जिकल मास्क बिक रहे हैं। वहां पर सभी लोगों के लिए यह मास्क लगाना जरूरी कर दिया गया है। म्यांमार में काफी सामान चीन से ही जाता है। इनमें मास्क भी शामिल हैं। चूंकि अब चीन से म्यांमार में ज्यादा मास्क नहीं जा पा रहे हैं, इसलिए वहां पर इनकी कालाबाजारी शुरू हो गई है।

अगर ऑनलाइन मास्क का ऑर्डर दिया जाता है, तो वह थोक में मिलता है। किसी को पांच-दस मास्क मिलना बहुत मुश्किल है। सभी कंपनियां थोक में खरीदने की बात करती हैं। इस मारामारी का फायदा मणिपुर के आतंकी समूह उठा रहे हैं।

खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार की सीमा से सटे मणिपुर के कुछ जिलों में पीएलए/आरपीएफ सर्जिकल मास्क एकत्रित कर रही है।

एसएस कैप्टन पंथोही को इन संगठनों का रेवेन्यू अफसर और राजस्व कमेटी 'कॉरकॉम' का सदस्य बताया जाता है। पंथोही ने टेंगनूपाल के कई उद्योगपतियों से कहा है कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में कोरोनावायरस से बचाव वाले सर्जिकल मास्क तैयार करें।

सूत्रों के मुताबिक, उद्योगपतियों से यह भी कहा गया है कि वे यह मास्क खुद से तैयार नहीं कर पाते हैं, तो दूसरी जगह से थोक में मंगा लें। पीएलए/आरपीएफ ने कहा है कि उसे सर्जिकल मास्क की एक बड़ी खेप चाहिए। उद्योगपतियों को सप्लाई के लिए भी दिशा निर्देश दिए गए हैं।

उनमें बताया गया है कि वे सर्जिकल मास्क को वेली बेस्ड इनसर्जेंट ग्रुप (वीबीआईजी) तक पहुंचा दें। यहां से इन मास्क को चाइना म्यांमार बॉर्डर पर बेचा जाएगा। अब म्यांमार में चीन से कोरोना वायरस के फैलने का डर सता रहा है।



पीएलए/आरपीएफ इसी का फायदा उठाते हुए अपने सदस्यों के जरिये सर्जिकल मास्क को म्यांमार बॉर्डर और सीमावर्ती इलाकों में मुंह मांगे रेट पर बेचने में लगा है। साथ ही चीन और थाईलैंड के सीमावर्ती इलाकों में भी ये मास्क पहुंचाए जाने की तैयारी हो रही है।

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