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कोरोना वायरस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- क्या गरीबों को निजी अस्पतालों की दया पर छोड़ दें

Sat, 01 May 2021 02:59 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 01 May 2021 02:59 AM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, डॉक्टरों को भी नहीं मिल पा रहे बेड, हालात गंभीर
  • छात्रावास, मंदिर और चर्च को बनाएं कोविड देखभाल केंद्र

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Coronavirus: Supreme Court said leave the poor at the mercy of private hospitals
supreme court - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कोरोना वायरस के प्रबंधन से जुडे़ स्वत: संज्ञान लिए मामलों में सुनवाई के दौरान कहा, गरीब लोग पैसा देकर टीका नहीं लगवा पाएंगे। ऐसे में केंद्र को राष्ट्रीय टीकाकरण मॉडल अपनाना चाहिए। अनुसूचित जाति/जनजाति आबादी और हाशिए पर खडे़ लोगों का क्या होगा? क्या उन्हें निजी अस्पतालों की दया पर छोड़ देना चाहिए? 18 से 45 वर्ष के बीच की आबादी का वास्तविक आंकड़ा क्या है?

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कहा, डॉक्टरों को भी नहीं मिल पा रहे बेड, हालात गंभीर
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने कहा, अग्रिम मोर्चे के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी इलाज के लिए बेड नहीं मिल पा रहे थे और बीते 70 साल में विरासत में मिली स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं और हालात गंभीर है। पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। कोर्ट ने कहा, देश का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र बदतर स्थिति में आ गई है। ऐसे में सेवानिवृत्त डॉक्टरों या अधिकारियों को इस संकट की घड़ी में फिर से नियोजित किया जा सकता है।
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छात्रावास, मंदिर और चर्च को बनाएं कोविड देखभाल केंद्र
शीर्ष अदालत ने कहा कि छात्रावासों, होटलों, मंदिरों, चर्चों और अन्य स्थानों को कोविड-19 देखभाल केंद्र के रूप में परिवर्तित करने के लिए खोला जाए। कोर्ट ने केंद्र को कोरोना पर की गई तैयारियों के बारे में बताने के लिए विस्तृत ब्योरा देने की इजाजत दी।
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मरीजों से भारी भरकम वसूल रहे अस्पताल, कैसे लगाएंगे लगाम
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि क्या परीक्षण प्रयोगशालाओं को कोरोना वायरस के नए स्वरूप पर निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। शीर्ष अदालत ने पूछा, आरटी-पीसीआर परीक्षणों में नए स्वरूप का पता नहीं चल रहा है। चिकित्सा केंद्र पॉजिटिव रिपोर्ट के बिना रोगियों को भर्ती नहीं कर रहे हैं या भारी रकम वसूल कर रहे हैं। इस पर किस तरह से लगाम लगाई जा रही है?

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