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'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' की चपेट में आ रहे संक्रमणमुक्त मरीज, जानें क्या है इसके पीछे का कारण

Tue, 15 Dec 2020 01:02 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 15 Dec 2020 01:02 PM IST
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Coronavirus recover patient again infecting virus and having post coronavirus infection
कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

देश में कोरोना वायरस से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 94 लाख को पार कर गई है। हालांकि, कुछ संक्रमणमुक्त मरीजों के देशभर में फिर से संक्रमण की चपेट में आने की खबरें सामने आ रही हैं। इस तरह लोगों के बीच 'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' (संक्रमणमुक्त होने के बाद भी वायरस के लक्षण होना) को लेकर डर बढ़ता जा रहा है। 

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दुर्लभ फंगल संक्रमण के मामले भी आ रहे सामने
'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' को 'रि-इंफेक्शन' (फिर से संक्रमित होना) और 'लॉन्ग कोविड' के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, कोरोना मरीजों के दुर्लभ फंगल संक्रमण की चपेट में आने के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिसमें मृत्यु दर 50 फीसदी तक है। फंगल संक्रमण के ऐसे मामलों में कोरोना मरीजों की आंखों और जबड़ों तक को निकालना पड़ रहा है। इन सब लक्षणों ने कोरोना मरीजों के साथ-साथ आम लोगों के भीतर डर पैदा कर दिया है। 
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क्या होता है 'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' 
'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' लक्षण वायरस के बचे हुए प्रभावों का एक समूह है, जबकि 'रि-इंफेक्शन' तब होता है जब रोगी दूसरी बार संक्रमण की चपेट में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस एक अजीब बीमारी है। 
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विशेषज्ञों ने बताया कि 'लॉन्ग कोविड' कोरोना वायरस बीमारी का हिस्सा है। पैथोलॉजी जितनी अधिक गंभीर होगी, पोस्ट कोविड के लक्षणों की अधिक संभावना होगी। 

उन्होंने कहा, हर बीमारी के बाद कुछ ना कुछ लक्षण होते हैं। जहां तक कोरोना वायरस का सवाल है, इस बीमारी में मरीज के ठीक होने के बाद फेफड़ों की बीमारी, थकान आदि की समस्या देखने को मिलती है। 

दुर्लभ फंगल संक्रमण की चपेट में आ रहे मरीज

वहीं, कोरोना वायरस से जूझ रहे मरीजों को एक और बीमारी से जूझना पड़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ मरीजों में कोरोना वायरस की वजह से एक प्रकार की एलर्जी (फंगल संक्रमण) देखने को मिल रही है जोकि नाक और मुंह के जरिए आंखों तक पहुंचती है। इसके बाद यह सीधे दिमाग की ओर बढ़ने लगती है। 

यह भी पढ़ें: कोरोना मरीजों की निकालनी पड़ रही आंखें और जबड़ा, 15 दिन के भीतर 13 मरीज आए सामने, पांच की हुई मौत 

गौर करने वाली बात है कि शरीर के जिस जिस अंग से होते हुए यह एलर्जी बढ़ती है वह अंग पूरी तरह से खत्म हो जाता है और डॉक्टरों के पास उसे बाहर निकालने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं होता। ऐसे मामलों में कोरोना मरीजों की आंखें और जबड़ा तक निकालना पड़ रहा है।  

'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' क्यों होता है? 

जब विशेषज्ञों से सवाल किया गया कि आखिर क्यों कोरोना से संक्रमणमुक्त हो चुके मरीजों में 'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' के लक्षण दिखाए देते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि जब वायरस शरीर पर हमला करता है, तो यह एंजियोटेंसिन-कंवर्टिंग एंजाइम (एसीई) रिसेप्टर से जुड़ जाता है, जो एक हार्मोन है और रिसेप्टर्स और रक्त कोशिकाओं को कमजोर करता है।

चूंकि नई लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने में 120 दिन लगते हैं, इसलिए वायरस शरीर में बना रहता है और 'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' का कारण बनता है। यह सिर्फ एक परिकल्पना है और 'लॉन्ग कोविड' के वास्तविक कारण को समझने के लिए शोध चल रहा है। 






संक्रमणमुक्त हो चुके मरीजों में से 10 फीसदी में 'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' दिखाई देते हैं। जिन मरीजों में 12 सप्ताह से अधिक समय तक लक्षण दिखाई देते हैं, वे क्रॉनिक कोविड-19 में प्रवेश करते हैं। बुजुर्ग लोग, विशेष रूप से पहले से ही किसी बीमारी से जूझ रहे बुजुर्गों में 'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' की अधिक संभावना होती है। 

टीकाकरण के बाद क्या मास्क लगाना होगा? 

वहीं, बहुत से लोगों का मानना है कि अगर उन्हें कोरोना की वैक्सीन लग चुकी है तो उन्हें मास्क नहीं पहनने की जरूरत है। हालांकि विशेषज्ञों की राय इससे एकदम जुदा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक वैक्सीन को लेकर हमारे पास यह जानकारी है कि अगर किसी को वैक्सीन लगती है तो वह संक्रमण से बच सकता है। इसका मतलब है कि वैक्सीन लोगों को बीमार होने से बचाती है और उसमें वायरस के लक्षण नहीं होते हैं। 

विशेषज्ञों ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वैक्सीन लगने के बाद क्या वह व्यक्ति कोरोना को दूसरों तक फैला सकता है या नहीं। यह संभव है कि किसी व्यक्ति को वैक्सीन लग गई है, लेकिन अभी भी वह एसिम्पटोमेटिक है। इस तरह वह बोलने, सांस लेने और छींकने के जरिए वायरस को फैला सकता है। यही वजह है कि लोगों को वायरस की वैक्सीन लगने के बाद भी मास्क लगाना चाहिए।   

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