Coronavirus: संक्रमितों के ईलाज के दौरान बीमारी की चपेट में आए डॉक्टर-नर्स अब कैसे कर रहे अपनी सुरक्षा
- संक्रमण से खुद को बचाए रखना किसी भी स्वास्थ्यकर्मी की सबसे पहली प्राथमिकता
- विशेष पीपीई किट्स स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर सुरक्षा कवर उपलब्ध कराते हैं
- इस्तेमाल तौलिया जैसे सामानों को विशेष रासायनिक घोल में एक घंटे तक डुबाकर रखा जाता है
विस्तार
डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल के छह डॉक्टर और चार नर्सों के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सेना के एक डॉक्टर के भी कोरोना के संक्रमण में आने की खबर आई है। इसके अलावा दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लिनिक के बदरपुर और दिलशाद गार्डन के दो डॉक्टरों के भी कोरोना संक्रमित होने का मामला सामने आ चुका है।
कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के भी संक्रमित होने की खबरों से सामान्य लोगों में कोरोना के प्रति भय पैदा उतपन्न हो गया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह भय बिलकुल गलत है। शुरुआती दौर में जब तक किसी बिमारी के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती है, तब तक कुछ डॉक्टर या नर्सों के भी इसकी चपेट में आने की संभावना बनी रहती है।
लेकिन जैसे ही विषय के बारे में पर्याप्त जानकारी आ जाती है, लोगों का इसकी चपेट में आना रुक जाता है। कोरोना वायरस के सन्दर्भ में यह बात चीन और इटली में भी सत्य साबित हुई है और हिन्दुस्तान में भी।
एलएनजेपी अस्पताल के शीर्ष डॉक्टर किशोर सिंह के मुताबिक अस्पताल में हों या क्वारंटीन रखने के समय संक्रमण से खुद को बचाए रखना किसी भी स्वास्थ्यकर्मी की सबसे पहली प्राथमिकता होती है।
इसके लिए बीमार व्यक्तियों के इलाज के दौरान विशेष दस्ताने पहनकर अपनी ड्यूटी निभाने की आवश्यकता होती है। मौजूदा समय में विशेष पीपीई किट्स स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर सुरक्षा कवर उपलब्ध कराते हैं।
इनको पहनने के बाद किसी तरह के संक्रमण का डर नहीं रह जाता है। इन किट्स से स्वास्थ्यकर्मियों के हाथ, पैर और आंख तक ढके और प्रोटेक्टेड होते हैं।
आईसीएमआर के एक विशेषज्ञ के मुताबिक, किसी संक्रामक बीमारी के इलाज के दौरान शुरुआती दौर में जानकारी के अभाव में इस तरह की घटनाएं घट जाती हैं, लेकिन यह सामान्य नहीं होता।
जल्दी ही इससे सीखकर संक्रमण को रोकने का पूरा सिस्टम तैयार कर लिया जाता है। उसके बाद किसी भी स्वास्थ्यकर्मी को सामान्य स्थिति में संक्रमण नहीं होता।
एंबुलेंस भी पूरी तरह सुरक्षित
कोरोना संक्रमित व्यक्ति का पता चलने पर उसे अस्पतालों तक पहुंचाने वाली एंबुलेंस भी पूरी तरह सुरक्षित रहे, इसका लगातार ध्यान रखा जा रहा है। ड्राइवर सहित इन एंबुलेंस में काम कर रहे सभी स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट्स में सुरक्षित रहते हैं। इस तरह संक्रमित व्यक्ति से उन्हें कोई संक्रमण नहीं हो पाता है।
दूसरे, एंबुलेंस को भी रोजाना सैनिटाइज किया जा रहा है। ड्यूटी के पहले और बाद में इन वैन को पूरी तरह संक्रमण रहित किया जाता है।
होटलों में किस तरह हो रहा बचाव
दिल्ली के डॉक्टरों और नर्सों को संक्रमण से बचाने के लिए सभी सुविधाओं का उपयोग किया जा रहा है। डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक सभी लोगों को डिस्पोजेबल पीपीई किट्स दी जा रही हैं।
इससे कोरोना वायरस का स्वास्थ्यकर्मियों के कपड़ों से संक्रमण फैलने का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है। इन्हें जिन अस्पतालों में रखा जा रहा है, वहां भी इन्हें विशेष तरीकों से रखा जा रहा है जहां संक्रमण की गुंजाइश पूरी तरह खत्म कर दी जाती है।
चेहरा तक नहीं देख सकेंगे डॉक्टर
इन स्वास्थ्यकर्मियों को राजधानी के दो बड़े पांच सितारा होटलों में जिन कमरों में रखा जा रहा है, उनमें पूरी व्यवस्था मौजूद रहेगी। उन्हें अगले 14 दिन तक उनके कमरों से बाहर निकलने की इजाजत नहीं होगी। यहां तक कि वे किसी दूसरे व्यक्ति का चेहरा तक नहीं देख सकेंगे।
बंद कमरों में उन्हें भोजन भी बेहद सुरक्षित तरीके से गेट के नीचे से उपलब्ध कराया जाएगा। दिन में केवल एक बार कमरे की सफाई की व्यवस्था के लिए गेट खोलने की इजाजत होगी।
लेकिन इन कमरों की सफाई करना वाला भी दक्ष स्वास्थ्यकर्मी ही होगा। सफाई के दौरान वह भी पीपीई किट्स पहने होगा, यानी इस दौरान भी वह न तो किसी दूसरे को संक्रमित कर सकेगा और न ही वह स्वयं किसी संक्रमण का शिकार होगा।
डिस्पोजेबल समान का इस्तेमाल
इन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ज्यादातर समान डिस्पोजेबल कैटेगरी का होगा। इन सामानों को भी बायो वेस्ट कचरे की तरह निबटान किया जाएगा। इन कचरों को सुरक्षित माहौल में ले जाकर जला दिया जाएगा, जबकि तौलिया जैसे सामानों को विशेष रासायनिक घोल में एक घंटे तक डुबाकर रखा जाता है जिससे ये संक्रमण मुक्त हो सकें।
उसके बाद ही इन्हें दुबारा इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान कमरों की सफाई भी विशेष विधि से की जाती है। कमरों के हैंडल, बार या किसी स्टैंड को भी संक्रमण मुक्त किया जाता है।
पीपीई किट्स कितनी सुरक्षित
इंडिया मार्ट से वेल्ड्स एंड प्रोटेक्शन कंपनी के शीर्ष अधिकारी हाजिम के मुताबिक पीपीई किट्स किसी भी संक्रमणयुक्त माहौल में काम करने वाले व्यक्तियों को संक्रमण होने से बचाने के लिए विशेष तरीकों से बनाया जाता है।
इसे पहनने के बाद शरीर का कोई भी अंग संक्रामक पदार्थ के सीधे संपर्क में नहीं आता है। किट्स बनाने में विशेष कपड़ों, रबर और डिस्पोजेबल पेपर का इस्तेमाल किया जाता है।
आज के बाजार में यह पांच सौ रुपये से लेकर 1500 रुपये तक में उपलब्ध होता है। इसके आलावा स्वास्थ्यकर्मी सैनिटाइजर और अन्य तरीकों से अपने अंगों को संक्रमण से बचाने की कोशिश भी करते हैं।
स्वास्थ्यकर्मियों के लिए क्या है सुरक्षा उपाय
- स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई किट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
- कोरोना मरीजों के इलाज के दौरान सामान्य लोगों, परिवार से पूरी तरह अलग-थलग रहना है जिससे संजरमण दूसरों तक न फैले।
- अलग-अलग पाली में काम करेंगे । एक पाली के काम के बाद वे 14 दिन आइसोलेट रहेंगे। जबकि इसी दौरान दूसरी यूनिट कोरोना मरीजों की देखभाल करेगी।
- इस सेवा के दौरान डॉक्टर डिस्पोजेबल सामानों का इस्तेमाल करेंगे।
- राज्य सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष बीमा देने की घोषणा की है।