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कोविड-19 : कसौटी पर है प्रधानमंत्री मोदी की छवि, हर हाल में जीतना चाहते हैं लड़ाई

Mon, 06 Apr 2020 03:06 AM IST
योगेश साहू शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली।
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Mon, 06 Apr 2020 03:06 AM IST
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Coronavirus : Prime Minister Narendra Modis image is on test, want to win the battle with covid-19 in any case
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलाया दीया - फोटो : अम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर देश के करोड़ों लोगों ने रविवार रात 9 बजे दीये जलाए। देश में जहां नई ऊर्जा, आशा, उम्मीद का संचार हुआ वहीं विदेश मंत्रालय के सूत्रों का मानना है कि इस समय प्रधानमंत्री मोदी और देश के लिए बहुत कठिन समय चल रहा है।

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यदि प्रधानमंत्री कोविड-19 की यह लड़ाई जीत गए तो वह दुनिया के नंबर वन नेता बन जाएंगे। लेकिन मई के दूसरे सप्ताह तक यदि कोविड-19 का संक्रमण तेजी से पांव पसारने में सफल हो गया तो उनकी छवि को गहरा झटका लग सकता है। इस बीच नीति आयोग के सदस्य, जाने माने चिकित्सक और कोविड-19 पर बनी समिति के अध्यक्ष डॉ. विनोद पाल ने भरोसा दिलाया है कि कोविंड-19 की जंग भारत जीत लेगा। 
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कोरोना से हर हाल में जंग जीतना है मकसद
प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सचिवालय, विदेश मंत्रालय के सूत्र प्रधानमंत्री के काम करने की क्षमता की तारीफ करते हैं। बताते हैं कि खुद को योग क्रियाओं से फिट रखने वाले प्रधानमंत्री इस समय भी 15-16 घंटे लगातार काम कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार खुद राजनयिकों से, राजदूतों से, अधिकारियों, सचिवों, राज्यों के प्रमुख सचिवों, मुख्यमंत्रियों, विश्व के नेताओं से बात कर रहे हैं।
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परस्पर सहयोग के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों, फिल्म और बॉलीवुड के लोगों से भी सहयोग मांगा है। एक वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री लगातार अपडेट लेते हैं। प्रधानमंत्री की फिलहाल कोशिश कोविड-19 की जंग को हर हाल में जीतना है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सचिवालय और मंत्रालयों को अलग-अलग जिम्मेदारी दे रखी है।

यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री ताली, शंख बजवाते और दीया भी जलवा रहे हैं, एक एडिशनल सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी ने कहा कि इसी के भरोसे कठिन समय पार हो गया। सूत्र का कहना है कि कोविड-19 जैसे संक्रमण को बिना जनता की जागरुकता और सहयोग के जीतना संभव नहीं। प्रधानमंत्री का यह प्रयास इसी दिशा में है।

डॉ. विनोद पाल ने दिलाया भरोसा

डॉ. विनोद पाल ने रविवार को बातचीत में कहा कि कोविड-19 का खतरा तो है, लेकिन सरकार ने सही कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हम कोविड-19 के संक्रमण को नियंत्रित करने में सफल होंगे। इसके लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। डॉ. पाल ने इससे पहले बताया कि भारत के पास चिकित्सा का साजो-सामन अपनी जरूरत के आस-पास था।

अब अचानक बड़े पैमाने पर संसाधनों की जरूरत पड़ी है। इसलिए गाइडलाइन आदि तय करने में कुछ समय लगा। अब सब तय हो गया है। रेमंड समेत देश के शीर्ष घरेलू उद्योगों से संसाधनों की आपूर्ति में सहायता ली जा रही है। विदेशों से भी सामान का आयात किया रहा है। डॉ. पाल ने कहा कि 15 अप्रैल तक नक्शा बदल जाएगा।

शंख बजवाना या दीया जलाना, ये तो साइकोलॉजिकल पिल्स हैं

विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि प्रधानमंत्री चाहे शंख बजवाएं या दीया जलवाएं, इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई फर्क नहीं पड़ता। यह साइकोलॉजिकल पिल्स हैं। सूत्र ने बताया कि फिलहाल पूरी दुनिया में कोविड-19 की भयावह तस्वीर दिखाई पड़ रही है।

फरवरी के महीने तक इटली, अमेरिका समेत तमाम यूरोपीय देशों की तरह हमें लगा कि यहां कोविड-19 संक्रमण न के बराबर होगा, लेकिन अब डर बढ़ रहा है। हवाई अड्डे पर थर्मल स्क्रीनिंग की निर्भरता गलत साबित हुई। आज हमें बहुत बड़े पैमाने पर जांच किट, मास्क, फेस शील्ड, गॉगल, वेंटिलेटर, आईसीयू बेड समेत अन्य संसाधनों की जरूरत है।

बिना आयात के मौजूदा संकट से नहीं जूझ सकते। चीन, जापान, कोरिया, सिंगापुर से चिकित्सीय साममानों के आयात का प्रयास भारत कर रहा है। प्रधानमंत्री ने खुद विश्वभर में फैले मिशनों, राजदूतों से हर संभव प्रयास करने को कहा है, लेकिन काफी मुश्किल का सामना कर पड़ रहा है।

सूत्र के अनुसार अभी भारत में कोविड-19 का खतरनाक स्वरूप नहीं उभरा है, इसलिए हमारे प्रयासों और प्रधानमंत्री की दुनियाभर में तारीफ हो रही है, लेकिन मई के दूसरे सप्ताह तक स्थिति पलटने का खतरा बरकरार है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, गृहमंत्रालय बात करने से फिलहाल कतरा रहे

देश में पीपीई किट, वेंटिलेटर, क्वारंटीन बेड, जांच किट समेत अन्य को लेकर पूरी गाइडलाइन फाइनल होने में मार्च 2020 तक का समय लग गया। मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि हमें एकाएक बड़े पैमाने पर चिकित्सीय सामानों की जरूरत पड़ रही है, इसलिए कुछ समस्या आ रही है। केंद्र सरकार इन समस्याओं का युद्ध स्तर पर निबटारा करने में लगी है।

डीआरडीओ के लाइफ साइंसेज विभाग से जुड़े सूत्र के अनुसार देश में एन-95 मास्क, ग्लव्स, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा समेत सभी चिकित्सीय सामान की जरूरत है। सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री खुद सभी चीजों को समझ रहे हैं। वह लगातार रिपोर्ट ले रहे हैं और उनके स्तर पर तेजी से हर गतिरोध का निबटारा हो रहा है।

वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी चिकित्सा संसाधनों की कमी और उपलब्धता को लेकर अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल, निदेशक रवींद्रन भी मीडिया से बात करने या सार्वजनिक स्तर पर जानकारी देने से बचते हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने खुद को मीडिया आदि से दूर कर लिया है।

एक अंडर सेक्रेटरी का कहना है कि अभी सरकार का मुख्य ध्यान जहां से भी गुणवत्ता के सामान मिल सकें, उसे सुनिश्चित करना है। इसके साथ-साथ यह तस्वीर भी पूरी तरह से साफ नहीं है कि हमें किस सामान की और कितनी संख्या में जरूरत है। सूत्र का कहना है कि सबकुछ अभी अनुमानित है।

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