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रामायण का असर: मम्मी की जगह माता, फूड को भोजन बोलने लगे आज के बच्चे

Sun, 19 Apr 2020 01:48 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sun, 19 Apr 2020 01:48 PM IST
सार

बच्चे इन शब्दों के बारे में जानना शुरू कर रहे हैं:
  • टीचर को गुरुजी
  • माता-पिता को माताजी और पिताजी
  • चाचा-चाची को काका और काकी
  • भाई को भ्राता
  • फूड को खाना
  • सुबह को भोर

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Coronavirus Lockdown: Ramayan serial impacting children and their family, now they using Hindi words
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

देश में लॉकडाउन का दूसरा चरण जारी है, जो तीन मई तक लागू रहेगा। इस दौरान लोगों के मनोरंजन के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दूरदर्शन पर रामानंद सागर द्वारा बनाए गए टेलीविजन धारावाहिक रामायण का दोबारा प्रसारण शुरू किया है। इसका असर घर के मासूम बच्चों पर भी नजर आ रहा है। घर के बड़े और बुजुर्गों के साथ ये बच्चों का भी पसंदीदा कार्यक्रम बन गया है।

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इस धारावाहिक में नजर आ रहे किरदारों की भाषा शैली बच्चों को काफी भा रही है। अब बच्चे इस भाषा का दैनिक जीवन में उपयोग करने लगे हैं। परिजनों का कहना है इन शब्दों को बोलने से उन्हें अपनापन महसूस होता है। जब से रामायण शुरू हुआ है तब से बच्चों और हमारी भाषा शैली पर भी बड़ा असर पड़ा है। 
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कुछ लोग तो रामायण देखने के बाद अब उन स्थानों पर घूमने का मन बना रहे हैं जहां भगवान राम ने अपने वनवास के दिन बिताए थे। लोग श्रीलंका जाने के साथ ही रामसेतु और रामेश्वरम देखने की योजना बना रहे हैं।
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इस धारावाहिक की वजह बच्चे परिजनों से काफी सवाल करने लगे हैं। वो परिजनों से पूछ रहे हैं कि, गुरुकुल कब बंद हुए? बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में क्यों छोड़ दिया जाता है? भाइयों में लड़ाई क्यों होती है? हनुमान जी ने इतना बड़ा समुद्र कैसे लांघा?


इसके अलावा बच्चे नए शब्द भी सीख रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि बच्चे दैनिक जीवन में भी इन शब्दों को प्रयोग कर रहे हैं। बच्चे टीचर को गुरुजी, माता-पिता को माताजी और पिताजी, चाचा-चाची को काका और काकी, भाई को भ्राता, फूड को खाना और सुबह को भोर कहकर पुकार रहे हैं। वो इनके अलावा भी अन्य हिंदी शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।

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