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CoronaVirus: अमेरिकी डॉक्टर बोले, लक्षण दिखे तो खुद सामने आएं, वर्ना थर्ड स्टेज में जाने से नहीं बचेंगे

Sat, 28 Mar 2020 03:23 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 28 Mar 2020 03:23 PM IST
सार

  • अमेरिका में स्थिति बहुत खराब है, फिर भी लोग छिपा नहीं रहे ... 
  • खुद चले जाते हैं अस्पताल या बुला लेते हैं एंबुलेंस
  • जिन लोगों को बाहर जाना पड़ता है, वे छह फुट की दूरी बनाकर रखते हैं

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coronavirus india live update: US doctors said, if you find symptoms immediately consult with health department
Coronavirus- doctors in hospital - फोटो : PTI

विस्तार

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अमेरिका में कोरोना के मामले एक लाख का आंकड़ा पार कर गए हैं, लेकिन वहां के लोग कोरोना के लक्षण दिखने पर उसे छिपा नहीं रहे। शिकागो में रह रहे डॉ. मुनीश रायजादा का कहना है कि अमेरिका में स्थिति बहुत खराब है, मगर यहां के लोगों की लक्षण दिखने पर उसे न छिपाने की आदत अपनाकर भारत कोरोना वायरस की थर्ड स्टेज में जाने से बच सकता है। अमेरिका में ऐसे किसी व्यक्ति को लेने पुलिस प्रशासन या डॉक्टर नहीं आते। लोग खुद अस्पताल जाकर अपनी जांच कराते हैं, नहीं तो घर पर एंबुलेंस कॉल कर लेते हैं।

 
डॉ. रायजादा के अनुसार, अमेरिका में कोरोना का एपिसेंटर न्यूयार्क है। बाकी जगहों पर भी कोरोना ने तेजी से अपने पांव पसारे हैं। यहां शट डाउन है, लेकिन लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर सचेत हैं। बहुत से लोगों ने अपने घर पर ही कोरोना वायरस के लक्ष्णों का पता लगाने वाले उपकरण रखे हुए हैं।

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इस वायरस के 43 फीसदी से ज्यादा केस छह राज्यों, जिनमें न्यूयार्क,  कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी और इलिनोइस आदि शामिल हैं, में सामने आ रहे हैं। शटडाउन में सभी लोगों के पास पर्याप्त खाने-पीने का सामान है। सभी लोग शटडाउन का पालन कर रहे हैं। यहां पर जिन लोगों को बाहर जाना पड़ता है, वे छह फुट की दूरी बनाकर रखते हैं।
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अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके शरीर में कोरोना जैसे लक्ष्णों से मिलता जुलता कुछ है, तो वह बिना देरी किए अस्पताल में चला जाता है। जिनकी आयु ज्यादा है, वे एंबुलेंस बुला लेते हैं। निकटवर्ती अस्पताल में कोरोना टेस्ट की सुविधा उपलब्ध होती है।

बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो डॉक्टर की सलाह से अपने घर पर ही सेल्फ आइसोलेशन में चले जाते हैं। यहां पर भी 14 दिन का क्वांरटीन है। नियमानुसार, एक अस्पताल में आईसीयू के जितने बेड हैं, उनकी संख्या के दस फीसदी वेंटिलेटर होने चाहिए।

कोरोना वायरस का पॉजिटिव केस है तो मरीज को कई बार निमोनिया की शिकायत होती है, ऐसे में वेंटिलेटर की मदद लेनी पड़ती है।

जिस हिसाब से अमेरिका में कोरोना संक्रमण के केस आ रहे हैं, उनके मद्देनजर यहां वेंटिलेटर बहुत कम हैं। मास्क भी उतनी संख्या में नहीं हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका में लोग बहुत जागरूक हैं और खुद से लोग सामने आते हैं। भारत में लोग इस बीमारी को छिपाना चाह रहे हैं।

यह बात समझ से परे है कि लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। शहर और गांव में जितने केस मिल रहे हैं, वह छिपावट का ही नतीजा है। अगर वे समय रहते खुद की जांच कराने अस्पताल पहुंच जाते या पता लगने पर खुद को क्वांरटीन कर लेते तो केस इतने अधिक नहीं बढ़ते।

अब तो भारत में लॉकडाउन हो गया है, लेकिन लोग अभी भी कोरोना संक्रमण के लक्ष्णों को छिपा रहे हैं। अगर यूं ही चलता रहा तो भारत के थर्ड स्टेज में जाने का खतरा बढ़ जाएगा।


सरकार को चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा जगहों पर टेस्ट की सुविधा मुहैया कराए। साथ ही यह भी पता लगाए कि लोग इस बीमारी को छिपाना क्यों चाहते हैं। लोगों की इस नासमझी के चलते कोरोना आसानी से तीसरी स्टेज में जा सकता है।

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