भारत में कोरोना वायरस महामारी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों का पहले अनुमान था कि देश में जुलाई के चौथे सप्ताह में संक्रमित मरीजों की संख्या 10 लाख पार हो सकती है लेकिन पांच दिन पहले ही यह आंकड़ा पार हो चुका है। इसके साथ ही भारत वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला तीसरा देश बन गया है। एक से लेकर 16 जुलाई के बीच देश में पांच लाख से अधिक मामले मिले हैं। मामले बढ़ने की एक वजह लोगों में जागरुकता की कमी है। जिसके कारण कोरोना का विस्फोट हो रहा है और मामले बढ़ रहे हैं। शासन-प्रशासन जहां मामलों को नियंत्रित करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं वहीं लोग लापरवाही के चलते उनकी मेहनत पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि लोगों की किन लापरवाहियों के कारण भारत में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
वो आत्मघाती कदम, जिनसे कोरोना वायरस से जंग में पिछड़ रहे हैं हम
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मास्क नहीं पहनना
सभी को पता है कि कोरोना के खिलाफ जंग के लिए मास्क पहनना कितना जरूरी है। इसके बावजूद बहुत से लोग बिना मास्क के दिखाई देते रहते हैं। उन्हें लगता है कि हमें कुछ नहीं होगा तो मास्क पहनकर फायदा क्या है। जबकि यह धारणा न केवल गलत है बल्कि खतरनाक भी है। सच्चाई यह है कि मास्क पहनने से आप काफी हद तक वायरस को शरीर में प्रवेश करने से रोक सकते हैं। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार लोगों से घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनने की अपील कर रही हैं। वहीं कुछ सरकारों ने मास्क न पहनने वालों पर जुर्माना भी लगाया हुआ है। इसके बावजूद लोग समझने को तैयार नहीं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के निर्देश के अनुसार, जहां संक्रमण ज्यादा है, वहां लोगों को हर हाल में मास्क पहनना चाहिए। भीड़भाड़ वाली जगहों में भी मास्क पहनना बेहद जरूरी है। सभी स्वस्थ लोगों को तीन परतों वाला फैब्रिक मास्क पहनना चाहिए। जो लोग बीमार हैं, वो मेडिकल ग्रेड का मास्क पहनें।
सामाजिक दूरी का पालन
कोरोना वायरस से बचाव के लिए दो गज की दूरी कितनी जरूरी है इसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में करते रहते हैं। इसके अलावा डॉक्टर भी लगातार लोगों से दूरी बनाकर रखने की अपील करते रहते हैं। लेकिन गाहे-बगाहे हमें ऐसे मामले देखने को मिल जाते हैं जिसमें लोग इसकी धज्जियां उड़ाते हुए दिखाई देते हैं। एक शोध में यह बात साबित हुई है कि सामाजिक दूरी से वायरस के प्रसार को कम किया जा सकता है। दो लोगों के बीच एक मीटर की दूरी कोरोना के खतरे को 82 प्रतिशत तक कम कर सकती है। डब्ल्यूएचओ ने भी दिशानिर्देश जारी कर कोरोना के खतरे से बचने के लिए सामाजिक दूरी को सबसे जरूरी उपाय बताया है। फिर भी लोग इसकी अनदेखी करते रहते हैं।
खराब रोग-प्रतिरोधक क्षमता
नियमों का पालन न करना