कंटेनमेंट जोन के स्तर पर राज्यों को नहीं मिल पा रही है सफलता
- दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के अलावा अन्य राज्य में भी गंभीर हो रहे हालात
- कुछ राज्यों की कार्यशैली से केंद्र में नाराजगी, बार बार करनी पड़ रही अपील
- बिहार में संक्रमण का ग्रोथ रेट 10 फीसदी से भी ज्यादा देखने को मिल रहा है
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कोरोना वायरस को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय हस्तक्षेप के बाद भले ही संक्रमण की स्थिति में सुधार देखने को मिला हो लेकिन देश के अन्य राज्यों में कंटेनमेंट जोन के स्तर पर सफलता हासिल नहीं हो पा रही है जिसको लेकर केंद्रीय टीमें भी अंदर ही अंदर नाराजगी व्यक्त कर रही हैं।
कुछ राज्यों की कार्यशैली समझ से परे होने का हवाला देते हुए इन टीमों का मानना है कि बार-बार अपील करने के बाद भी जमीनी स्तर पर बदलाव देखने को नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे अलर्ट वाले राज्यों की सूची में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश भी इसमें शामिल हो गए हैं। रोजाना मिलने वाले मरीज और मौतों के मामले में यह शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हैं।
मंत्रालय के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ दिनों में कोरोना संक्रमण को लेकर राज्यों में स्थिति बदली है। इसी के चलते दो दिन पहले ही बिहार के लिए केंद्रीय टीम को रवाना किया है। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत से जिन राज्यों में कोरोना वायरस के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे थे अब उनमें नए राज्य भी जुड़े हैं लेकिन यह सभी राज्य उन 10 की सूची में है जहां अबतक 90 फीसदी तक मरीज और 91 फीसदी तक मौतें मिल चुकी हैं।
डेटा एक्सपर्ट प्रोफेसर शमिका रवि के ही अनुसार कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा नए मरीज कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश में मिल रहे हैं। जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु में पहले से ही ज्यादा मरीज दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि दिल्ली, ओडिशा और उत्तराखंड में सुधार देखने को मिल रहा है। असम, बिहार, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में जांच को बढ़ाने की जरूरत है।
बिहार मे संक्रमण ग्रोथ रेट राष्ट्रीय औसत से ज्यादा
जानकारी के अनुसार बिहार में संक्रमण का ग्रोथ रेट 10 फीसदी से भी ज्यादा देखने को मिल रहा है जोकि राष्ट्रीय स्तर पर तकरीबन 4.1 फीसदी है। यहां कोरोना वायरस की मृत्युदर भी राष्ट्रीय औसत 2.54 फीसदी से ज्यादा 3.2 फीसदी दर्ज की गई है। इसके अलावा बिहार में अब तक संक्रमण की जांच को लेकर भी दिक्कतें आ रही हैं। यहां टेस्ट पॉजीटिविटी रेट (टीपीआर) करीब 5 फीसदी से ज्यादा है।
कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग के आंकड़ें सार्वजनिक नहीं : विशेषज्ञ
जोधपुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी के पूर्व प्रोफेसर रीजो एम जॉन का कहना है कि कंटेनमेंट जोन की रणनीति पर राज्यों के कार्य को कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग के जरिए आंका जा सकता है। लेकिन राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।
वहीं प्रोफेसर शमिका रवि ने भी सोमवार को सोशल मीडिया पर लिखा है कि उनके पास कर्नाटक और केरल का कुछ आंकड़ा है लेकिन कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग या संक्रमण के फैलाव का पता लगाने के लिए इतना काफी नहीं है।
वहीं केरल डेटा एक्सपर्ट जेम्स विल्सिन का कहना है कि कंटेनमेंट योजना पर अगर सही दिशा में काम होता तो देश में सक्रिय मरीजों के कम होने की रफ्तार और भी ज्यादा कम होती। सरकार हमेशा रिकवरी दर की वृद्धि पर बात करती है लेकिन संक्रमण की ग्रोथ पर नहीं।