राजधानी में लगभग 20 दिन से कोरोना संक्रमण कम फैल रहा है। बेहतर रणनीति और सबको साथ लेकर चलने जैसे 8 सूत्रीय कदमों को उठाकर दिल्ली सरकार ने तेजी से बढ़ते मामलों पर काबू पाया है। फिलहाल दिल्ली की रिकवरी दर भी 72 फीसदी से ऊपर है और मृत्युदर भी लगातार कम हो रही है।
मई में संक्रमण बेहद तेजी से बढ़ रहा था। सरकार ने अनुमान लगाया था कि जुलाई के अंत तक दिल्ली में मामले 5 लाख पार हो सकते हैं। इससे निपटने के लिए सरकार ने 8 सूत्रीय रणनीति बनाई और यह उसी का नतीजा है कि अब परिस्थितियां बदल रही हैं।
इस बीच बड़ी संख्या में ऐसे भी मरीज मिले जिनमें लक्षण नहीं थे, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव थी। कई मरीजों में तो वायरस का अलग-अलग रूप देखा गया है, लेकिन दिल्ली सरकार के आठ के दम से ‘बहरूपिया’ वायरस ‘बे-दम’ होने लगा है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
1. जांच में तेजी
दिल्ली में 5 जून तक रोजाना औसतन 6 हजार लोगों की जांच हो रही थी। जांच बढ़ाने के लिए सरकार ने केंद्र से सहायता मांगी। इसके बाद केंद्र सरकार ने 6 लाख एंटीजन किट दी और जांच बढ़ाई जा सकी। सभी 44 निजी लैब को भी कोरोना सैंपल की संख्या बढ़ाने के आदेश दिए गए। अब रोजाना 20 हजार जांच हो रही हैं। टेस्ट संख्या बढ़ाने के बाद भी संक्रमण के मामले कम आ रहे हैं। इससे संक्रमण दर घटकर 10 फीसदी हो गई है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
2. सीरो सर्वे
सभी इलाकों में सरकार ने सीरो सर्वे शुरू किया। कंटेनमेंट जोन से इसकी शुरुआत की गई। घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इससे कोरोना के लक्षण वाले लोगों कि पहचान कर आइसोलेट किया गया। साथ ही एंटीबॉडी टेस्ट कर यह पता लगाया जा रहा है कि किन लोगों मेें कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी है।
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प्लाज्मा थेरेपी
- फोटो : सोशल मीडिया
3. प्लाज्मा थैरेपी
सबसे बड़े कोविड अस्पताल एलएनजेपी में प्लाज्मा थैरेपी की शुरुआत की गई। पहले चरण में करीब 80 मरीजों को थैरेपी दी गई। परिणाम अच्छे आने के बाद निजी अस्पतालों में भी यह शुरू हुई। लोगों को प्लाज्मा लेने में परेशानी ने हो इसके लिए आईएलबीएस संस्थान में देश का पहला प्लाज्मा बैंक बनाया गया। अब जरूरतमंदों को आसानी से प्लाज्मा मिल रहा है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
4. ऑक्सीजन और अतिरिक्त आईसीयू बेड
सरकार ने सभी कोविड अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन व्यवस्था कराई। आईसीयू बेड की संख्या भी बढ़ाई गई। इससे अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई। बीते एक माह से राजधानी में कोरोना मृत्युदर 4 फीसदी से घटकर 3 पर पहुंच गई है।