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कोरोना वायरस संकट: संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहे देश में 'दिल्ली मॉडल' से आस

Wed, 07 Apr 2021 10:42 PM IST
गौरव पाण्डेय आशीष तिवारी, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 07 Apr 2021 10:42 PM IST
सार

पूरा देश देख रहा है कोविड की दूसरी लहर,  जबकि दिल्ली में है यह चौथी लहर। कोविड की हर लहर में दिल्ली ने खुद को साबित किया। यही वजह है पूरे देश में दिल्ली मॉडल से जग रही आस।

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Coronavirus: Delhi Model can tackle situation in whole country, here is all you need to know
कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाए लोग - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पूरे देश में दिल्ली ही इकलौता शहर है जो कोरोना वायरस संक्रमण की चौथी लहर देख रहा है। जबकि बाकी राज्यों और शहरों में कोरोना की यह दूसरी ही लहर है। कोरोना की हर लहर में दिल्ली ने नए-नए तरीकों से न सिर्फ खुद को बचाया है बल्कि पूरे देश मे एक नई नजीर पेश की है। अब जब पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है तो ज्यादातर राज्य और शहर इस आस में हैं कि क्या दिल्ली के कोरोना मॉडल से इस बार भी कोरोना की जंग पर काबू पाया जा सकता है।

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होम आइसोलेशन को सबसे ज्यादा बढ़ावा दिया
जिस दौर में कोरोना के नाम से ही लोगों को डर लग रहा था, दिल्ली ने होम आइसोलेशन को बढ़ावा देकर लोगों को न सिर्फ मानसिक रूप पर राहत दी बल्कि वैज्ञानिक तौर पर यह साबित कर दिया कि आइसोलेशन में मरीजों को बेहतर तरीके से रखकर ठीक किया जा सकता है। नतीजा हुआ कि एक दौर में दिल्ली में 80 फीसदी से ज्यादा लोग ठीक होकर वापस अपने काम पर लग गए। 
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माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाकर जीती जंग
पिछले साल दिल्ली में जब कोरोना के मामले अचानक बढ़ने लगे थे तो माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए जाने का निर्णय लिया गया था। माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए जाने का मतलब यह था कि पूरे इलाके को सील करने के बजाय सिर्फ छोटे-छोटे इलाकों को ही सील किया जाए जहां पर कोरोना के मामले सामने आ रहे थे। माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाकर ज्यादा से ज्यादा इलाकों को कवर किया गया और कोरोना के बढ़ रहे मामले में रोक लगाने का एक सफल प्रयास किया गया।
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जांच की संख्या बढ़ाने से भी मिली मदद
दिल्ली में जब पिछले दौर में कोरोना पीक पर था तो रैंडम जांच के साथ-साथ सीरो सर्वे भी कराया गया। कोरोना की रैपिड जांच से लोगों को वायरस के संक्रमण जानकारी मिल रही थी वही इस बात का भी पता चल रहा था कि लोगों में लक्षण नहीं है बावजूद उसके वह संक्रमित हो रहे हैं। आरटी-पीसीआर जांच में इस तरीके की पुष्टि होने के बाद ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच कराने का फैसला किया गया। नतीजा हुआ कि दिल्ली में आबादी के लिहाज से देश में सबसे ज्यादा जांच होने लगीं। 

कोविड प्रोटोकॉल के लिए सख्ती भी जरूरी
कोरोना से बचाव के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की जारी की गई गाइडलाइन से बहुत हद तक संक्रमण रोका जा सकता है। इस गाइडलाइन को फॉलो कराने के लिए दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार ने कड़े निर्णय लिए। कोविड की पहली, दूसरी और तीसरी लहर में दिल्ली में प्रवेश करने पर लोगों की बहुत सरलता से जांच की जाती रही। यह सुनिश्चित किया जाता रहा कि लोगों ने मास्क लगाया है या नहीं। इसके अलावा राजधानी में जगह-जगह रैंडम जांच भी होती रही।


कोविड मामलों पर नजर रखने वाली कमेटी के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली ने जिस तरीके से शुरुआती मामलों के आने के बाद जंग जीती वह निश्चित तौर पर बेहतर रही। अधिकारी ने बताया कि एक वक्त ऐसा भी आया जब दिल्ली में एक दिन में छह हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन अपनी चुस्त-दुरुस्त व्यवस्थाओं से न सिर्फ मामलों में कमी दर्ज हुई बल्कि संक्रमण की दर भी कम होती चली गई। 

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