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Coronavirus: प्रधानमंत्री जी, जनता दीया जरूर जलाएगी, लेकिन आप जवाब तो दीजिए - सुष्मिता देव

Sun, 05 Apr 2020 08:10 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sun, 05 Apr 2020 08:10 PM IST
सार

  • सरकार ने कोविड-19 से लड़ाई में पांच सप्ताह क्यों गंवाए
  • डाक्टर,नर्स, एंबुलेंस अस्पताल को कब उपलब्ध करवाएंगे मास्क, किट, हेजमेट सूट

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CoronaVirus: congress leader sushmita dev asked questions to PM modi about delays in actions
कांग्रेस नेता सुष्मिता देव (मध्य में) - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

कांग्रेस प्रवक्ता सुष्मिता देव ने बड़े संयम से प्रधानमंत्री से सवाल पूछे हैं। सुश्री देव ने कहा कि प्रधानमंत्री रात को 9 बजे देश की जनता 9 मिनट के लिए दीया जलाएगी, लेकिन आप जनता को इन सवालों का जवाब तो दे दीजिए। आखिर क्यों सरकार ने कोविड-19 से जंग की तैयारी में पांच सप्ताह गवां दिए।
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समय पर तैयारी शुरू नहीं की। सरकार बताए कि आखिर कब तक डाक्टर, नर्स, एंबुलेंस कर्मी हेलमेट पहनकर कोविड-19 के संक्रमितों से जूझते रहेंगे? सरकार कब उन्हें पीपीई, किट, गुणवत्ता के मास्क और सुरक्षा के उपकरण, संक्रिमितों की जांच के लिए किट, इलाज के लिए वेंटिलेटर उपलब्ध कराएगी।

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अमर उजाला से विशेष बातचीत में सुष्मिता देव ने कहा कि देश की जनता और डा. चिकित्सा में लगे लोग जमीनी हकीकत से जूझ रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री जी देश की जनता से शंख, ताली बजवाकर और आज रात को दीया जलवाकर स्काईवॉक कर रहे हैं।

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पूरे देश से खबर आ रही हैं कि डाक्टर, नर्स, चिकित्सा कर्मियों, एंबुलेंस ड्राइवर के पास पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) नहीं है। इनकी भारी मांग हैं। महज 34 हजार पीपीई किट है, जबकि जरूरत 62 लाख की है।

लगभग 50 डाक्टर कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं। इसलिए हम प्रधानमंत्री से पूछना चाहते हैं कि वह कब चिकित्सा विभाग से लोगों न्यूनतम जरूरी संसाधन मिल पाएंगे?

पांच सप्ताह क्यों गंवा?

27 फरवरी को ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पीपीई किट को लेकर जताया था। संगठन ने बताया था कि विश्व में पीपीई किट आदि की भारी कमी होने वाली है। देश के किट निर्माताओं ने भी सरकार से संपर्क किया, लेकिन सरकार ने 21 मार्च तक खामोश रही।

24 मार्च तक सरकार ने पीपीई किट को लेकर कोई गाइडलाइन जारी नहीं की। यदि सरकार ने समय पर यह निर्णय ले लिया होता तो आज हमारे सुरक्षा और चिकित्साकर्मी सुरक्षा के जरूरी उपकरणों की कमी का सामना नहीं कर रहे होते। यहां तक कि पीपीई किट की टेस्टिंग एजेंसियों आदि को लेकर अभी गाइडलाइन जारी नहीं हो सकी है।

वेंटिलेटर, आईसीयू बेड आदि कब होंगे जरूरत के मुताबिक

सुष्मिता देव ने सरकार की लेटलतीफी पर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि कमी केवल पीपीई किट, जांच किट की ही नहीं है, वेंटिलेटर, आईसीयू बेड आवश्यकता से कई गुना कम हैं। यह सब स्थिति सरकार के देर से चेतने के कारण पैदा हुई है।

इसी तरह से कोविड-19 का इलाज करने वाले लोगों के संक्रमित होने और दुर्घटना होने पर मुआवजा देने, टेस्टिंग किट, पर्याप्त संख्या में लोगों, संक्रमितों की जांच शुरू किए जाने को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल पूछे हैं।

एक नजर में : दीये जलाने पर कांग्रेस के सरकार से 9 सवाल

कांग्रेस का कहना हम दीया जलाने की प्रधानमंत्री की अपील के साथ हैं लेकिन करोनो से लडाई का ये समाधान नहीं है। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और प्रवक्ता सुष्मिता देव ने नौ सवाल उठाए। 

  1. कोरोना लडाई में सबसे अहम डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्य कर्मी, एंबुलेंस कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए तत्काल पीपीई आपूर्ति बढ़ाई जाए। 
  2. सरकार ने पांच सप्ताह की देर क्यों की। जब 21 मार्च को पीपीई बनाने वाली कंपनियों ने संपर्क किया। 24 मार्च तक कोई गाइडलाइन तैयार नहीं की।
  3. पीपीई किट तैयार हो जाने पर भी उसे बिना जांच इस्तेमाल में नहीं लाया जा सकता। सरकार बताए किट जांच के लिए कितनी एजेंसी तैयार की हैं।
  4. सांस लेने के लिए वेंटिलेटर और प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता है। इसकी भारी कमी है।
  5. अकेले लॉकडाउन और लोगों के घरों में बैठने से काम नहीं बनेगा। इतनी बड़ी आबादी में अभी तक 75 हजार लोगों के टेस्ट हुए हैं। 
  6. टेस्टिंग किट जांच अनिवार्य है। अमेरिका और यूरोपियन देशों से अनुमति लेनी पड रही है।
  7. डब्ल्यूएचओ के तहत 20 मार्च  तक विदेश से आने वालों की और उसके बाद जिसमें लक्षण पाए गए उन्हीं की जांच हो रही है। जबकि जिस तरह मामले बढ़ रहे हैं। प्रोटोकॉल बनाने की जरुरत है।
  8. बीमारी को अधिक से अधिक टेस्ट करके निपट सकते हैं। आम आदमी टेस्ट कैसे कराए। आयुष्मान योजना में 50 करोड को ही नि:शुल्क टेस्ट की सुविधा है। इसे नि:शुल्क किया जाए। 
  9. बीमारी की चपेट में आए कई लोगों की जिनकी जान चली गई है क्या सरकार उनके परिजनों को मुआवजा देगी।
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