फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Coronavirus Cases on rise know Mix and match booster dose strategy for other vaccine as India looks for heterologous immunisation explained

COVID-19 Vaccination: भारत में बढ़े कोरोना केस तो उठे वैक्सीन बूस्टर पर सवाल, क्या तीसरी डोज में अलग टीका होगा जवाब, क्या है रिसर्च?

Mon, 13 Jun 2022 07:26 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 13 Jun 2022 07:26 PM IST
सार

भारत के दवा नियामक डीजीसीए ने कॉर्बेवैक्स वैक्सीन को देश की पहली मिक्स-एंड-मैच बूस्टर डोज के तौर पर मंजूरी दे दी। यह पहला मौका था, जब भारत में हेटरोलॉगस यानी तीसरी डोज के तौर पर वैक्सीन डोज बदलने पर किसी केंद्रीय एजेंसी की मुहर लगी। 

विज्ञापन
Coronavirus Cases on rise know Mix and match booster dose strategy for other vaccine as India looks for heterologous immunisation explained
सोर्स- सिंगापुर स्वास्थ्य मंत्रालय, चिली स्वास्थ्य मंत्रालय, यूएस एचओएस। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले छह दिनों में तो मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। ऐसे में जहां सरकार की तरफ से एक बार फिर कोरोना अनुरूप व्यवहार अपनाने की अपील की जा रही है, वहीं आम लोगों में कोरोना वैक्सीन के असर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर कोरोना टीके की दो डोज लगवा चुके लोगों में बूस्टर डोज को लेकर काफी शंकाए हैं। वजह है तीसरी डोज लगने के बाद प्रतिरोधक क्षमता पर इसके अलग-अलग प्रभाव। ऐसे में बूस्टर लगवाने को लेकर जारी बहस लगातार तेज होती जा रही है। 
विज्ञापन


इस बीच भारत के दवा नियामक डीजीसीए ने कॉर्बेवैक्स वैक्सीन को देश की पहली मिक्स-एंड-मैच बूस्टर डोज के तौर पर मंजूरी दे दी। यह पहला मौका था, जब भारत में हेटरोलॉगस यानी तीसरी डोज के तौर पर वैक्सीन डोज बदलने पर किसी केंद्रीय एजेंसी की मुहर लगी। 
विज्ञापन


हालांकि, दुनिया में बूस्टर डोज की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में मिक्स-एंड-मैच योजना लाने के पीछे दवा नियामक का क्या लक्ष्य है, यह सबसे बड़ा सवाल है। इसके अलावा क्या किसी वैक्सीन की पहली दो डोज और तीसरी डोज के अलग होने से इसकी प्रभावशीलता बढ़ती है? इस योजना को लेकर एक सवाल यह भी है कि क्या देश में इससे जुड़ी कोई स्टडी हुई है? अगर हुई है तो इसके नतीजे क्या रहे हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन


पहले जानें- बूस्टर डोज पर क्या है सरकार का पक्ष?
केंद्र सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को जल्द से जल्द बूस्टर डोज दिए जाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल देश में बूस्टर के तौर पर जिन वैक्सीन की डोज दी जा रही हैं, वह वही हैं जिन्हें पहली और दूसरी डोज के तौर पर लोगों को दिया गया था। यानी कोविशील्ड लगवाने वालों को कोविशील्ड और कोवाक्सिन लगवाने वालों को कोवाक्सिन की बूस्टर डोज। 

क्या बूस्टर डोज में वैक्सीन बदलने से कोई फायदा है?
वैज्ञानिकों ने बूस्टर डोज की प्रभावशीलता परखने के साथ ही इससे जुड़े एक्सपेरिमेंट भी शुरू कर दिए थे कि पहली-दूसरी और तीसरी वैक्सीन डोज को बदलने से इंसान की प्रतिरोधक क्षमता पर क्या पड़ता है? अब तक इन रिसर्च के जो नतीजे आए हैं, उनसे साफ है कि कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज को बदलने से प्रतिरोधक क्षमता पर जबरदस्त असर पड़ता है। इसे लेकर पिछले दो महीने में ही तीन रिसर्च भी सामने आई हैं...

1. इसकी सबसे ताजा जानकारी 23 मई की लांसेट डिस्कवरी साइंस की ओर से प्रकाशित ईबायोमेडिसिन मैगजीन में मिलती है। इसमें क्लीनिकल ट्रायल के आधार पर कहा गया है कि एस्ट्रा जेनेका (कोविशील्ड) और बायोएनटेक (फाइजर) के टीकों को बूस्टर के तौर पर इस्तेमाल करने से इंसानों में कोरोना के खिलाफ जबरदस्त इम्यून रिस्पॉन्स देखने को मिलता है। मैगजीन में इन नतीजों के बाद मिक्स-एंड-मैच योजना को और विस्तृत ढंग से अपनाने पर भी चर्चा की गई है। 

2. इससे पहले 17 मार्च को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में वैज्ञानिक रॉबर्ट एल एटमार ने लिखा, "मिक्स-एंड-मैच टीकाकरण योजना मौजूदा वैक्सीन से मिलने वाली प्रतिरोधक क्षमता के दायरे को बढ़ा सकती है।" इस स्टडी में भी कोविशील्ड वैक्सीन के ऊपर एमआरएनए वैक्सीन को बूस्टर डोज के तौर पर टेस्ट करने के बारे में जानकारी दी गई है। 

3 लांसेट में ही 23 अप्रैल को प्रकाशित एक स्टडी में कहा गया कि बूस्टर की क्षमताओं को परखने के लिए पहले से ली गईं वैक्सीन की डोज और एक अलग वैक्सीन डोज का परीक्षण किया गया। इसमें सामने आया कि अगर तीसरी डोज पिछले दोनों टीकों से अलग हो तो कोरोना के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। 
     
बूस्टर डोज में वैक्सीन बदलने से कोई और फायदा?
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के पेपर में विशेषज्ञों ने कहा है कि पहली दो डोज के बाद तीसरी डोज के लिए वैक्सीन बदलने का इंसानी शरीर पर कोई प्रभाव नहीं होता। यानी लोगों को अलग-अलग तकनीक से बनी वैक्सीन भी तीसरी डोज के तौर पर दी जा सकती हैं। इसका फायदा यह है कि किसी भी देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर आगे लोगों को सिर्फ एक वैक्सीन देने का दबाव नहीं रहेगा। इतना ही नहीं, चूंकि बाजार में अब तक कई अलग-अलग तकनीक से बनी वैक्सीन आ चुकी हैं, इसलिए इनकी क्षमता को परखा जा सकता है और रिसर्च के नतीजों के हिसाब से लोगों को वैक्सीन बदलने का विकल्प भी मुहैया कराया जा सकता है।


मिक्स-एंड-मैच से भारत को क्या फायदा?
भारत में इस योजना को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को इससे फायदा होना लगभग तय है। दरअसल, भारत में बड़ी जनसंख्या ने बूस्टर डोज नहीं ली है। इस बीच अगर कोरोना की कोई और लहर आती है तो इससे वैक्सीन निर्माताओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, क्योंकि भारत में अभी मुख्य तौर पर दो वैक्सीन- कोविशील्ड (80 फीसदी लोगों को) और कोवाक्सिन (16 फीसदी लोगों को) ही दी गई हैं। ऐसे में भारत अगर बूस्टर के तौर पर एक जैसी वैक्सीन लगाने की अपनी नीति नहीं बदलता है, तो इससे लहर आने की स्थिति में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक के लिए दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी। मिक्स-एंड-मैच स्ट्रैटजी के आने से सरकार बाकी टीकों पर भी निर्भरता बढ़ा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed