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मम्मी-पापा पर सोशल मीडिया और वेब सीरीज का खुमार, बच्चे ब्वॉयज लॉकर रूम में बिजी

Sun, 10 May 2020 05:30 AM IST
योगेश साहू शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली।
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 10 May 2020 05:30 AM IST
सार

देश में लागू लॉकडाउन के चलते लोग घरों में बंद हैं। इसके बावजूद मां-बाप के पास बच्चों के लिए वक्त कहां है। इन दिनों अभिभावक इंटरनेट के जरिए सोशल मीडिया और वेब सीरीज की दुनिया में खोए हुए हैं और बच्चे ब्वॉयज लॉकर रूम जैसे ग्रुप में व्यस्त हैं। दरअसल, पोर्नोग्राफी हर उम्र को अट्रैक्ट करती है। इंटरनेट के जरिए सबकुछ तो अब सोशल मीडिया पर मौजूद है।

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Coronavirus Case News In Hindi : mother father busy in Social media and web series, childrens busy in boys locker room
mobile user - फोटो : amar ujala

विस्तार

नोएडा के बड़े पब्लिक स्कूल के बच्चों की सोशल मीडिया पर कारस्तानी ने एक बार फिर देश के संपन्न समाज की संवेदनाओं को कुरेद दिया है। हालांकि आईटी एक्सपर्ट इसे लेकर बहुत हैरान नहीं हैं। आईबीएम में सीनियर पद पर काम कर रहे राजेश चौधरी का कहना है कि इंटनेट आपको पलभर में दुनिया से जोड़ता है। कब कौन आपके पास कैसे चला आएगा, पता नहीं चलेगा। इसलिए जितना अच्छा है, सुविधाजनक है, उतना ही बुरा भी। सावधानी ही आपको, आपके बच्चों को बचा सकती है।

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एम्स के मनोचिकित्सक डॉ. राजेश सागर की सुनिए
एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख राजेश सागर का कहना है कि संचार की तकनीक शहर से लेकर गांव तक का जीवन बदल रही है। माता-पिता को अपने काम से फुरसत नहीं है। वह एक व्यस्तता से खाली होते हैं तो उनका ज्यादा समय फेसबुक, व्हाट्सएप, नेटफ्लिक्स पर फिल्में देखने, सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने में चला जाता है। सही बात यह है कि अभिभावक अपने बच्चों को संसाधन तो दे देते हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दे पाते।
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राजेश सागर का कहना है कि आजकल के बच्चे प्रायोगिक अंग्रेजी में ठीकठाक, मॉडर्न, तकनीक का प्रोयग करने वाले हैं। डॉ. सागर मानते हैं कि टीवी के विज्ञापन से लेकर इंटरनेट, मोबाइल फोन पर बहकने की गुंजाइश काफी रहती है। डॉ. सागर का कहना है कि आप देखेंगे तो पाएंगे कि पोर्नोग्राफी हर वर्ग, उम्र को आकर्षित करती है।
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एक उम्र के बाद बच्चों में भी विपरीत सेक्स के प्रति रुझान बढ़ जाता है। आज के जमाने में इस रुझान को पूरा करने के लिए रिसोर्स आसानी से उपलब्ध हैं। वह कहते हैं कि इंटरनेट के डाटा खर्च होने का वर्गीकरण करेंगे तो पाएंगे कि सबसे अधिक पोर्नोग्राफी देखी जा रही है।

बच्चों को क्या पता?
डॉ. राजेश सागर कहते हैं कि बच्चों को अंजाम का क्या पता? वह न तो भारतीय दंड संहिता के कानून को जानते हैं, न साइबर लॉ को। उन्हें ठीक से अपनी सीमाएं भी नहीं पता होतीं। जबकि उनके सामने चारों ओर उन्हें लुभाने के सभी कारक मौजूद हैं। बच्चों की अपनी भी एक दुनिया होती है। वह कहते हैं कि बच्चों को दोष देने की बजाय, इन सब चीजों को समझना ज्यादा जरूरी है। मुझे नहीं लगता कि बहुत से मात-पिता इस बारे में बहुत संवेदनशील रहते हैं।

मेरी तो सलाह है...

एम्स के मनोचिकित्सक का कहना है कि आपके बच्चे के हाथ में मोबाइल, गैजेट है। इंटरनेट का कनेक्शन है। इसलिए मेरी हर माता-पिता को सलाह है कि वह अपने बच्चे को सबसे पहले सही और गलत का एहसास कराएं। उनके भीतर खुद इसकी समझ बढ़ाएं। डॉ. सागर की दूसरी सलाह है कि हर माता-पिता अपने बच्चों पर ध्यान दें। उनके साथ समय बिताएं। खुलकर बातें करना, इसके लिए समय निकालना सीखें।

इसे अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानें। बच्चों की काउंसलिंग करने वाले अमित सरन का कहना है कि उनके पास कई अजीब तरह के मामले आए। इन मामलों को देखकर वह कह सकते हैं कि आजकल के माता-पिता को अपने बच्चों के कामकाज, व्यवहार के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। अमित सरन का कहना है कि तमाम अच्छे संपन्न मां-बाप इस तरह का कोई प्रयास भी नहीं करते। इसके कारण तमाम बच्चों के भटक जाने का खतरा रहता है।

सोशल मीडिया पर सब उपलब्ध है

डॉ. राजेश सागर भी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर सबकुछ उपलब्ध है। राजेश चौधरी पुलिस की आईटी सेल और सेना के लिए काम कर चुके हैं। वह कहते हैं कि ज्यादा दूर मत जाइए। फेसबुक मैसेंजर के माध्यम से सबकुछ आदान-प्रदान संभव है। फेसबुक की वीडियो क्लिप्स चलती हैं, वह किसी भी बच्चे को पोर्नोग्राफी तक ले जाने में सक्षम हैं। वहां से फुरसत मिले तो कभी गूगल के प्ले स्टोर में ढूंढ लीजिए।

आप जो चाहते हैं, उससे मिलता जुलता काफी कुछ मिल जाएगा। अमित सरन भी राजेश चौधरी से इत्तेफाक रखते हुए कहते हैं कि अमेरिका में बैठे गूगल को आपकी हर प्रवृत्ति की कुछ दिन में जानकारी हो जाती है। सोशल मीडिया से जुड़े तमाम लोग (कंपनियां, हैकर, सब) आपकी हर रुचि को धीरे-धीरे आब्जर्व कर लेते हैं। चुपचाप वह आपको अपना शिकार बनाते चले जाते हैं और आपको पता नहीं चलता।

आपके हाथ में बस कमांड है...

राजेश चौधरी का कहना है कि अब ऐसे एप आ गए हैं जो आपके हाथ में केवल कमांड को रखते हैं। वह अपनी सुविधाओं को आपकी डिवाइस के हर निजी सेक्शन (फोटो, वीडियो, लाइब्रेरी, कैमरा, कांटैक्ट आदि) से खुद को जोड़कर रखते हैं। बिना अनुमति दिए उस एप का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

इसी के जरिए कई कामर्शियल एप मोटी कमाई भी कर लेते हैं। हैकर इनसे ही सूचनाएं प्राप्त करके अवांछित तरीके से आर्थिक ठगी को अंजाम देते हैं। राजेश चौधरी का कहना है कि चूंकि सर्वर विदेश में है। अपराधी दुनिया के किसी भी देश में हो सकता है, इसलिए ऐसे तमाम अपराधों पर एजेंसियां भी चाहकर कुछ खास नहीं कर पातीं।

इसलिए सबसे बड़ा उपाय सावधानी है। चौधरी बताते हैं कि लालच बुरी बला है। वह कहते हैं कि ठगों के जाल में अच्छे आईटी के जानकार भी फंस चुके हैं। इसलिए वर्ल्ड वाइड वेब पर आने का मतलब है कि एथिकल रहिए। इच्छाओं पर नियंत्रण रखिए। जो जरूरी हो, उसी क्षेत्र में आगे बढ़िए।

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