फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Coronavirus Case News In Hindi : learn fighting tricks from Kerala and two countries Germany and Austria, Battle with Corona in India

कोरोना से जंग: भारत में केरल और इन दो देशों से भी सीख सकते हैं लड़ाई के गुर

Sat, 18 Apr 2020 08:24 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Sat, 18 Apr 2020 08:24 AM IST
विज्ञापन
Coronavirus Case News In Hindi : learn fighting tricks from Kerala and two countries Germany and Austria, Battle with Corona in India
कोरोना वायरस से बचाव के लिए मास्क पहने हुए बच्चा। - फोटो : PTI

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग के लिए भारत में राजस्थान के भीलवाड़ा को मॉडल की तरह पेश किया जा रहा है। परंतु भारत के ही दूसरे राज्य केरल और दो अन्य देशों जर्मनी और ऑस्ट्रिया से भी इस लड़ाई के गुर सीखे जा सकते हैं। बता दें कि केरल में शुक्रवार को केवल एक मामला सामने आया, जबकि इन दोनों देशों में भी मरीजों की संख्या में भारी कमी आई है। आइए जानते हैं इनके बारे में...

विज्ञापन


सबसे पहले जानिए जर्मनी को
जर्मनी में 14 अप्रैल तक संक्रमण में 1.3 लाख मामले सामने आ चुके थे, जबकि 64 हजार से ज्यादा लोग ठीक भी हुए। दरअसल, यह देश मार्च के दूसरे सप्ताह में यूरोप में कोरोना का नया केंद्र बनता जा रहा था। इटली, स्पेन, फ्रांस और ब्रिटेन तेजी से चपेट में आए। इसी दौरान जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने एक बयान दिया कि देश की 70 फीसदी आबादी संक्रमित हो सकती है। इसके साथ ही मर्केल ने खुद को क्वारंटाइन भी किया।
विज्ञापन


इस घटनाक्रम से लगा जर्मनी में भी हालात इटली और स्पेन जैसे हो सकते हैं। परंतु एक महीने बाद ही तस्वीर बदल गई। यहां अब 14 हजार संक्रमित हैं, 3868 मौतें हुई हैं। संक्रमण के मामले घटने के पीछे वजह यह है कि जर्मनी ने जनवरी में ही टेस्ट किट बना ली थी। वहां पहला मामला फरवरी में सामने आया था। ऐसे में पहले से ही टेस्ट किट देश के कोने-कोने में पहुंचा दी गई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जर्मनी ने दक्षिण कोरिया की तरह ज्यादा टेस्ट किए, इस आधार पर लोगों को अस्पताल में भर्ती किया। इसके अलावा यहां टेस्टिंग टैक्सियां चलाई गईं, जो लॉकडाउन में घर-घर जाकर टेस्ट करतीं और कर रही हैं। लोगों में संदेश गया कि लक्षण होने पर भी अस्पताल जाना जरूरी नहीं है, घर पर ही टेस्ट होगा और नतीजा भी मिल जाएगा।

यही नहीं हल्के लक्षण वाले लोगों की भी जांच की गई, ताकि ट्रैकिंग में आसानी हो। साथ ही सख्ती भी बरती गई, जैसे सीमाएं बंद करना, सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन कराना। समय के साथ लोगों का साथ भी मिला। ऐसे में अब पूर्ण लॉकडाउन न होते हुए भी लोग पाबंदियों का पालन कर रहे हैं।

ऑस्ट्रिया ने ऐसे संभाली स्थिति

ऑस्ट्रिया में फिलहाल कोरोना के करीब 1000 मरीजों का इलाज चल रहा है। कई अस्पताल खाली हैं। यहां 24 घंटे में आने वाले मामले 7 गुना तक घटे हैं। ऑस्ट्रिया में 16 मार्च को लॉकडाउन लागू किया गया था। पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर गश्त दी। घर से बाहर निकलने वाले करीब 17 हजार लोगों पर भारी जुर्माना भी लगाया गया। 

इसके बाद बड़ी भूमिका हॉटलाइन और मोबाइल टेस्टिंग यूनिट ने निभाई। मुख्य स्वास्थ्य सलाहकार क्लेमेंस मार्टिन ने बताया कि जैसे ही लक्षणों का पता चलता है, मोबाइल टेस्टिंग यूनिट से जांच हो जाती है। हॉटलाइन पर मुफ्त कॉल से पता चल जाता है कि टेस्ट की जरूरत है या नहीं।

केरल: पहला मरीज मिलते ही अलर्ट, पंचायत स्तर तक जागरूकता

केरल में बीते दो हफ्ते से नए मामले सामने नहीं आए हैं। हालांकि बीते शुक्रवार को सिर्फ एक मामला आया है। वहीं खबर लिखे जाने तक 394 संक्रमित हैं। केरल से दूसरे राज्य कोरोना पर नियंत्रण पाने के गुर सीख सकते हैं। कोरोना को रोकने में केरल के गांवों में पंचायत सदस्य और जूनियर पब्लिक हेल्थ नर्स और जूनियर हेल्थ इंस्पेक्टर्स जैसे हेल्थकेयर वर्कर्स बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। 

सबसे पहले तो दूसरे शहरों या गांवों से किसी के आने पर उसे गांव बाहर ही एक अस्थायी नल पर भेजा जाता है, जहां वह अच्छी तरह से हाथ पैर धो ले। इसके बाद गांव में जाने पर पूछताछ की जाती है। यही वजह है कि बीती 12 मार्च को एक सेल्समैन दुबई से लौटा था। उसे सर्दी-जुकाम था।

त्रिवेंद्रम के एक अस्पताल में टेस्ट हुआ और उसे कासरगोड़ जिले में उसके गांव भेज दिया गया। जैसे ही वह अपने गांव चेंगाला पहुंचा। पंचायत सदस्यों ने उससे पूछताछ की। उसे परिजनों से पृथक कर दिया गया। इसके छह दिन बाद उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

चूंकि वह पृथक कर दिया गया था इसलिए उसके जरिए औरों तक संक्रमण पहुंचने से पहले ही रुक गया। अब देखा जाए तो जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों और जनप्रतिनिधियों की यह जागरूकता सबसे ज्यादा काम आ रही है। यह राज्य के जनस्वास्थ्य विभाग और तंत्र की रीढ़ साबित हुई है।

इससे केरल में कोरोना का ग्राफ बढ़ने पर रोक लगी है। नए मामलों में कमी और सक्रिय मामलों में ठीक होने का सिलसिला यदि इसी तरह दो हफ्ते और जारी रहा तो केरल वैश्विक महामारी के जबड़े से निकल जाने वाला पहला राज्य बन सकता है।

केरल स्वास्थ्य सेवा के पूर्व निदेशक डॉ. एन श्रीधर बताते हैं कि गांवों में हमारे लिंक वर्कर्स या आशा (एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट) हैं। शहरों में ऊषा (अर्बन सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट) वर्कर्स हैं। इन्हें लोगों को कैसे समझाना है इसकी ट्रेनिंग दी जाती है।

हर आशा करीब एक हजार लोगों की इंचार्ज होती है। हेल्थकेयर वर्कर्स और पंचायत सदस्यों को अहम जानकारियां दी जाती हैं, इसमें वुहान से एयरपोर्ट पर आए पहले यात्री के साथ क्या किया गया और क्या कुछ करना चाहिए जैसी बातें शामिल होती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed