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कोरोना: हाईकोर्ट की सरकार को सलाह, समाचार पत्रों के बारे में चलताऊ बयान न दें

Mon, 27 Apr 2020 07:45 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: योगेश साहू Updated Mon, 27 Apr 2020 07:45 PM IST
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Coronavirus Case News In Hindi : Bombay High Court told To Maharashtra government, Dont Make Sweeping Statements about newspapers
Court - फोटो : सोशल मीडिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को सलाह दी है कि बिना विशेषज्ञों की राय के समाचार पत्रों से कोरोना का संक्रमण फैलने की आशंका जैसे चलताऊ बयान न दे। हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने सोमवार को स्वत: संज्ञान के आधार पर एक याचिका की सुनवाई में यह बात कही।

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दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार को स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय का हवाला दिए बिना ऐसे चलताऊ बयान नहीं देने चाहिए कि अखबारों से कोविड-19 का संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है।
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हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पीबी वराले ने राज्य सरकार के उस फैसले पर स्वत: आधार पर संज्ञान लिया था, जिसमें कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर समाचार पत्रों के लोगों के घरों तक पहुंचाने पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि सरकार ने बाद में अपने इस आदेश में संशोधन कर दिया और इसे केवल मुंबई, पुणे और उन स्थानों तक सीमित कर दिया जिन्हें निरूद्ध क्षेत्र घोषित किया गया है।
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सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील डीआर काले ने सोमवार को हलफनामा भी दााखिल किया। इसमें सरकार की ओर से कहा गया था कि कोरोना वायरस काफी समय तक विभिन्न सतहों पर रह सकता है और अखबार ऐसी चीज है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक जाता है। ऐसे में इससे संक्रमण फैलने की आशंका पैदा हो जाती है।

इस दौरान न्यायमूर्ति वराले ने कहा कि अदालत हलफनामे में दिए गए बयान के पीछे के तर्क को समझने में विफल रही है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि लगता है कि हलफनामे में एक सामान्य और चलताऊ बयान दिया गया है। जवाब में विशेषज्ञों की किसी टिप्पणी या स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले किसी भी व्यक्ति की कोई राय का जिक्र नहीं किया गया है।

इसके विपरीत, समाचार पत्रों में प्रकाशित कुछ विशेषज्ञों के बयानों का आशय यह है कि यह धारणा रखने की कोई जरूरत नहीं है कि अखबार कोरोनोवायरस फैलाने का माध्यम है। न्यायमूर्ति वराले ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान समाचार पत्रों के पाठकों की संख्या में वृद्धि हुई है क्योंकि जनता की दिलचस्पी विस्तृत जानकारी के साथ नवीनतम अपडेट जानने में है जो केवल समाचार पत्रों में उपलब्ध होगी।


बता दें कि अदालत को न्याय मित्र सत्यजीत बोरा ने सूचित किया कि मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल में चेन्नई में समाचार पत्रों के घरों तक वितरण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

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