कोविड-19 को हरा चुके लोगों का रक्त बन सकता है हथियार!
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
कोरोना वायरस से लड़ रहे मानव के रक्त में मौजूद प्लाज्मा में ऐसी एंटीबॉडी विकसित हो सकती हैं जो इस वायरस के खिलाफ जंग में सभी के लिए नया हथियार बन सकती हैं। वैज्ञानिकों इस अनुमान के आधार पर प्लाज्मा थेरेपी परीक्षण शुरू किए हैं।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
कोरोना वायरस से लड़ रहे मानव के रक्त में मौजूद प्लाज्मा में ऐसी एंटीबॉडी विकसित हो सकती हैं जो इस वायरस के खिलाफ जंग में सभी के लिए नया हथियार बन सकती हैं। वैज्ञानिकों इस अनुमान के आधार पर प्लाज्मा थेरेपी परीक्षण शुरू किए हैं।
इन परीक्षण में कोविड-19 की चपेट से बाहर आए मरीजों के रक्त से प्लाज्मा निकालकर बीमार रोगियों को ठीक करने के लिए दिया जा रहा है। अमेरिका और इंग्लैंड में इसे लेकर ट्रायल शुरू हो चुके हैं, वहीं चीन दावा कर रहा है कि उसने इस प्लाज्मा थैरेपी से मरीजों को ठीक किया है। भारत में इसे लेकर अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।
फरवरी के मध्य में चीन के 20 ऐसे नागरिकों ने अपने प्लाज्मा दान किए जो कोविड-19 से ठीक हो चुके थे। वुहान में उनके इन प्लाज्मा का उपयोग कई मरीजों पर किया गया, जिन्हें उपचार में मदद भी मिली। ये 20 लोग ऐसे डॉक्टर व नर्से थीं जो वायरस की चपेट में आई थीं।
उन्हें ठीक हुए 10 दिन से अधिक हो चुके थे। चीन के अध्ययनकर्ताओं का दावा है कि कई गंभीर मरीजों में इस प्लाज्मा थैरेपी के 12 से 24 घंटे में सुधार आने लगा। इससे ठीक हुए कई लोगों ने प्लाज्मा दान किए।
ऐसे काम करता है
पहले भी हुआ सफल उपयोग
- 1918-20 में पूर्व स्पेनिश फ्लू के इलाज के दौरान अमेरिका ने यही तकनीक अपनाई
- 2005 में सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री सिंड्रम कोरोना वायरस-1 (सार्स-सीओवी-1) यानी मौजूदा वायरस के पिछले स्वरूप से निपटने के लिए हांगकांग ने यही किया
- 2009 में एच1एन1 के मरीजों को विश्वभर में प्लाज्मा से इलाज किया
- 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला मरीजों के इलाज के कोन्वल्सेंट रक्त व प्लाज्मा के उपयोग का प्रोटोकॉल बनाया
उम्मीदें और दुनिया में तैयारी
- चीन : अध्ययनकर्ताओं ने खुलासा किया कि कोन्वल्सेंट प्लाज्मा से वेंटीलेशन पर पहुंचे मरीजों की जान बचाई गई। हालांकि यह अध्ययन पांच मरीजों पर हुआ था।
- ब्रिटेन : ग्लासगो विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता प्रो. डेविड टेपिन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान में कोन्वल्सेंट प्लाज्मा से क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति मांगी।
- अमेरिका : खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पिछले हफ्ते कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों को प्लाज्मा दान करने की अपील की।
- भारत में संभावना : यहां अपेरेसिस मशीन से रक्त से 500 मिलीलीटर प्लाज्मा निकालने की क्षमता है। प्रयोग के लिए औषधि महानियंत्रक से अनुमति लेनी होगी। इस दिशा में प्रयास शुरू करन के विकल्पों पर विचार ही किया जा रहा है।