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भारतीय रेलवे: कोरोना और मंदी का अब भी दिख रहा असर, साल 2020 के मुकाबले टिकट बुकिंग घटी

Tue, 19 Apr 2022 06:39 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 19 Apr 2022 06:39 PM IST
सार

मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि महामारी से पूर्व और मौजूदा आंकड़ों के बीच का अंतर निश्चित तौर पर चिंताजनक है। रेलवे की रिकवरी कई अन्य क्षेत्रों के मुकाबले धीमी है। एक ओर जहां व्यापार और कार्य संबंधी यात्रा और पर्यटन में कमी आई है, वहीं मोटे तौर पर 80 फीसदी यात्री अनारक्षित खंडों और सामान्य वर्ग के होते हैं...

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Coronavirus and inflation impact on indian railways, ticket booking down from previous years
रेलवे - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

कोविड महामारी के प्रभाव और मंदी से परेशान भारतीय रेलवे अब तक इससे उबर नहीं पाया है। रेल मंत्रालय के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि यात्रियों द्वारा टिकट बुकिंग का कोविड से पूर्व का स्तर अभी तक बहाल नहीं हो पाया है। हालांकि रेल मंत्रालय का मानना है कि सालाना रिकवरी उत्साहजनक है।

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फरवरी में रेलवे को 41.3 करोड़ टिकट बुकिंग प्राप्त हुई, जो पिछले वर्ष से 43 फीसदी अधिक है। लेकिन यह फरवरी 2020 में मिलीं 67.5 करोड़ टिकट बुकिंग का 61 फीसदी है। आंकड़ों के मुताबिक केवल फरवरी 2020 में ही एक महीने के भीतर रेलवे ने 50 करोड़ से अधिक टिकट बेचे थे। वित्त वर्ष 2019-20 में रेलवे को उपनगरीय और गैर-उपनगरीय खंडों को मिलाकर 810.9 करोड़ बुकिंग मिली थीं यानी हर महीने औसतन 67.5 करोड़ बुकिंग प्राप्त हुईं।  
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2020-21 में वार्षिक बुकिंग घटकर 125 करोड़ रह गई थी। मासिक आधार पर इसका न्यूनतम स्तर 10.45 करोड़ रहा था। 2020 के अप्रैल और मई में रेलवे सेवाएं पूरी तरह बंद थीं, उसके आगामी महीनों भी बुकिंग गतिविधि धीमी रही। 2021-22 में फरवरी तक रेलवे को 29.1 करोड़ औसत बुकिंग के साथ 320.4 करोड़ बुकिंग मिली हैं। बजट में मंत्रालय ने 859.4 करोड़ यात्रियों का वार्षिक लक्ष्य तय किया, जिसे बाद में संशोधित कर उसे 353.3 करोड़ करना पड़ा।
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आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद के सात महीनों में यात्री मांग में करीब आठ गुना की वृद्धि हुई, जो दूसरी लहर के बाद तेजी से नीचे आई। एक ओर जहां डेल्टा वैरिएंट की लहर के बाद सामान्य स्थिति बहाल होने पर टिकट बुकिंग में वृद्धि हुई, वहीं जुलाई 2021 से फरवरी 2022 की अवधि को दो वर्ष पहले की समान अवधि से तुलना करने पर टिकट बुकिंग में एक बड़ा अंतर नजर आता है।

मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि महामारी से पूर्व और मौजूदा आंकड़ों के बीच का अंतर निश्चित तौर पर चिंताजनक है। रेलवे की रिकवरी कई अन्य क्षेत्रों के मुकाबले धीमी है। एक ओर जहां व्यापार और कार्य संबंधी यात्रा और पर्यटन में कमी आई है, वहीं मोटे तौर पर 80 फीसदी यात्री अनारक्षित खंडों और सामान्य वर्ग के होते हैं। यदि सामान्य खंड की आबादी यात्रा से दूरी नहीं बनाती, तो टिकट बुकिंग में इतना बड़ा अंतर नहीं आता।


रेलवे के वरिष्ठ अफसरों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान ट्रेन सेवाएं थोड़े समय के लिए बाधित रही थीं। विशेष तौर अनारक्षित वर्ग में ऐसा हुआ था। धीरे-धीरे उन्हें दोबारा से बहाल किया जा रहा है। जैसे ही हम 100 फीसदी क्षमता पर लौट आएंगे, वैसे ही यात्री बुकिंग की संख्या महामारी के पूर्व के स्तर पर पहुंच जाएगी। आरक्षित वर्गों में हम नई सेवाएं शुरू कर रहे हैं, जैसे कि 400 वंदेभारत ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जाएगा, जिससे यात्री क्षेत्र में हमें भारी इजाफे की उम्मीद है। इसकी झलक पिछले वर्ष के मुकाबले यात्री बुकिंग में आई 43 फीसदी की वृद्धि से मिलती है।

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