इंसानियत शर्मसार: कोरोना के मरीज को कोसा, घर के बाहर नारे लगाए, नफरत भरे संदेश भी भेजे
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देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में दिनों दिन बढ़ोतरी हो रही है। अभी तक देश में 151 लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए है, वही तीन लोगों की मौत चुकी है। इस बीच खबर आई है कि मुंबई में कोरोना से मरने वाले तीसरे मरीज के साथ लोगों ने भेदभाव किया और उसके साथ सोशल मीडिया पर गाली गलौच की।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, मध्य मुंबई की एक सोसाएटी में रहने वाले 63 वर्षीय बुजुर्ग की 17 मार्च को कोरोना से संक्रमित होने से मौत हो गई थी। सोसाएटी में रहने वाले निवासियों ने बताया कि 13 मार्च को जब बुजुर्ग के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई तो उसके साथ लोगों ने भेदभाव करना शुरू कर दिया।
उन्होंने बताया कि बुजुर्ग के साथ फोन और सोशल मीडिया पर गाली गलौच की गई। उसकी पत्नी और बेटे की जांच रिपोर्ट भी पॉजीटिव आई है और वे दोनों कस्तूरबा गांधी अस्पताल में भर्ती है।
सोसाएटी के निवासियों ने आरोप लगाया कि जैसे ही बुजुर्ग की रिपोर्ट पॉजीटिव आई, उसे जानने वाले लोगों ने उसे नफरत भरे संदेश भेजना शुरू कर दिया और उसके परिवार वालों के साथ भेदभाव किया।
रिश्तेदारों, पड़ोसियों और पहचान वालों ने बुजुर्ग को संक्रमित होने के लिए कोसा
सोसाएटी में रहने वाले एक निवासी ने बताया कि जिस दिन से वह कोरोना से संक्रमित पाया गया। उस दिन से बुजुर्ग को लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ा। यहां हैरान करने वाली बात यह है कि यह आलोचना और भेदभाव उसके रिश्तेदारों, सोसाएटी के कुछ निवासी और यहां तक कि उन लोगों ने भी किया जो उसे लंबे समय से जानते थे।
निवासी ने बताया कि उसे फोन पर संदेश भेजा गया कि वह कोरोना वायरस फैलाने के लिए जिम्मेदार है। अगले दिन एक व्यक्ति ने उसे संदेश भेजा कि एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो गई। वह व्यक्ति उस दौरान अस्पताल में भर्ती था। उसने बताया कि इस संदेश से उसके परिवार वाले बेहद दुखी थे। आप खुद सोचिए की आपको कोई आपकी मौत का संदेश भेजे तो कैसा लगेगा।
सोसएटी में रहने वाले निवासी ने बताया कि अफवाह फैलने की वजह से बुजुर्ग की बेटी और उसकी नाती को आस पास के इलाके और स्कूल में भेदभाव का सामना करना पड़ा। उसने बताया कि 63 वर्षीय बुजुर्ग 20 साल से इस सोसाएटी में रह रहा था। जैसे ही उसके संक्रमित होने की खबर फैली, घरेलू कामकाज करने वाले लोगों से लेकर सामान पहुंचाने वालों ने संक्रमित होने के डर से सोसाएटी से अंदर आना बंद कर दिया।
बीएमसी ने बुजुर्ग के घर के पास स्थित 460 घरों का सर्वेक्षण किया
बताया गया कि संक्रमण के डर को रोकने के लिए छह से सात सामान पहुंचाने वाले लोगों की जांच की गई, जिनकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई। बुजुर्ग के संक्रमित होने पर बीएमसी भी हरकत में आ गई। बीएमसी ने कोरोना के संदिग्धों का पता लगाने के लिए उसके घर के आस पास स्थित 15 बिल्डिंगों के 460 घरों का सर्वेक्षण किया, लेकिन एक भी संदिग्ध नहीं पाया गया। बुजुर्ग के सात रिश्तेदारों की जांच की गई, जिसमें उसकी पत्नी और बेटे कोरोना से संक्रमित पाए गए।
जिस निजी अस्पताल में बुजुर्ग को भर्ती किया गया था, वहां के आठ डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों की जांच की गई, जिनकी रिपोर्ट भी नेगेटिव आई। अस्पताल के 74 कर्मचारियों को परामर्श दिया गया कि वह 14 दिनों तक खुद को एकांतवास में रखें।
लोगों ने सोसाएटी को लेकर फैलाई अफवाह
ऐसा नहीं है कि केवल मृतक और उसके परिवार को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। सोसाएटी के निवासियों ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों ने सोसाएटी को लेकर अफवाहें फैला रखी है।
दक्षेश संपत नाम के एक निवासी ने बताया कि सोमवार को बीएमसी के कर्मचारी यहां आए और हमसे पूछा कि क्या यहां सब कुछ ठीक है। जिसके जवाब में हमने उन्हें अपनी परेशानियों के बारे में बताया जिसका हम रोज सामना कर रहे हैं।
संपत ने बताया कि हमने बीएमसी अधिकारियों को बताया कि बाहरी लोग अफवाह फैला रहे हैं और इलाके डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। इसलिए इलाके में जागरूकता और संवेदीकरण कार्यक्रम की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि जब हमने बीएमसी अधिकारियों को भेदभाव के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि वे इस बारे में कुछ नहीं कर सकते क्योंकि सोसाएटी और उससे सटा उसका पड़ोसी क्षेत्र दो अलग-अलग वार्डों में आते हैं।
बाइकर्स कोरोना का नारा लगा भाग जाते
दक्षेश संपत ने बताया कि लोगों को लग रहा है कि हम अछूत हैं। रात के समय, बाइकर्स सोसाएटी के बाहर कोरोना के नारे लगाकर भाग जाते हैं। हमने सोसाएटी के बाहर हाथ धोने की सुविधा की व्यवस्था के लिए एक ठेकेदार को काम पर रखा है।
उन्होंने बताया कि लोगों की इस तरह की हरकतों से हम मानसिक आघात का सामना कर रहे हैं। लोगों को पता होना चाहिए कि अगर सावधानी बरती जाए तो कुछ नहीं होगा। हम अधिकारियों से अनुरोध कर रहे हैं कि वे जागरूकता अभियान चलाकर हमारी परेशानियां समाप्त करें।
अधिकारी बिना सैनेटाइजर सोसाएटी को साफ करने आए
निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि जब बीएमसी अधिकारी इमारत की सफाई के लिए आए थे तो वे सैनेटाइजर भी नहीं लाए थे। एक निवासी ने बताया कि बीएमसी अधिकारियों ने कहा कि उन्हें सैनेटाइटर या कीटाणुनाशक की व्यवस्था करने में दो से तीन दिन लगेंगे। हमने तब भिवंडी से सैनेटाइजर खरीदा।
जब इस मामले में उप कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दक्ष शाह से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वह निवासियों द्वारा सामना किए जा रहे मुद्दों पर ध्यान देंगे। अधिकारी ने कहा कि मैंने इसे गंभीरता से लिया है। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि यह समस्या हल हो जाए।