फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   corona will hit again if your body does not make antibodies

कोरोना से उबरने वाले मरीज फिर हो रहे संक्रमित, क्या है इसकी असल वजह?

Thu, 03 Dec 2020 05:45 PM IST
आचार्य मोहिनी भारद्वाज न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आचार्य मोहिनी भारद्वाज Updated Thu, 03 Dec 2020 05:45 PM IST
विज्ञापन
corona will hit again if your body does not make antibodies
कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों को अब भी यह भ्रम कि एक बार वायरस से संक्रमित होने बाद वह दोबारा इस वायरस के चपेट में नहीं आ सकते हैं। लेकिन भारत के कई राज्यों में ऐसे केस आए हैं, जहां मरीज ठीक होने के बाद फिर से कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। ऐसा ही मामला इंदौर में भी देखा गया। इस तरह के मामलों के सामने आने से लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
विज्ञापन

दूसरी बार हुआ कोरोना

स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले रघुवंशी (33) की कोरोना रिपोर्ट दोबारा पॉजिटिव आई है। कुछ दिन पहले उनके बेटे को बुखार आया था। चार दिन तक तबीयत ठीक न होने के बाद कोरोना का टेस्ट कराया। जांच में वह पॉजिटिव निकला। बेटे के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद पूरे परिवार ने 29 नवंबर को कोरोना टेस्ट कराया। तो जांच रघुवंशी भी कोविड पॉजिटिव निकले। इसके बाद उन्होंने खुद को होम आइसोलेट कर लिया। रघुवंशी को पहली बार 26 जुलाई को कोरोना हुआ था। तब 10 दिन तक वह निजी अस्पताल में थे। रिपोर्ट निगेटिव आने पर उनको डिस्चार्ज किया गया था। रघुवंशी स्वास्थ्य विभाग में कोविड अस्पताल समन्वयक हैं। दूसरी बार कोरोना का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और विभाग सतर्क हो गए। इससे पहले भी शहर में ऐसे तीन केस सामने आ चुके हैं।
विज्ञापन

एंटीबॉडी न बनने के कारण लोग हो रहे दोबारा संक्रमित

कोरोना से ठीक होने के बाद दो-तीन हफ्तों में कोविड इम्युनोग्लोबिन एंटीबॉडी बनने लगती है। डॉक्टर्स का कहना है कि फिर से संक्रमित होने का मतलब है कि शरीर में सही से एंटीबॉडी नहीं बन रही है या फिर एंटीबॉडी खत्म हो गई है। जिसकी वजह से वायरस ने फिर से शरीर में प्रवेश कर लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सिर्फ 30 फीसदी लोगों में मिल रही है एंटीबॉडी

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग के प्रमुख अशोक यादव का कहना है कि एंटीबॉडी बहुत कम लोगों में मिल रही है। जितनी जांचे की गई हैं उनमें सिर्फ 30 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिल रही है। लोगों के शरीर से जल्दी से एंटीबॉडी क्यों खत्म हो रही है। इसके बारे में हमें गहन अध्ययन करने की जरूरत है।
 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed