भारत में कोरोना ने एक साल तक जमकर बरपाया कहर, बढ़ता-घटता रहा संक्रमण का ग्राफ
कोरोना वायरस को भारत में पैर पसारे हुए एक साल हो चुका है। इस महामारी ने अगस्त-सितंबर 2020 में सबसे ज्यादा सितम ढाया था। लेकिन कोविड वैक्सीन आने के बीच संक्रमण का ग्राफ सात महीने के निचले स्तर पर चला गया था। इस साल मध्य फरवरी से संक्रमण एक बार फिर बढ़ना शुरू हुआ और अब तक बढ़ ही रहा है। 13 और 14 मार्च को तो इस साल के सबसे ज्यादा संक्रमितों का पता चला। दबी जुबान में ही सही पर कुछ विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि देश में इस महामारी की दूसरी लहर सालभर में लौट आई है।
आइए पिछले साल के घटनाक्रम पर नजर दौड़ाएं
- जनवरी-फरवरी में सामने आया पहला मामला
भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को केरल में दर्ज हुआ था। इसके बाद फरवरी में वुहान से लौटे कुछ छात्र पॉजिटिव पाए गए, लेकिन संक्रमण दोहरे अंक तक नहीं पहुंचा। चार मार्च को पहली बार 22 केस भारत में मिले, जिनमें 14 वह इतालवी पर्यटकों के समूह में शामिल संक्रमित थे। 12 मार्च को पहली बार देश में कोरोना से पहली मौत दर्ज की गई।
- मार्च में वायरस का तेजी से हुआ प्रसार
इटली और जर्मनी से लौटे एक धर्मगुरु 10 से 12 मार्च के बीच पंजाब के आनंदपुर साहिब में घूमे, जिसकी वजह से कई लोग एक साथ कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए। यह भारत में पहला बड़ा मामला साबित हुआ। यहां 27 केस मिलने के बाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया और 20 गांवों के 40 हजार लोगों को क्वारंटाइन कर दिया। वहीं, दिल्ली में मार्च मध्य में तबलीगी जमात के कार्यक्रम की वजह से भी वायरस का तेजी से प्रसार होता चला गया। इसके बाद यूपी, बिहार, बंगाल जैसे राज्यों में संक्रमण की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई।
- लॉकडाउन की घोषणा
तेजी से फैल रहा संक्रमण एक-एक कर लोगों को अपनी चपेट में ले रहा था। ऐसे में एहतियातन गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा हो गई। 31 मार्च तक 47 मौतों और 1403 लोग संक्रमित हो चुके थे पर सरकार मान रही थी कि 21 दिन का लॉकडाउन आगे नहीं बढ़ेगा, लेकिन कोरोना विस्फोट का अंदाजा उसे नहीं था।
- अप्रैल में मरीजों की संख्या 23 गुना बढ़ गई
सरकार ने माना कि तबलीगी जमात के जरिये देश में सीधे चार हजार 129 मामले सामने आए। मार्च के मुकाबले अप्रैल में मरीजों की तादाद 23 गुना बढ़ गई। अप्रैल अंत तक कुल मौतें बढ़कर 1075 तक पहुंच गईं।
- मई में पहली बार दर्ज हुईं सौ से अधिक मौतें
लॉकडाउन के बावजूद मई में कोरोना बढ़ता चला गया। रोज औसतन छह से सात हजार मरीज सामने आने लगे। वहीं, पांच मई को पहली बार सौ से ज्यादा 194 मरीजों की मौत दर्ज की गई। कोरोना के पहले मामले के 110 दिन बाद 19 मई को मरीजों की संख्या एक लाख पार कर गई। 31 मई को जब देश में लॉकडाउन खत्म कर अनलॉक 1.0 का ऐलान हुआ तब उस दिन माह के सर्वाधिक 8380 मामले सामने आए।
- जून में अनलॉक के साथ फिर बढ़े कोरोना के मामले
अनलॉक 1.0 में आर्थिक गतिविधियां चालू होते ही कोरोना के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई। एक जून को जहां एक दिन में 8392 केस मिले थे, जो 30 जून को 18,522 तक पहुंच गए। मौतों की संख्या भी एक जून को 230 से 30 जून को रोजाना 418 तक पहुंच गई। अनलॉक में मॉल, रेस्तरां और धार्मिक स्थलों को खोलने की घोषणा हुई।
- जुलाई में तीन गुना बढ़ते गए कोविड-19 के मामले
बरसात में संक्रमण बढ़ने का अंदेशा थी और यही हुआ भी। 17 जुलाई को देश में कुल मामले 10 लाख पार कर गए। इनमें महाराष्ट्र में 2.75 लाख और दिल्ली के 11.6 लाख केस दर्ज हुए। जुलाई के पहले दिन 18,653 नए केस के साथ 30 जुलाई को यह करीब तीन गुना बढ़कर 52,123 तक पहुंच गए। 23 जुलाई को पहली बार देश में 1129 मौतें कोरोना से सामने आईं।
- अगस्त में दर्ज हुए 20 लाख केस, मौतें 50 फीसदी बढ़ीं
अगस्त में भारत में कोरोना के 19 लाख 87 हजार 705 मामले दर्ज हुए और 28,859 मौतें हुईं। मौतों का यह आंकड़ा पिछले माह से दोगुना था। अगस्त के पहले दिन 54,735 केस और 31 अगस्त को 78,761 केस दर्ज हुए। अगस्त में रोजाना औसतन 800-900 मौतें दर्ज हुईं।
- सितंबर में कोरोना से 33 हजार मौतें, रोजाना दर्ज हुए करीब एक लाख केस
सितंबर में कोरोना के मामले रोजाना 70 हजार से करीब एक लाख तक पहुंच गए। 17 सितंबर को रिकॉर्ड 97,984 केस सामने आए। मौतों की तादाद भी करीब एक लाख (97,497) तक पहुंच गई। 16 सितंबर को सर्वाधिक 1290 मौतें दर्ज की गईं। अक्टूबर में कुल 33,515 मौतें हुईं।
- अक्तूबर तक एक लाख से अधिक हुईं मौतें
तीन अक्तूबर तक भारत में कुल मौतें एक लाख के पार हो गईं, लेकिन एक अक्तूबर को 1181 मौतों के बाद 31 अक्तूबर तक यह आंकड़ा 551 हो गया। नए केस भी 85-86 हजार रोजाना से 31 अक्तूबर तक 48 हजार के करीब रह गए। पूरे माह मौतें घटकर 24 हजार के करीब रहीं।
- नवंबर में कम हुई संक्रमण की संख्या
तीन महीनों तक लगातार करीब 20 लाख मामलों के बाद नवंबर में रोजाना औसतन मामले 45 से घटकर 38 हजार पर आ गए। कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्या भी रोजाना 400-450 तक आ गई।
- दिसंबर में कोरोना के मामले एक करोड़ के पार
कोरोना के घटते ग्राफ के बीच 18 दिसंबर को भारत में कुल केस एक करोड़ के पार हो गए। हैरान कर देने वाली बात सामने आई कि देश के महज 47 जिलों में ही करीब 50 फीसदी कोरोना के मामले थे। कुल मौतों में करीब 50 फीसदी 24 जिलों में पाई गईं।
- जनवरी 2021 में राहत बनकर आई वैक्सीन
भारत में कोरोना की वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दी गई। 16 जनवरी से देश में टीकाकरण शुरू हो गया।