चिंताजनक: 15 दिन में 50 लाख से अधिक लोगों में संक्रमण
- एक दिन में 15.41 लाख सैंपल की जांच, संक्रमित मिले 3.82 लाख
- नहीं कम हो रहीं मौतें, एक दिन में 3700 से ज्यादा लोगों की गई जान
- तीन दिन में कोरोना वायरस की जांच में चार लाख की कमी
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देश में पहली बार हर चौथा सैंपल कोरोना संक्रमित मिला है। पिछले एक दिन में 15.41 लाख सैंपल की जांच हुई है जिनमें 24.80 फीसदी संक्रमित मिले हैं। बावजूद इसके तीन दिन में कोरोना की जांच में चार लाख सैंपल की कमी दर्ज की गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बीते मंगलवार को देश में 15,41,299 सैंपल की जांच की गई थी जिनमें 3,82,315 कोरोना संक्रमित मिले हैं। बीते सोमवार की तुलना में यह करीब 28 हजार अधिक हैं। वहीं पिछले एक दिन में 3780 लोगों की संक्रमण से मौत हुई है। इनके अलावा राहत की बात है कि 3,38,439 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया।
इसी के साथ ही देश में कोरोना के मामलों ने दो करोड़ का आंकड़ा पार कर दिया है। महज 15 दिन में संक्रमण के 50 लाख से अधिक मामले आए हैं। इससे पहले सोमवार को एक दिन में 3,55,828 नए केस सामने आए थे और इसी दौरान 3,438 लोगों की मौत हुई थी। रविवार को भी मौतों का आंकड़ा 3400 के करीब ही थी। हालांकि, कोरोना के केस 3 लाख 70 हजार के आसपास थे।
फिलहाल संक्रमण के मामले बढ़कर 2,06,65,524 पर पहुंच गए जबकि 2,26,194 लोगों की मौत हो चुकी है। देश में कोरोना के एक करोड़ मामले पिछले वर्ष 19 दिसंबर को हुए थे जिसके 107 दिन बाद पांच अप्रैल को संक्रमण के मामले 1.25 करोड़ पर पहुंच गए। हालांकि महामारी के मामलों को 1.50 करोड़ का आंकड़ा पार करने में महज 15 दिन (19 अप्रैल) लगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले एक दिन में सात राज्यों में कोरोना वायरस के चलते किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है लेकिन 19 राज्यों में हालात ऐसे हैं कि यहां कोरोना की साप्ताहिक संक्रमण दर राष्ट्रीय औसत 21.46 फीसदी की तुलना में अधिक है। जबकि 17 राज्यों में यह दर इससे कम है। देश में अभी सबसे ज्यादा संक्रमण की दर राजस्थान में है जहां एक सप्ताह में 62.34 फीसदी मामले संक्रमित मिले हैं। जबकि सबसे कम मिजोरम है जहां 5.34 फीसदी मामले सात दिन में मिले हैं।
मंत्रालय ने बताया कि देश में सक्रिय मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले एक दिन में 40,096 नए सक्त्रिस्य मरीज मिले हैं जिसके बाद इनकी कुल संख्या भी बढ़कर 34,87,229 तक पहुंच गई है। हालांकि नए मामले तेजी से बढ़ने के चलते मृत्युदर 1.09 फीसदी तक आ चुकी है।
ऐसे कम हो रही जांच
आईसीएमआर के अनुसार 30 अप्रैल को 19,20,107 और एक मई को 19,45,299 सैंपल की जांच की गई थी जो एक दिन में इतने सैंपल की जांच पहली बार है। इस दौरान 30 अप्रैल को 20.13 और एक मई को 20.66 फीसदी सैंपल संक्रमित मिले थे लेकिन इसके बाद दो मई को 18,04,954 सैंपल की जांच हुई जिनमें 21.75 फीसदी मामले संक्रमित मिले। इसी प्रकार तीन मई को 15,04,698 और चार मई को 16,63,742 सैंपल की जांच हुई जिनमें क्रमश: 24.47 और 21.47 फीसदी मामले पाए गए। अब एक बार फिर 15.41 लाख सैंपल की जांच हुई जिनमें करीब 25 फीसदी मामले संक्रमित मिले हैं।
टीका बर्बादी रोकने पर प्रधानमंत्री ने की केरल की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कोविड-19 टीकों की बर्बादी रोकने के लिए केरल सरकार के प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में टीकों की बर्बादी रोकना महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने विजयन के ट्वीट को कोट करते हुए ट्वीट किया, टीकों की बर्बादी कम करने में हमारे स्वास्थ्यकर्मियों और नर्सों का उदाहरण प्रस्तुत करते देखना अच्छा लग रहा है। कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए टीकों की बर्बादी कम करना महत्वपूर्ण है। केरल के सीएम पी विजयन ने केरल में टीके की बर्बादी को लेकर डाटा साझा किया था। कि राज्य को केंद्र सरकार से टीकों की 73,38,806 खुराकें मिली और उपलब्ध अतिरिक्त खुराकों का भी इस्तेमाल करते 74,26,164 खुराकें दी गईं। हमारे स्वास्थ्यकर्मी, खासकर नर्स पूरी तरह कुशल हैं और बधाई के पात्र हैं।
संक्रमितों के लिए अमिताभ ने मांग दुआएं
कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक शुरुआत से जागरूक कर रहे अभिनेता अमिताभ बच्चन ने बुधवार को एक बार फिर लोगों से अपील की है वे महामारी के इस दौर में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें। महानायक ने ट्वीट किया, जो कोरोना से ग्रस्त हैं, उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थनाएं, जो कोरोना से मुक्त हैं, और हुए हैं, उनके लिए भी प्रार्थना, आप सुरक्षित रहें, नियमों का पालन करें, अनुशासित रहें। मालूम हो कि महामारी के शुरू होने के बाद से वे लगातार लोगों के हितों संबंधी संदेश साझा कर रहे हैं। पिछले साल कोविड की पहली लहर में अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन दोनों ही संक्रमण की चलेट में आ गए थे।
दोबारा आरटी-पीसीआर जांच की जरूरत नहीं : आईसीएमआर
अगर कोई कोरोना संक्रमित मरीज है तो उसे दोबारा से आरटी-पीसीआर जांच कराने की आवश्यकता नहीं है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कोविड-19 जांच के नियमों में बदलाव करते हुए कहा है कि एंटीजन जांच या आरटी-पीसीआर में एक बार संक्रमित मिलने पर उसकी दोबारा जांच कराने की जरूरत नहीं है। इसका सबसे बड़ा मकसद जांच करने वाली लैब पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को कम करना होगा।
आईसीएमआर के अनुसार रैपिड एंटीजन टेस्ट में कोरोना संक्रमण पाए जाने पर आरटी-पीसीआर जांच नहीं करानी चाहिए। पहली बार आरटी-पीसीआर जांच में व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया। जब कोई व्यक्ति 10 दिनों तक होम आइसोलेशन में हो और तीन दिन से बुखार न आया हो तो अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय आरटी-पीसीआर जांच कराने की जरूरत नहीं है। अगर किसी व्यक्ति ने अंतरराज्यीय यात्रा की है तो टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। हालांकि अगर रैपिड एंटीजन में कोई व्यक्ति कोरोना निगेटिव आता है, लेकिन उसमें कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं, तो उसे कोरोना का आरटी-पीसीआर जांच करानी चाहिए।
दरअसल देश में कोरोना मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि जारी है। देश में अभी कुल 2,506 लैब हैं, जहां टेस्ट किए जा रहे हैं। आईसीएमआर ने कहा कि मौजूदा वक्त में लैब में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों के संक्रमित होने की वजह से दबाव ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में टेस्टिंग के टारगेट को पूरा करने में मुश्किलें आ रहीं हैं। इस स्थिति को देखते हुए आरटी-पीसीआर सिर्फ वे ही लोग कराएं, जिन्हें जरूरत हो।