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सवालों के घेरे में: राज्यों के पास वैक्सीन नहीं, निजी अस्पतालों में 80 फीसदी तक टीकाकरण 

Wed, 02 Jun 2021 05:36 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 02 Jun 2021 05:36 AM IST
सार

  • निजी अस्पतालों में टीकाकरण सबसे ज्यादा होने के बाद उठ रहे सवाल, कई राज्यों में वैक्सीन की कमी बरकरार
  • क्या वैक्सीन की कमी है सोची-समझी नीति, ताकि फार्मा कंपनियों की हो सके भरपाई
  • जनवरी में कंपनियों ने 150 रुपये में वैक्सीन देने से कर दिया था इनकार, फिर प्राइवेट के जरिये भरपाई पर बनी थी सहमति

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Corona Vaccination Situation in India States do not have vaccine private hospitals upto 80 percent vaccination
कोरोना टीकाकरण (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, आंध्र प्रदेश सहित देश के ज्यादातर हिस्सों में वैक्सीन की कमी बरकरार है। कई राज्यों में सरकारों को टीकाकरण केंद्र तक अस्थायी तौर पर बंद करने पड़े हैं। जबकि निजी अस्पतालों के पास वैक्सीन इतनी है कि न सिर्फ अपने अस्पताल, बल्कि ड्राईव थ्रू के जरिये भी टीकाकरण दिया जा रहा है। इसी को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या वैक्सीन की कमी एक सोची-समझी नीति है ताकि दवा कंपनियों को पहले उनके नुकसान की भरपाई कराई जा सके?

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एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स-इंडिया (एएचपीआई) के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी का कहना है कि वर्तमान में भले ही वैक्सीन की कमी हो लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि अगले दो से तीन माह बाद देश के पास मांग से भी ज्यादा वैक्सीन उपलब्ध होगी। तब शायद दिसंबर 2021 तक टीकाकरण पूरा हो सके, लेकिन उन्होंने कहा कि इसी साल जनवरी में जब केंद्र सरकार के साथ बैठक हुई थी तो दवा कंपनियों ने 150 रुपये में एक खुराक देने से इनकार कर दिया था लेकिन बाद में सहमति बनी और तय हुआ कि निजी क्षेत्र के जरिये इसकी भरपाई की जा सकती है।
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वहीं एक तथ्य यह भी है कि सरकार उस आबादी के वैक्सीन लेने तक का इंतजार कर रही है जो अपनी जेब से रुपये खर्च कर वैक्सीन लगवा सकता है। इससे सरकार का भी खर्च कम होगा और जो परिवार बचेंगे उन्हें जुलाई-अगस्त के बाद सरकारी केंद्रों पर निशुल्क वैक्सीन उपलब्ध होगी। तब तक सरकारें ऐसे ही एक दूसरे पर आरोप लगाती रहेंगी। अभी दिल्ली की बात करें तो यहां एक दिन में 50 से 60 फीसदी टीकाकरण निजी क्षेत्र में हो रहा है। महाराष्ट्र, केरल और आंध्र प्रदेश में तो यह 80 फीसदी तक पहुंच गया है।
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टीकाकरण के लिए राष्ट्रीय तकनीकी सलाह समूह के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा पहले ही कह चुके हैं कि युवाओं को वैक्सीन देने का फैसला उनका नहीं था। यह फैसला सरकार ने लिया है। अप्रैल में ही वैक्सीन की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर पर विचार किया था। उन्होंने यह भी कहा कि एक मई से युवाओं को अनुमति मिलने के बाद बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए पर्याप्त खुराक उपलब्ध होने तक इसे टाला जा सकता है लेकिन सरकार ने इस पर विचार नहीं किया। डॉ. अरोड़ा के इस बयान से स्पष्ट है कि केंद्र और राज्य सरकारों को वैक्सीन के उत्पादन, मांग और कमी के बारे में भलीभांति जानकारी थी।

स्वास्थ्य पॉलिसी विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया का कहना है कि भारत के पास टीकाकरण का काफी पुराना और बेहतर अनुभव है। इसके बाद भी कोविड टीकाकरण कार्यक्रम में फेल होने का मतलब योजनाओं के स्तर पर कमी को दर्शाता है। अगर वाकई यह एक सोची समझी नीति है तो यह काफी गलत है। आम लोगों को इससे काफी नुकसान है।

इस तरह बढ़ा परिवार पर अतिरिक्त बोझ

  • 30 अप्रैल तक कोविशील्ड और कोवाक्सिन निजी अस्पतालों में एक खुराक 250 रुपये थी (150 रुपये खुराक, 100 रुपये सेवा शुल्क)
  • एक मई से कोविशील्ड की एक खुराक 600 रुपये, पांच फीसदी जीएसटी, सेवा शुल्क अलग यानी कीमत 800 से 900 रुपये तक।
  • कोवाक्सिन की एक खुराक 1200 रुपये में, पांच फीसदी जीएसटी, सेवा शुल्क अलग यानि कीमत 1250 से 1400 रुपये तक।
  • एक व्यक्ति के लिए दो खुराक कम से कम दो हजार रुपये में, पांच सदस्यों के एक परिवार वाले का खर्च 10 हजार रुपये।


वैक्सीन पर यह शुल्क भी है अलग से

  • 45 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए ऑनसाइट पंजीयन के नाम पर 300 रुपये का शुल्क अलग से देने का प्रावधान।
  • ड्राईव थ्रू के जरिये 100-200 रुपये का शुल्क अतिरिक्त, यानी प्रति खुराक 1100 और 1600 रुपये तक।

उत्पादन पर झूठ बोलती गईं कंपनियां
भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया शुरुआत से ही उत्पादन क्षमता को लेकर आंकड़े पेश करते आ रहे हैं। हर बार इनके आंकड़े करोड़ों में होते हैं और वर्तमान स्थिति में लाख में। हाल ही में भारत बायोटेक ने कहा था कि सालाना 20 करोड़ खुराक उत्पादन की क्षमता विकसित की जा रही है। जबकि वर्तमान में 90:10 के औसत से कोविशील्ड और कोवाक्सिन मिल रही है। यानी 10 में से दो करोड़ खुराक ही भारत बायोटेक बना पा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार ने अप्रैल में एक ही जानकारी में दो अलग-अलग उत्पादन दिखाए। पहले पेज पर उन्होंने कहा कि एक महीने में एक करोड़ खुराक का उत्पादन हो रहा है। कुछ पेज बाद यही आंकड़ा दो करोड़ बताया। जबकि मीडिया में बयान सालाना 70 और प्रति माह 5 करोड़ उत्पादन होने का दावा किया गया। यह हालत तब है जब भारत दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन बनाने की क्षमता रखता है और भारत के बाद सबसे अधिक टीकाकरण अमेरिका में हुआ हो।

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