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कोरोना ने प्रियंका के मिशन यूपी को पहुंचाया नुकसान: रिकवरी के लिए सोशल मीडिया टीम को मजबूत करने में जुटी पार्टी

Thu, 06 Jan 2022 05:17 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 06 Jan 2022 05:17 PM IST
सार

दो दिन पहले यानी बुधवार तक कांग्रेस मैराथन रैली 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' और 'प्रतिज्ञा पत्रों' के अभियानों के जरिए धीरे-धीरे अपनी पैठ मजबूत करने का काम कर रही थी। लेकिन ओमिक्रॉन के संकट बढ़ने से एक बार फिर उसकी तैयारियों को बड़ा चुनावी झटका लगा है। पार्टी ने लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बुधवार को सभी बड़ी रैलियों, चुनावी सभाओं पर एकतरफा प्रतिबंध लगाने का निर्णय किया है...

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Corona damage to Priyanka gandhi mission UP,  Party engaged in strengthening social media team for recovery
प्रियंका गांधी वाड्रा - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

कोरोना और ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों और संभावित खतरों को देखते हुए कांग्रेस को आगामी दस दिनों के लिए अपने सारे चुनावी कार्यक्रम स्थगित करने पड़े हैं। बेशक इससे कांग्रेस के रफ्तार पकड़ते कैंपेन और प्रियंका गांधी की कड़ी मेहनत को एक धक्का लगा है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले जिस तेजी से प्रियंका गांधी के नेतृत्व में माहौल बन रहा था, उसपर इन बंदिशों से काफी फर्क पड़ सकता है। हालांकि पार्टी इस खतरे को देखते हुए अपने सोशल मीडिया सेल को मजबूत करने और भावी रणनीति बनाने में भी जुटी है।

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मुख्य विपक्ष बन गई थी कांग्रेस

कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने अमर उजाला से कहा कि सपा-बसपा की निष्क्रियता के बीच प्रियंका गांधी का लगातार सरकार पर हमलावर होना लोगों को यह विश्वास दिलाने में कामयाब रहा कि भाजपा के सामने केवल कांग्रेस ही खड़ी रहेगी और उनके हक में आवाज बुलंद करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के किसी गलत कार्य का कोई विरोध नहीं कर रही थी, तो बसपा सरकार के इशारे पर चुप थी। इसी दौर में कांग्रेस ने जनता के हक की आवाज उठाई और गंगा नदी में तैरती लाशों पर सरकार को आइना दिखाया। उन्होंने दावा किया कि यही कारण था कि जनता की नजर में कांग्रेस यूपी में प्रमुख विपक्षी दल बन गई थी।

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बाद के समीकरणों में समाजवादी पार्टी आगे निकलती दिखाई पड़ी। जनता के बीच से भी कुछ ऐसे संदेश दिखने लगे कि जो लोग किसी भी तरह सरकार में बदलाव का मन बना रहे थे, उन्होंने अपना वोट सार्थक करने के लिए समाजवादी पार्टी को ही विकल्प चुनना शुरू कर दिया था। हालांकि, कांग्रेस नेताओं का दावा है कि इसके बाद भी कांग्रेस मजबूत होकर आगे बढ़ रही थी। कांग्रेस नेता बताते हैं कि उनका लक्ष्य किसी भी कीमत पर खुद को इतना मजबूत करना बन गया कि नई सरकार बिना उनकी भागीदारी के न बन सके। यदि कांग्रेस 25 सीटों का आंकड़ा भी पार कर लेती है, तो उसकी आगे की रणनीति कामयाब हो सकती है।  

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ओमिक्रॉन ने संकट बढ़ाया

दो दिन पहले यानी बुधवार तक कांग्रेस मैराथन रैली 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' और 'प्रतिज्ञा पत्रों' के अभियानों के जरिए धीरे-धीरे अपनी पैठ मजबूत करने का काम कर रही थी। लेकिन ओमिक्रॉन के संकट बढ़ने से एक बार फिर उसकी तैयारियों को बड़ा चुनावी झटका लगा है। पार्टी ने लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बुधवार को सभी बड़ी रैलियों, चुनावी सभाओं पर एकतरफा प्रतिबंध लगाने का निर्णय किया है। इससे पार्टी की चुनावी रणनीति को नुकसान पहुंचेगा। इससे पार्टी यूपी में उस लक्ष्य तक पहुंचने में नाकाम रह सकती है जिसे लेकर उसने अपनी तैयारी शुरू की थी।


कांग्रेस के ही एक नेता के मुताबिक पार्टी के लिए बड़ा खतरा यह भी है कि यदि इन समीकरणों में पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाती है, तो इसे प्रियंका गांधी की राजनीतिक क्षमता से जोड़कर दिखाने की कोशिश की जाएगी। राहुल गांधी के मामले में यही कोशिश की गई थी। भाजपा खेमे को अच्छी तरह मालूम है कि राहुल गांधी के बाद प्रियंका गांधी ही वह अकेली शख्सियत हैं जो अपने दम पर कांग्रेस को न केवल खड़ा कर सकती हैं, बल्कि उसे बड़ी राजनीतिक सफलता तक पहुंचा भी सकती हैं। लिहाजा, वह इस अवसर का उपयोग प्रियंका को असफल साबित करने के लिए अवश्य करेगी।

2019 के बाद से प्रियंका ने यूपी में झोंकी पूरी ताकत

लोकसभा चुनाव 2019 में करारी हार के कुछ ही दिनों बाद कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पूरे उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया था। लोकसभा चुनाव में उन्हें पूर्वी यूपी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपाई खेमे में जाने के बाद प्रियंका गांधी को पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी दे दी गई। उन्हें प्रभार देते समय ही पार्टी ने इशारा कर दिया था कि अब प्रदेश में पार्टी को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रियंका गांधी के कंधों पर होगी। प्रियंका ने अपनी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाने की कोशिश भी की। पार्टी में संगठन के स्तर पर तेज-तर्रार लोगों को साथ लाने के बाद उन्होंने यूपी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया।

दिसंबर 2019 में दुनिया ने कोरोना महामारी का सामना करना शुरू कर दिया। 2020 की पहली तिमाही में कोरोना ने भारत में भी अपना पांव फैलाया और देश में संक्रमण की स्थिति बेहद गंभीर हो गई। राहुल और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने संगठन के स्तर पर लोगों की मदद करनी शुरू कर दी। श्रमिकों को यूपी-बिहार के उनके घरों तक पहुंचाने में कांग्रेस ने अपनी सकारात्मक भूमिका निभाई। इस महामारी के दौर में प्रियंका गांधी एक मजबूत नेता के रूप में उभरीं। उन्होंने एक तरफ लोगों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया तो दूसरी ओर सरकार की खामियों पर करारा हमला भी किया। इससे योगी आदित्यनाथ सरकार दबाव में आती हुई भी दिखाई पड़ी।

कोरोना काल में लोगों की आवाज़ बनने की कोशिश की कांग्रेस ने

कोरोना के जिस गंभीर संकट काल में प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस लोगों की मदद कर रही थी और सरकार की नाकामियों पर करारा हमला कर रही थी, आरोप है कि उस दौरान समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एकदम शांत रहे। भाजपा नेताओं का भी आरोप है कि सपा नेता अखिलेश यादव और बसपा नेता मायावती इस संकटकाल में लोगों की मदद करने के लिए सामने नहीं आए। लेकिन इसी दौर में प्रियंका गांधी ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और वे यूपी में मजबूत नेता के तौर पर उभरीं।

हालांकि, इसके बाद कोरोना की स्थिति ज्यादा गंभीर हुई। लॉकडाउन में सरकार के प्रतिबंधों के कारण पूरी कार्रवाई सरकार के हाथों में केंद्रित हो गई। इस दौर में भी कांग्रेस ने लोगों की मदद करना जारी रखा। लेकिन कांग्रेस पार्टी इस दौरान कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं चला पाई और उसे इसका राजनीतिक नुकसान भी हुआ।

वर्ष 2020 पूरी तरह कोरोना की भेंट चढ़ गया। कोरोना संक्रमण का दूसरा दौर समाप्त होने के साथ ही यूपी की राजनीतिक बिसात दोबारा बिछाई जाने लगी। प्रियंका गांधी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कांग्रेस एक बार फिर मजबूती के साथ सरकार का विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरती हुई दिखाई पड़ी। लोगों से मिलने-जुलने से लेकर प्रियंका गांधी के नेतृत्व में आयोजित होने वाली बड़ी रैलियों ने राज्य में पहली बार कांग्रेस के होने का एहसास कराया।

हम होंगे कामयाब, भरोसा बरकरार - कांग्रेस

दलित महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रितु चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस लोगों की आत्मा में बसती है। यही कारण है कि उसकी कुछ कम राजनीतिक सफलता के दौर में जब लोग उसके खात्मे की बात करने लगते हैं, कांग्रेस दोगुनी ताकत के साथ उठ खड़ी होती है और देश को एक विकल्प देती है। उन्होंने कहा कि इसी समय चल रहे यूपी चुनाव में भी प्रदेश की जनता ने यह देख लिया कि भाजपा के विकल्प के तौर पर कांग्रेस ही सबसे ज्यादा प्रतिबद्धता के साथ लड़ाई लड़ सकती है।



उन्होंने कहा कि पार्टी ने बड़ी रैलियों को न करने का फैसला लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया है और अब वह अपना चुनाव प्रचार सोशल मीडिया और छोटी-छोटी जनसभाओं के जरिए आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि बड़ी रैलियों पर प्रतिबंध सभी दलों के लिए होगा, इसलिए इससे असंतुलन नहीं पैदा होगा। कांग्रेस ने जिला-ब्लॉक स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और इस मंच पर भी वह भाजपाई खेमे को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हैं। टीम में कांग्रेस समर्थकों की संख्या बढ़ाकर नई रणनीति के साथ पार्टी चुनावी मैदान में उतरेगी और जीत हासिल करेगी।

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