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बाल आयोग की प्रवासी मजदूरों से अपील, बच्चों की खातिर जहां हैं, वहीं रहें
Sat, 28 Mar 2020 08:26 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sat, 28 Mar 2020 08:26 PM IST
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coronavirus
- फोटो : PTI
बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने देशभर में 21 दिन के लॉकडाउन के बीच अपने घरों की ओर पलायन कर रहे प्रवासी श्रमिकों से शनिवार को अपील की कि वे कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर उसी स्थान पर रहें, जहां वे हैं और अपने बच्चों के हित में फैसला करें।
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आयोग ने राज्य सरकारों को सलाह दी कि वे सड़कों पर रह रहे बच्चों के रहने का प्रबंध स्कूल की इमारतों में करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे संक्रमित न हों। आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने मजदूरी करने वाले परिवारों के बच्चों के बारे में कहा कि पंचायतों व नगर निगम प्राधिकारियों को इन बच्चों के लिए भोजन, आश्रय व दवाओं जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के पर्याप्त प्रबंध करने चाहिए।
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उन्होंने सभी राज्य सरकारों को लिखे पत्र में कहा कि इसके लिए जिला बाल संरक्षण इकाई को इस प्रकार के परिवारों एवं बच्चों को सूचीबद्ध करना चाहिए। जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट को इस पूरी प्रक्रिया और बच्चों की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और इसका प्रबंधन करना चाहिए।
कानूनगो ने कहा कि आयोग को यह पता चला है कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लागू किए गए बंद के कारण दूसरे राज्यों में काम कर रहे प्रवासी मजदूर सड़क मार्गों के जरिए अपने घरों को जा रहे हैं। कुछ बच्चे अपने परिवारों या अकेले या अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूरों के समूहों के साथ जा रहे होंगे।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के परिवारों को बच्चों के हित को ध्यान में रख कर उसी जगह पर रहना चाहिए, जहां वे अभी हैं।
National Commission for Protection of ChildRights issues advisory regarding care and protection of children movingwithmigrant families,children living onstreets/child care institutions in light of COVID-19 pic.twitter.com/VJiAdYU99E
— ANI (@ANI) March 28, 2020
गौरतलब हो कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए पूरे देश में 21 दिनों का लॉकडाउन लागू है। जिसका सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ा है। उनके सामने न केवल खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया बल्कि उन्हें कमाई का भी कोई जरिया नहीं दिख रहा है।
इसी वजह से वह अपने-अपने गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लोग पैदल ही गांवों की तरफ जा रहे हैं। इसी बीच महाराष्ट्र और कर्नाटक में पलायन करने वाले कुछ लोग हादसे का शिकार हो गए हैं। तीन हादसों में अबतक 12 लोगों की मौत हो गई है।
वापी और करामबेली स्टेशन पर दो औरतें हुईं हादसे का शिकार
महाराष्ट्र के वापी और करामबेली स्टेशन पर दो महिलाएं तेज रफ्तार मालगाड़ी से टकरा गईं। पश्चिमी रेलवे ने कहा कि आज सुबह घटना के वक्त दोनों ट्रैक क्रॉस करने की कोशिश कर रही थीं। पश्चिमी रेलवे ने कहा, 'लोगों को रेलवे पटरियों से दूर रहना चाहिए और उन्हे पार या उनपर चलना नहीं चाहिए क्योंकि देश के विभिन्न हिस्सों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए माल गाड़ियों को अब भी चलाया जा रहा है।'
पालघर में तेज रफ्तार टेंपो ने चार लोगों को कुचला
महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई तालुका इलाके में एक तेज रफ्तार टेंपो ने चार लोगों को बुरी तरह से कुचल दिया। जिसकी वजह से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, तीन घायल हो गए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना परौल गांव के पास सुबह तीन बजे करीब हुई, जब तेज रफ्तार से आता टेंपो मुंबई से गुजरात पैदल जा रहे लोगों के उपर चढ़ गया। टेंपो चालक को हिरासत में ले लिया गया है।