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COP28: मुआवजा, जीवाश्म ईंधन जैसे मुद्दों पर चर्चा; जलवायु परिवर्तन रोकथाम के लिए 30 से शुरू होगी वैश्विक कवायद
Tue, 28 Nov 2023 04:50 AM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/दुबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/दुबई
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Tue, 28 Nov 2023 04:50 AM IST
सार
दुनिया भर में घातक गर्मी, सूखा, जंगल की आग, तूफान और बाढ़ का असर आजीविका और जीवन पर पड़ रहा है। 2021-2022 में वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। इसका लगभग 90 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन से आता है। कॉप-28 का आयोजन 30 नवंबर से 12 दिसंबर तक दुबई एक्सपो सिटी में होगा। इस दौरान किंग चार्ल्स तृतीय, पोप फ्रांसिस और लगभग 200 देशों के नेता इन मुद्दों को प्रमुखता से संबोधित करेंगे।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में 30 नवंबर से शुरू होने वाले वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के 28वें दौर में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों, जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल, मीथेन एवं कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए वित्तीय सहायता और अमीर देशों से विकासशील देशों को दिए जाने वाले मुआवजे जैसे मुद्दों पर गहन बातचीत होने की संभावना है।
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दुनिया भर में घातक गर्मी, सूखा, जंगल की आग, तूफान और बाढ़ का असर आजीविका और जीवन पर पड़ रहा है। 2021-2022 में वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। इसका लगभग 90 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन से आता है। कॉप-28 का आयोजन 30 नवंबर से 12 दिसंबर तक दुबई एक्सपो सिटी में होगा। इस दौरान किंग चार्ल्स तृतीय, पोप फ्रांसिस और लगभग 200 देशों के नेता इन मुद्दों को प्रमुखता से संबोधित करेंगे।
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मुआवजे के मुद्दे पर बन सकती है गतिरोध की स्थिति
सम्मेलन में जलवायु संकट में कम योगदान देने के बावजूद जलवायु संकट का खामियाजा भुगतने वाले विकासशील और गरीब देशों को आर्थिक समर्थन के मुद्दे का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। पिछले साल मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित कॉप27 में अमीर देशों ने इस मुद्दे पर हानि और क्षति कोष स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की थी। हालांकि, बैठक के बाद धन आवंटन, लाभार्थियों और प्रशासन पर निर्णय लेने के लिए मुद्दे को एक समिति को सौंप दिया गया था। देशों के बीच मतभेदों के कारण एक अतिरिक्त बैठक भी की गई थी। समझौते के मसौदे को जलवायु वार्ता में अंतिम मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
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जीवाश्म ईंधन पर अलग-अलग तर्क
जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल और गैस) को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के लिए वैश्विक दबाव बढ़ रहा है। वैश्विक जलवायु परिवर्तन में सबसे बड़ा इसी का योगदान है। यह वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लगभग 90% के लिए जिम्मेदार है। तर्क है कि उन्हें परिष्कृत तकनीकें विकसित करने तक तेल और गैस निकालने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, विशेषज्ञ अप्रमाणित मानते हैं।
प्रौद्योगिकी की ताकत का इस्तेमाल करने पर दिया जोर
कॉप-28 प्रेसीडेंसी के महानिदेशक माजिद अल-सुवैदी ने जलवायु कार्रवाई का समर्थन करने के लिए प्रौद्योगिकी की शक्ति का इस्तेमाल करने के मुद्दे पर दुबई फ्यूचर फोरम में एक सत्र का नेतृत्व किया। ‘कॉप28 के लिए एकजुटता : प्रौद्योगिकी से लाभ और जलवायु प्रौद्योगिकी का भविष्य’ शीर्षक से पैनल चर्चा में सुवेदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुख रूप से शामिल विषय है।