West Bengal: किसी को पुलिस ने पकड़ा तो कोई जनता के डर से बिस्तर से नीचे छिपा, हार के बाद TMC नेताओं पर आफत
पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में कथित कट-मनी विवाद को लेकर एक टीएमसी नेता का वीडियो चर्चा में है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने दावा किया कि ग्रामीणों के विरोध के बाद नेता को बिस्तर के नीचे छिपना पड़ा। हालांकि वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है।
विस्तार
क्या है मामला?
यह घटना कूचबिहार जिले के माथाभांगा इलाके की बताई जा है। यहां स्थानीय ग्रामीणों ने टीएमसी नेता शाहिदुल मिया के घर को चारों तरफ से घेर लिया था। लोगों का आरोप है कि शाहिदुल मिया ने सरकारी आवास योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लाभार्थियों से 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक की अवैध वसूली की थी।
The cut-money scam in West Bengal is now producing scenes straight out of a political farce.
In Mathabhanga, Cooch Behar, local residents surrounded the residence of TMC leader Shahidul Miya, accusing him of extorting between ₹5,000 and ₹20,000 from beneficiaries of government… pic.twitter.com/NtfwX94vIQविज्ञापन विज्ञापन— Amit Malviya (@amitmalviya) June 4, 2026
क्या बोले भाजपा के आईटी सेल प्रमुख?
अमित मालवीय ने 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में लिखा कि जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है और गिरफ्तारियां हो रही हैं, गरीबों का शोषण करने वालों के लिए छिपना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब जनता का गुस्सा फूटा, तो टीएमसी नेता भीड़ के डर से बिस्तर के नीचे जाकर छिप गए। अंत में पुलिस को उन्हें उस जगह से सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। हालांकि, इस वीडियो की सच्चाई की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि काकद्वीप से लेकर नामखाना और अब माथाभांगा तक, हर जगह एक ही कहानी देखने को मिल रही है। हर तरफ कट-मनी, भ्रष्टाचार और दहशत का माहौल है। पिछले हफ्ते माथाभांगा में कई लोगों को वह 'कट-मनी' वापस मिल गई, जो उन्होंने पिछली टीएमसी सरकार के समय सरकारी योजनाओं का फायदा लेने के लिए स्थानीय दबंगों को दी थी।
इस मामले पर जिले के टीएमसी नेतृत्व ने अपनी सफाई दी है। पार्टी का कहना है कि ग्रामीणों या व्यापारियों से अवैध रूप से पैसा वसूलने की गतिविधियों से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, टीएमसी से जुड़े कथित दबंगों से पैसा वापस मांगने की मांग तेज हो गई है। इसके दबाव में आकर कई लोग पैसे लौटा भी रहे हैं। ऐसी ही एक घटना दक्षिण 24 परगना जिले के नामखाना इलाके में भी हुई। वहां पातिबूनिया गांव में एक टीएमसी पंचायत सदस्य ने 45 ग्रामीणों को 5,000-5,000 रुपये वापस किए हैं।
ये भी पढ़ें: मणिपुर: एंटी-ड्रग ऑपरेशन में पूछताछ कर रहे पुलिसकर्मी को चाकू से गोदा, इलाज के दौरान मौत; मुख्य आरोपी गिरफ्तार
भ्रष्टाचार और वसूली के मामलों में टीएमसी नेताओं पर एक्शन
वहीं इससे पहले, पुलिस ने हल्दिया में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी करने के आरोप में टीएमसी नेता तिलक कुमार चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया। वहीं, सुरेंद्रनाथ कॉलेज हथियार कांड में टीएमसी नेता पारितोष दत्ता को बर्धमान से पकड़ा गया। कोलकाता पुलिस ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। इसके अलावा, शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच भी तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सांसद अभिषेक बनर्जी को 15 जून को पूछताछ के लिए बुलाया है। ईडी ने पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के घर और प्रसन्ना कुमार रॉय के दफ्तर पर भी छापेमारी की। प्रसन्ना कुमार फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
कोलकाता नगर निगम के तीन पार्षदों पर भी गाज गिरी है। पुलिस ने वसूली के आरोप में पार्षद अरिजीत दास ठाकुर, सचिन सिंह और सुदीप पोल्ले को गिरफ्तार किया है। इन पर व्यापारियों और प्रमोटरों को धमकाकर पैसे वसूलने का आरोप है। राज्य में पिछले कुछ दिनों में टीएमसी के कई बड़े चेहरों पर कानूनी कार्रवाई हुई है। इससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।