फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Consensual relationship is not a licence to assault woman: HC

Karnataka High Court: ‘सहमति से संबंध बनाने का मतलब महिला से मारपीट करने का लाइसेंस नहीं है’, HC की टिप्पणी

Tue, 18 Jun 2024 04:07 AM IST
विशांत श्रीवास्तव अमर उजाला, न्यूज डेस्क, बंगलूरू
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, बंगलूरू Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Tue, 18 Jun 2024 04:07 AM IST
सार

‘अगर कोई महिला आपसी सहमति से संबंध बनाती है तो इसका मतलब यह नहीं कि महिला से मारपीट करने का लाइसेंस मिल गया।’ ये टिप्पणई एक मामले में सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने की है।  

विज्ञापन
Consensual relationship is not a licence to assault woman: HC
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : karnataka high court

विस्तार

एक मामले पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर आपसी समहति से संबंध बनता है तो इसका मतलब यह नहीं की महिला से मारपीट करने का लाइसेंस मिल गया है। हालांकि, न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए बलात्कार और धोखाधड़ी के अपराधों को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता और महिला दोनों बेंगलुरु के रहने वाले हैं और एक सॉफ्टवेयर कंपनी में साथ काम करते थे। दोनों के बीच पांच सालों से संबंध थे। 

विज्ञापन

जुलाई 2022 में महिला ने रेप की शिकायत दर्ज करवाई थी
जुलाई 2022 में, महिला ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी कि एक पुरुष ने शादी का वादे करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए लेकिन बाद में उसे तोड़ दिया। इसके बाद महिला ने अन्नपूर्णेश्वरी नगर पुलिस से बलात्कार, धोखाधड़ी करने, हमला करने सहित कई अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज करवाई। 

विज्ञापन

वहीं इसके बाद आरोपी ने महिला के द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को यह कहते हुए अदालत में चुनौती दी कि महिला फरवरी 2020 में भी ऐसे ही एक पुरुष पर शादी का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगा चुकी है। इसलिए महिला द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर को रद्द कर दिया। आरोपी ने दावा किया कि महिला को ऐसे ही अलग-अलग पुरुषों पर मुकदमा दर्ज करवाने की आदत है। 

विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट की टिप्पणी- सहमति से संबंध बनाना बलात्कार और धोखाधड़ी नहीं

आरोपी की बातों को सुनते हुए और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर गौर करने के बाद, न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने कहा कि सहमति से बनाए गए संबंध के आधार पर बलात्कार और धोखाधड़ी के आरोपों को बरकरार नहीं रखा जा सकता है।

हालांकि हमला करने और अन्य आपराधिक मुकदमों को लेकर न्यायाधीश नागप्रसन्न ने बताया कि महिला द्वारा दिए गए प्रमाण पत्रों से यह पता चलता है कि महिला के शरीर पर कई चोटें आईं हैं। जो कि कथित तौर पर आरोपी द्वारा हमला करने के कारण आईं हैं। इसलिए कोर्ट ने मारपीट करने और हमला करने के मामले में पुलिस को जांच करने के आदेश दिए हैं।  इस तरह से न्यायाधीश ने महिला की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। 




 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed