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बीमार माकन को हटाकर अब दिल्ली का इलाज करेगी कांग्रेस

Sat, 05 Jan 2019 02:58 AM IST
अनिल पांडेय अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Sat, 05 Jan 2019 02:58 AM IST
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Congress will treat Delhi by removing sick ajay Maken
कांग्रेस के दिल्ली अध्यक्ष अजय माकन का इस्तीफा करीब तीन महीने बाद मंजूर हो गया। माकन ने भले ही अपनी बीमारी को लेकर बीते साल 18 सितंबर को अपने इस्तीफे की पेशकश की थी लेकिन आलाकमान ने उसे मंजूर कर दिल्ली में पार्टी को मजबूत किए जाने का इलाज खोजा है। कहीं न कहीं, कांग्रेस नेतृत्व महागठबंधन के लिहाज से आम आदमी पार्टी को साथ लेकर चलना चाहता है।
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अजय माकन का इस्तीफा मंजूर होने की जानकारी नेतृत्व की ओर से नहीं दी गई लेकिन शुक्रवार सुबह खुद अजय माकन ने ट्वीट कर इसका खुलासा किया। उन्होंने इस फैसले के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को धन्यवाद दिया। माकन ने ट्वीट में लिखा कि 2015 विधानसभा चुनाव के बाद से ही उन्होंने दिल्ली के सभी नेताओं का सहयोग मिला। 
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कठिन परिस्थितियों में ये आसान नहीं था। आप सभी का आभार। दरअसल बृहस्पतिवार शाम को माकन प्रदेश प्रभारी पीसी चाको के साथ राहुल गांधी से मिले थे। उन्होंने एक बार फिर पद से मुक्त किए जाने की पेशकश की। बताते हैं कि राहुल ने उन्हें मुक्त किए जाने का इशारा दे दिया। जबकि 18 सितंबर को जब उन्होंने इस्तीफा भेजा था तो राहुल ने उन्हें पद बने रहने को कहा था और प्रभारी चाको ने भी इस्तीफा मंजूर न होने की बात कही थी।
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दरअसल कांग्रेस दिल्ली में खुद को स्थापित करने के साथ भाजपा को उखाड़ने का प्लान लेकर आगे बढ़ना चाहती है। माकन ने बार-बार इस बात के पक्षधर रहे कि पार्टी भाजपा और आप से बराबर दूरी बनाकर चले। माकन खुलकर आप नेताओं और दिल्ली सरकार के खिलाफ बयानबाजी भी करते रहे। जबकि दूसरी ओर संसद के अंदर और महागठबंधन की बैठक में खुद अरविंद केजरीवाल के पहुंचने के बाद कांग्रेस नेतृत्व का रुख आप को लेकर लचीला है।

कांग्रेस की कोशिश नए अध्यक्ष के माध्यम से दिल्ली को मजबूत चेहरा और नेतृत्व देना है। यूपी में आखिरी समय सपा से समझौते के चलते सीएम उम्मीदवारी से हटीं 84 साल की शीला दीक्षित फिर पुराने मैदान में सक्रिय हो सकती हैं। शीला दीक्षित इस मुद्दे पर कुछ बोल नहीं रही हैं लेकिन आलाकमान के किसी भी फैसले को मानने को तैयार हैं। 


राहुल की नई कांग्रेस में अकेले अध्यक्ष के बजाय राज्यों के आकार में दो से चार कार्यकारी अध्यक्षों का फार्मूला दिल्ली में भी लागू हो सकता है। अगर शीला दीक्षित को कमान सौंपी जाती है तो भी उनकी मदद के लिए कम से कम दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाएंगे। कांग्रेस फिलहाल ऐसा नेता सामने रखना चाहता है जो दिल्ली की जमीनी हकीकत और माहौल को ध्यान में रखकर काम करे।
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