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गुजरात की गलती मध्यप्रदेश में नहीं दोहराएगी कांग्रेस, बसपा के साथ चुनाव लड़ने की संभावना 

Wed, 11 Jul 2018 11:14 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Jul 2018 11:14 PM IST
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Congress will not repeat the mistake of Gujarat elections in Madhya Pradesh assembly elections

राहुल गांधी के लिए बेहद अहम माने जा रहे गुजरात चुनाव में कांग्रेस जीत का स्वाद चखते-चखते रह गई थी। चुनाव के अंतिम समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धुंआंधार प्रचार किया और गुजरात अस्मिता को भुनाने की भरसक कोशिश की।

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इसका परिणाम रहा कि भाजपा चुनाव जीतने में कामयाब तो जरूर रही, लेकिन 182 सीटों की विधानसभा में वह 99 पर अटक गई। सीपीआई नेता अतुल अंजान का कहना है कि अगर कांग्रेस चुनाव पूर्व दलितों-आदिवासियों के संगठनों से बेहतर तालमेल करती तो वह गुजरात चुनाव में जीत हासिल कर सकती थी। 
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कांग्रेस की बसपा से चल रही है बातचीत

फिलहाल, कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी से हाथ मिलाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ ने मंगलवार को कह दिया कि वे इस विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के विषय में गंभीरता से सोच रहे हैं।
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उन्होंने स्वीकार किया कि बसपा के कुछ नेताओं से इस संदर्भ में उनकी बातचीत चल रही है। दोनों पार्टियों की तरफ से अभी ऐसा कुछ फाइनल नहीं हुआ है, लेकिन अगर ऐसा होता है तो भाजपा के लिए मध्यप्रदेश में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 

बसपा का साथ निभा सकता है अहम भूमिका

मध्यप्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 44.88 प्रतिशत वोट हासिल किया था। वहीं, कांग्रेस को 36.38 तो बसपा को 6.29 प्रतिशत वोट हासिल हुआ था। इस लिहाज से अगर कांग्रेस बसपा और आदिवासी समूहों में प्रभाव रखने वाले कम्यूनिस्ट पार्टियों के साथ चुनाव लड़ती है तो वह भाजपा के सामने कड़ी चुनौती पेश कर सकती है।

ध्यान देने वाली बात है कि कम से कम बसपा को ऐसी पार्टी के रुप में जाना जाता है जो अपना वोट अपने गठबंधन के सहयोगियों तक ट्रांसफर करा सकती है। इस हिसाब से कांग्रेस और बसपा के वोटबैंक एक साथ आ जाते हैं तो भाजपा को कई सीटों पर जीत हासिल करने में मुश्किल हो जाएगी।  

शिवराज के लिए और भी हैं मुश्किलें

कांग्रेस के लिहाज से यह बात और भी फायदेमंद है कि किसानों के मुद्दे पर शिवराज सरकार लगातार परेशानी में रही है। मंदसौर की घटना ने किसानों के मन में सरकार के प्रति गु्स्सा पैदा किया है। किसान नेता शिवप्रसाद शर्मा उर्फ कक्का जी इस समय भी सक्रिय हैं और उनके साथ कई शिवराज विरोधी भी सक्रिय हैं। इसके अलावा लंबे भाजपा शासन से उपजी सत्ता विरोधी लहर कांग्रेस की नाव पार लगाने में अहम भूमिका निभा सकती है।    

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