{"_id":"5a0bc8ae4f1c1b7a548bcf46","slug":"congress-targets-bjp-about-rafale-fighter-plane-deal","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कांग्रेस ने पूछा- यूपीए के समय 526 करोड़ का एक विमान 1570 में क्यों खरीदा गया","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
कांग्रेस ने पूछा- यूपीए के समय 526 करोड़ का एक विमान 1570 में क्यों खरीदा गया
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Wed, 15 Nov 2017 10:31 AM IST
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rafale fighter plane
- फोटो : social media
कांग्रेस का आरोप है कि भारतीय वायुसेना के लिए लड़ाकू विमानों की खरीद में ‘बड़े घोटाले’ की बू आ रही है। पार्टी ने फ्रांस की कंपनी डेसॉल्ट एविएशन से खरीदे जा रहे 36 लड़ाकू विमानों की खरीद में पारदर्शिता और नियम-प्रावधानों को दरकिनार कर पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला का दावा है कि यूपीए में जिस एक विमान को खरीदने के लिए 526 करोड़ रुपये तय हुए थे, उसे 1570 करोड़ रुपये में इसी कंपनी से खरीदा जा रहा है। वहीं यूपीए सरकार ने विमान खरीद के साथ तकनीकी लेने का भी समझौता किया था जबकि अब तकनीकी भी नहीं मिलेगी। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में पांच सवाल पूछे हैं।
साथ ही आरोप लगाया कि सरकार ने पूर्व में तय सौदे के मुताबिक सरकारी सरकारी उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. को सौदे से जोड़कर हानि पहुंचाने और रिलायंस डिफेंस लि. को लाभ पहुंचाया है।
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कांग्रेस मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला का दावा है कि यूपीए में जिस एक विमान को खरीदने के लिए 526 करोड़ रुपये तय हुए थे, उसे 1570 करोड़ रुपये में इसी कंपनी से खरीदा जा रहा है। वहीं यूपीए सरकार ने विमान खरीद के साथ तकनीकी लेने का भी समझौता किया था जबकि अब तकनीकी भी नहीं मिलेगी। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में पांच सवाल पूछे हैं।
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साथ ही आरोप लगाया कि सरकार ने पूर्व में तय सौदे के मुताबिक सरकारी सरकारी उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. को सौदे से जोड़कर हानि पहुंचाने और रिलायंस डिफेंस लि. को लाभ पहुंचाया है।
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- फोटो : social media
कांग्रेस ने पीएम से सवाल किए हैं कि आखिर खरीदे गए विमानों की सही कीमत क्या है और इतना महंगा क्यों खरीदा जा रहा है। सरकार बिना तकनीक इस विमान को क्यों ले रही है? सौदे से एचएएल को किनारे क्यों कर दिया गया?
क्या कारण है कि पीएम रिलायंस डिफेंस लिमिटेड की मदद कर रहे थे जिसके चलते डेसाल्ट एविएशन ने रिलायंस के साथ 30 हजार करोड़ रुपये का डिफेंस उत्पादन समझौता किया है? क्या रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में रिलायंस व डेसॉल्ट एविएशन के बीच हुए सबसे बड़े समझौते को रक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी, विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड और कैबिनेट से संस्थागत अनुमति मिली है।
सुरजेवाला का कहना है कि प्रधानमंत्री मई 2015 में फ्रांस गए थे। तब उनके साथ रिलायंस डिफेंस लि. के मालिक अनिल अंबानी भी गए थे। पीएम ने रक्षा सौदों की अनिवार्य प्रक्रिया नजरअंदाज कर सीधे तौर पर 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा कर दी जबकि यूपीए सरकार में हुए 126 रॉफेल खरीद की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया।
सरकार ने 23 सितंबर 2016 में फ्रांस की उसी कंपनी से 36 तैयार विमान खरीदने का करार किया और दस दिन बाद रिलायंस ने कंपनी के साथ समझौता कर यहां होने वाले काम का ठेका ले लिया। यूपीए के दौरान इसी कंपनी से जो करार हुआ था उसके मुताबिक 18 लड़ाकू विमान फ्रांस से बनकर आने थे और 108 का निर्माण देश में एचएएल के साथ मिलकर होना था। कंपनी को 50 प्रतिशत निवेश भी भारत में करना अनिवार्य था। एचएएल को 70 फीसदी और राफेल को 30 प्रतिशत काम करना था।
क्या कारण है कि पीएम रिलायंस डिफेंस लिमिटेड की मदद कर रहे थे जिसके चलते डेसाल्ट एविएशन ने रिलायंस के साथ 30 हजार करोड़ रुपये का डिफेंस उत्पादन समझौता किया है? क्या रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में रिलायंस व डेसॉल्ट एविएशन के बीच हुए सबसे बड़े समझौते को रक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी, विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड और कैबिनेट से संस्थागत अनुमति मिली है।
सुरजेवाला का कहना है कि प्रधानमंत्री मई 2015 में फ्रांस गए थे। तब उनके साथ रिलायंस डिफेंस लि. के मालिक अनिल अंबानी भी गए थे। पीएम ने रक्षा सौदों की अनिवार्य प्रक्रिया नजरअंदाज कर सीधे तौर पर 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा कर दी जबकि यूपीए सरकार में हुए 126 रॉफेल खरीद की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया।
सरकार ने 23 सितंबर 2016 में फ्रांस की उसी कंपनी से 36 तैयार विमान खरीदने का करार किया और दस दिन बाद रिलायंस ने कंपनी के साथ समझौता कर यहां होने वाले काम का ठेका ले लिया। यूपीए के दौरान इसी कंपनी से जो करार हुआ था उसके मुताबिक 18 लड़ाकू विमान फ्रांस से बनकर आने थे और 108 का निर्माण देश में एचएएल के साथ मिलकर होना था। कंपनी को 50 प्रतिशत निवेश भी भारत में करना अनिवार्य था। एचएएल को 70 फीसदी और राफेल को 30 प्रतिशत काम करना था।