Congress: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर साधा निशाना, कहा- किसान विरोधी हैं उनकी नीतियां
जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि वर्ष 2014 में सत्ता संभालने के बाद से ही जैविक प्रधानमंत्री की नीतियां किसान विरोधी रही हैं। ना तो पर्याप्त खरीदी हो रही है, न उचित दाम मिल रहा है और न ही एमएसपी की कानूनी गारंटी मिल रही है।
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किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी न मिलने पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसान विरोधी करार दिया। उन्होंने लिखा कि वर्ष 2014 में सत्ता संभालने के बाद से ही जैविक प्रधानमंत्री की नीतियां किसान विरोधी रही हैं। ना तो पर्याप्त खरीदी हो रही है, न उचित दाम मिल रहा है और न ही एमएसपी की कानूनी गारंटी मिल रही है। किसानों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है।
वर्ष 2014 में सत्ता संभालने के बाद से ही नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री की नीतियां किसान विरोधी रही हैं।
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 19, 2024
ना तो पर्याप्त खरीदी हो रही है, न उचित दाम मिल रहा है और न ही MSP की कानूनी गारंटी मिल रही है।
किसानों के साथ इस सरकार द्वारा किए गए छल, कपट और धोखे पर मेरे सहयोगी अभय दुबे… pic.twitter.com/Sql1ptue93
उन्होंने कांग्रेस के मीडिया समन्वयक अभय दुबे का बयान साझा किया। अभय दुबे ने बयान दिया है कि मोदी सरकार पिछले 10 साल से किसानों के साथ गलत व्यवहार कर रही है। इससे साफ है कि नरेंद्र मोदी किसान विरोधी हैं। हमारी मांग है कि किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में सोयाबीन की फसल का समर्थन मूल्य कम से कम 6000 रुपये तय किया जाए।
कांग्रेस नेता अभय दुबे ने कहा कि अगर सोयाबीन का समर्थन मूल्य 6,000 रुपये तय किया जाता है, तो अंतर की राशि उन किसानों के खातों में भी जमा की जानी चाहिए, जिन्होंने पहले ही अपनी फसल कम दाम में बेच दी है। पीएम मोदी को समर्थन मूल्य घोषित करने की औपचारिकता पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने पीएम मोदी के कुछ फैसले गिनाए। अभय दुबे ने कहा कि सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी ने जून 2014 में किसानों को समर्थन मूल्य के ऊपर दिया जाने वाला 150 रुपये का बोनस बंद करा दिया। दूसरे निर्णय में एक के बाद एक किसानों की जमीनों के उचित मुआवजा कानून को खत्म करने वाले तीन अध्यादेश लाए गए। तीसरे फैसले में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दिया कि किसानों को लागत के 50 फीसदी से ऊपर समर्थन मूल्य नहीं दिया जा सकता, नहीं तो बाजार खराब हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर किसान विरोधी अन्य आरोप भी लगाए।
जयराम रमेश ने पूछा- 2022 में महाविकास अघाड़ी सरकार को गिराने के लिए भाजपा ने कितना चंदा लिया?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर भी भाजपा पर आरोप लगाए। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि 2022 में महाविकास अघाड़ी की सरकार को गिराने के लिए भाजपा ने खुली खरीद फरोख्त के जरिये कितना चंदा लिया था? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा ने महाविकास अघाड़ी की सरकार को गिराने के लिए अविभाजित शिवसेना और एनसीपी के विधायकों की खरीद की थी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि महायुति ने महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट कर दिया है। हम जानते हैं कि इलेक्टोरल बॉन्ड घोटाले में चार लाख करोड़ रुपये का खेल हुआ है और इससे महाराष्ट्र के खजाने को कम से कम 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सवाल यह है कि महाविकास अघाड़ी की सरकार को गिराने में चंदे का कितना पैसा लगा?
उन्होंने कहा कि कल सामने आया कि महायुति ने चुनावी चंदे के बदले में टेंडर के लिए अधिक पैसे दिए। 10 हज़ार करोड़ रुपये महाराष्ट्र के सरकारी खजाने से निकालकर कंपनियों को दिए गए। महायुति का गठन और उसका सरकार बनाना सत्ता के प्रति उसके लालच और लोकतांत्रिक मूल्यों की उपेक्षा का प्रमाण है। गलत तरीके से प्राप्त ऐसे इलेक्टोरल बॉन्ड के पैसे से शिवसेना और एनसीपी विधायकों की खुली खरीद-फरोख्त हुई।
जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट में आरोप लगाया कि रिश्वतखोरी के अलावा विधायकों और नेताओं को महायुति में शामिल होने के लिए मजबूर करने के लिए ED/CBI/IT को भी लगाया गया। इसका प्रमाण स्वयं महायुति नेताओं से मिला है। सांसद रवींद्र वायकर ने ही कहा था कि जब वे महाविकास अघाड़ी में थे तब उनके पास दो विकल्प थे - राजनीतिक दल बदलो या जेल जाओ। इससे पहले शु्क्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र में महायुति सरकार ने 10 हजार करोड़ की लूट कराई है। जयराम रमेश ने पवन खेड़ा की एक्स पोस्ट को साझा करते हुए लिखा कि यह मामला प्रीपेड चंदा (दान) और पोस्टपेड चंदा (व्यापार) से जुड़ा है।
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