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Adani Row: 'अदाणी मामले में सेबी ने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने में दिखाई अक्षमता', कांग्रेस ने उठाए सवाल

Sat, 26 Aug 2023 05:29 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 26 Aug 2023 05:29 PM IST
सार

कांग्रेस ने 25 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सेबी की स्टेटस रिपोर्ट पर बयान जारी कर कहा कि अदाणी ग्रुप पर लगे राउंड-ट्रिपिंग और मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोपों के मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने में सेबी की अक्षमता बेहद चिंताजनक है। 

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Congress statement on the status report of SEBI filed in the Supreme Court over Adani Hindenburg
जयराम रमेश - फोटो : PTI

विस्तार

सेबी ने अदाणी समूह और अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग के मामले पर अपनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है। वहीं कांग्रेस ने 25 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सेबी की स्टेटस रिपोर्ट पर बयान जारी कर कहा कि अदाणी ग्रुप पर लगे राउंड-ट्रिपिंग और मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोपों के मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने में सेबी की अक्षमता बेहद चिंताजनक है। 

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट में इसे स्वीकार किया है और कहा है कि केवल एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ही इसकी जांच कर सकती है कि सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पसंदीदा बिजनेस ग्रुप की मदद के लिए मानदंडों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन कैसे किया। 
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अदाणी समूह ने पब्लिक शेयर होल्डिंग से जुड़े नियम का किया उल्लंघन 
एक्स (ट्विटर) पर जारी किए गए बयान में कांग्रेस ने कहा कि सेबी ने इस मामले से संबंधित जिन 24 मामलों की जांच की, उनमें से दो अभी भी अंतरिम स्टेटस में है। अंतरिम रिपोर्ट्स में से एक उस महत्वपूर्ण प्रश्न से संबंधित है कि क्या अदाणी ने प्रतिभूति संविदा (विनियमन) नियम के उपनियम 19A का उल्लंघन किया, जो कि न्यूनतम पब्लिक शेयर होल्डिंग से संबंधित है। क्या अदाणी समूह ने न्यूनतम पब्लिक शेयर होल्डिंग के तय पैमाने का पालन किया? 
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आगे जयराम रमेश ने कहा बयान में कहा कि सरल शब्दों में कहें तो क्या अदाणी ने राउंड ट्रिपिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए विदेशी टैक्स हेवेन में स्थित अपारदर्शी संस्थाओं का उपयोग किया, जिनका विरोध करने का प्रधानमंत्री हमेशा दावा करते रहे हैं? सेबी ने देरी का कारण बताते हुए कहा है कि बाहरी एजेंसियों और संस्थाओं से जानकारी का अभी भी इंतजार है।

जयराम रमेश ने कहा कि देश स्पष्ट रूप से 2018 में विदेशी फंड्स के मूल स्वामित्व (यानी वास्तविक मालिक) से संबंधित रिपोर्टिंग की आवश्यकताओं को कमजोर करने और 2019 में इसे पूरी तरह से हटाने के सेबी के फैसले की भारी कीमत चुका रहा है। किसी और ने नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ समिति ने बताया कि सेबी अदाणी की कंपनियों में विदेशी निवेशकों के लाभकारी स्वामित्व की पहचान करने में विफल रहा है। 

आगे बयान में कहा कि समिति का कहना था कि प्रतिभूति बाजार नियामक को गलत काम का संदेह तो है, लेकिन वह कुछ करने में फेल रहा है। ऐसा रिपोर्टिंग की इन शर्तों को हटाने के उसके फ़ैसले के कारण हुआ। जिसके बाद टैक्स वेन में स्थित अपारदर्शी फंड्स के मालिकों के हाथों में पूरा नियंत्रण चला गया। 28 जून 2023 को सेबी के बोर्ड की बैठक के बाद सख्त रिपोर्टिंग नियमों को फिर से लागू किया गया। यह कदम सेबी द्वारा अपराध की स्पष्ट स्वीकृति है। हालांकि तब तक काफी नुकसान हो चुका था।

अदाणी-हिंडनबर्ग मामले में 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
बाजार नियामक सेबी ने एक हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि अदाणी-हिंडनबर्ग  में उसकी 24 जांचों में से 22 की फाइनल रिपोर्ट हैं और दो अंतरिम रिपोर्ट तैयार हैं। सेबी को अब दो अंतरिम जांचों पर बाहरी एजेंसियों से अपडेट का इंतजार है। अंतरिम जांच में अदाणीकी कंपनियों की 13 विदेशी यूनिट शामिल थीं। सेबी ने एफपीआई पर पांच देशों से डिटेल्स मांगी हैं। सुप्रीम कोर्ट में अदाणी-हिंडनबर्ग मामले को लेकर 29 अगस्त को सुनवाई होनी है।


ये है मामला
गौरतलब है कि 24 जनवरी 2023 की हिंडनबर्ग रिपोर्ट में अदाणी समूह पर लेनदेन और हेरफेर के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद अदाणी समूह की लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैपिटल में अरबों डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा था। हालांकि, अदाणी समूह ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट के सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। 

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