Manipur: यौन हिंसा होने पर भी नहीं बदले गए मणिपुर के सीएम, 30 वर्ष पहले कांग्रेस ने गिरा दी थी अपनी ही सरकार
Manipur: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा, नरेंद्र मोदी सरकार 'सब ठीक है', की तरह व्यवहार करना कब बंद करेगी। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को कब बदला जाएगा। राज्य में बड़े पैमाने पर भड़की हिंसा को 78 दिन, जबकि महिलाओं को नग्न करके घुमाने और कथित तौर पर दुष्कर्म की भयावह घटना को 77 दिन हो गए हैं...
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मणिपुर में 3 मई को शुरू हुई हिंसा अभी तक कुछ इलाकों में जारी है। हिंसा शुरू होने के 24 घंटे बाद ही वहां पर दिल दहलाने और शर्मसार करने वाली घटना हुई। गुरुवार को जब उस घटना का वीडियो सामने आया, तो लोगों का गुस्सा उबाल खाने लगा। मणिपुर पुलिस ने भी इस वीडियो की पुष्टि करते हुए बताया, चार मई को इन महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था। हालांकि वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह बहुत ही शर्मनाक है। सड़क पर दो महिलाओं को नग्न कर दौड़ाया जा रहा है। उस वक्त पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण, गैंगरेप और हत्या का मामला दर्ज किया था। खास बात है कि वीडियो में आरोपियों का चेहरा साफ दिख रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, यौन हिंसा के बाद भी मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को नहीं बदला गया। वहीं 30 वर्ष पहले मणिपुर में जब हिंसा हुई तो कांग्रेस पार्टी ने अपनी ही सरकार गिरा दी थी। कांग्रेस के मुख्यमंत्री राजकुमार दोरेंद्र सिंह को हटाकर वहां पर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।
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77 दिन में क्यों नहीं हुई कार्रवाई
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा, नरेंद्र मोदी सरकार 'सब ठीक है', की तरह व्यवहार करना कब बंद करेगी। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को कब बदला जाएगा। राज्य में बड़े पैमाने पर भड़की हिंसा को 78 दिन, जबकि महिलाओं को नग्न करके घुमाने और कथित तौर पर दुष्कर्म की भयावह घटना को 77 दिन हो गए हैं। अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए हुए दो महीने से ज्यादा हो गए, लेकिन उन तक पुलिस नहीं पहुंच सकी। जब उस घटना का वीडियो वायरल हुआ, तो एक आरोपी के पकड़ने की बात कही जा रही है। राज्य में इंटरनेट बंद होने के कारण देश के लोगों का जरा भी अंदाजा नहीं था कि मणिपुर में इतनी भयानक घटना घटी है। यह बिल्कुल क्षमा किए जाने योग्य नहीं है कि महिला एवं बाल विकास मंत्री ने मणिपुर के सीएम से बात करने या मामले पर बयान देने के लिए 76 दिनों तक इंतजार किया।
मणिपुर के मुख्यमंत्री को कब हटाया जाएगा
कांग्रेस नेता ने सवाल करते हुए कहा, क्या केंद्र सरकार, गृह मंत्री या प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी नहीं थी। मोदी सरकार 'ऑल इज वेल' का दिखावा कब बंद करेगी। मणिपुर के मुख्यमंत्री को कब हटाया जाएगा। ऐसी और कितनी घटनाओं को दबाया गया है। राहुल गांधी ने कहा था कि जब प्रधानमंत्री मोदी विदेश यात्रा पर हैं, तब 24 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई जा रही है। मतलब यह बैठक पीएम के लिए महत्वपूर्ण नहीं थी। 8 अप्रैल 1992 को मणिपुर में कांग्रेस की सरकार बनी थी। राजकुमार दोरेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री बनाए गए। तब वहां पर हिंसा हो गई। उस वक्त नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल की सलाह पर राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की। नौंवी बार 31 दिसंबर 1993 से 13 दिसंबर 1994 तक 347 दिन तक राष्ट्रपति शासन लगा रहा। इसके अलावा 18 जून 2001 को जब मणिपुर में हिंसा शुरू हुई, तो उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। विपक्षी दलों ने उनसे मिलने का समय का मांगा। वाजपेयी ने छह दिन के भीतर न केवल विपक्षी दलों से मुलाकात की, बल्कि खुद भी मणिपुर के लोगों से शांति की अपील की थी।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, 22 साल पहले 18 जून 2001 को मणिपुर में हिंसा हुई। लोगों के घर और सार्वजनिक संपत्ति को आग के हवाले कर दिया गया। तब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। विपक्षी दलों ने वाजपेयी से मिलने का समय मांगा। अटल बिहारी वाजपेयी ने छह दिन बाद ही सर्वदलीय बैठक बुलाई। इतना ही नहीं, उन्होंने मणिपुर के लोगों से शांति की अपील की। जयराम रमेश के मुताबिक, इस बार मणिपुर में हो रही हिंसा के मद्देनजर कांग्रेस सहित दस पार्टियों ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा शुरू होने से पहले मुलाकात का समय मांगा था। पीएम मोदी ने उन्हें समय नहीं दिया। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को बर्खास्त कर मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। इसके साथ ही बिना कोई देरी किए, एक सर्वदलीय शिष्टमंडल मणिपुर भेजा जाए। सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस ने कहा, पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में पूर्व सीएम ओ इबोबी सिंह को तीन घंटे की बैठक में अपनी बात रखने के लिए केवल सात मिनट दिए गए। बता दें कि इबोबी सिंह 15 साल तक मणिपुर के मुख्यमंत्री रहे हैं।
मणिपुर में कितनी बार लगा है राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में पहली बार राष्ट्रपति शासन 19 जनवरी 1967 से 19 मार्च 1967 यानी 66 दिन तक लगाया गया था। उस समय मणिपुर केंद्र शासित विधानसभा का पहला चुनाव होना था। दूसरी बार 25 अक्तूबर 1967 से 18 फरवरी 1968 तक, 116 दिन के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया। तब मणिपुर में राजनीतिक संकट आ गया था। उसके बाद किसी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था। तीसरी बार राज्य में 17 अक्तूबर 1969 से 22 मार्च 1972 तक दो साल 157 दिन के लिए राष्ट्रपति शासन लगा। उस वक्त पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग के दौरान हिंसा हुई। कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। चौथी बार 28 मार्च 1973 से 3 मार्च 1974 तक राष्ट्रपति शासन लगा था। उस वक्त विपक्ष के पास इतना कम बहुमत था कि वह स्थायी सरकार नहीं बना सकता था। पांचवीं बार 16 मई 1977 से 28 जून 1977 तक 43 दिन के लिए राष्ट्रपति शासन लगा। दलबदल के चलते सरकार गिर गई थी।
छठवीं बार 14 नवंबर 1979 से 13 जनवरी 1980 तक 60 दिन के लिए राष्ट्रपति शासन लगा। उस वक्त राजनीतिक कारण जिम्मेदार रहे। जनता पार्टी सरकार के साथ असंतोष और भ्रष्टाचार के आरोप, सरकार की बर्खास्तगी का कारण बना। विधानसभा भंग कर दी गई।
28 फरवरी 1981 से 18 जून 1981 तक लगा राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में सातवीं बार 28 फरवरी 1981 से 18 जून 1981 तक राष्ट्रपति शासन लगा। तब भी राजनीतिक कारणों के चलते राज्य में स्थायी सरकार का गठन नहीं हो सका। आठवीं बार 7 जनवरी 1992 से लेकर 7 अप्रैल 1992 तक 91 दिन के लिए राष्ट्रपति शासन लगा। उस वक्त दलबदल के चलते गठबंधन सरकार गिर गई थी। नौंवी बार 31 दिसंबर 1993 से 13 दिसंबर 1994 तक 347 दिन तक राष्ट्रपति शासन लगा रहा। तब इसका कारण नागा और कुकी समुदाय के बीच हिंसा हुई थी। वह हिंसा लंबे समय तक चली, जिसमें सैंकड़ों लोग मारे गए थे। दसवीं बार 2 जून 2001 से 6 मार्च 2002 तक 277 दिन के लिए राष्ट्रपति शासन लगा था। उस वक्त सरकार ने बहुमत खो दिया था। गुरुवार को राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा, पीएम की चुप्पी और निष्क्रियता ने मणिपुर को अराजकता की ओर धकेल दिया है। जब मणिपुर में भारत के विचार पर हमला किया जा रहा है, तो भारत चुप नहीं रहेगा। हम मणिपुर के लोगों के साथ खड़े हैं। कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा, मणिपुर से आ रही महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। महिलाओं के साथ घटी इस भयावह हिंसा की घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री जी आखिर मणिपुर की हिंसक घटनाओं पर आंख मूंद कर क्यों बैठे हैं? क्या इस तरह की तस्वीरें और हिंसक घटनाएं उन्हें विचलित नहीं करतीं?