Congress: ऐसा क्या किया कांग्रेस ने कि नाराज G-23 के नेता करने लगे वापसी! ये चर्चाएं पकड़ रही हैं जोर
Congress से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में होने वाली कांग्रेस की एक अहम बैठक में इन्हीं नाराज नेताओं के कई बड़े चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां भी मिलने वाली है। इनमें से कुछ नेताओं को तो कांग्रेस के बड़े आंदोलनों की कमान भी मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है
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कभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के नाराज संगठन जी-23 में शामिल रहे बड़े-बड़े कद्दावर नेता संगठन से नाराजगी भुलाकर अपने घर में वापसी कर रहे हैं। कहने को तो कांग्रेस ने इसके लिए कोई विशेष योजना तो नहीं बनाई, लेकिन ऐसा माहौल जरूर तैयार किया जिससे नाराज नेताओं को न सिर्फ पार्टी में बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां दी जाने लगीं, बल्कि उन्हें तवज्जो भी मिलने लगी। इसका नतीजा यह हुआ कि गुलाम नबी आजाद से लेकर आनंद शर्मा और शशि थरूर से लेकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे बड़े नेता अब कांग्रेस का गुणगान करने में बिल्कुल नहीं चूकते हैं। कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं का कहना है कि पार्टी जिस तरीके से बीते कुछ दिनों में आंदोलनों के माध्यम से न सिर्फ सक्रिय हुई है, बल्कि अपनी महत्वपूर्ण विपक्ष की भूमिका अदा कर रही है उसमें इन सभी बड़े नेताओं का अहम योगदान है।
दो साल बाद सामने आए गुलाम नबी आजाद
कांग्रेस के नाराज नेताओं में शुमार किए जाने वाले गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से न सिर्फ कांग्रेस पार्टी का पक्ष रखा बल्कि सत्ता पक्ष पर जमकर निशाना भी साधा। पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा ने न सिर्फ कांग्रेस पार्टी की नीतियों को लेकर पक्ष रखा, बल्कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियां और सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग का खुलकर विरोध भी किया। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता गुलाम नबी आजाद ने तो सोनिया गांधी की बढ़ती उम्र और बीमारी के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ पर सरकार और एजेंसी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस तरीके से कांग्रेस आलाकमान का पक्ष लेकर बातें कहीं, उससे जी-23 के अंत की चर्चाएं भी शुरू हुईं।
कांग्रेस के ही कई वरिष्ठ नेताओं ने इस बात को भी स्वीकार किया कि जी-23 जैसे नाराज नेताओं के संगठन का अब कोई भी अस्तित्व नहीं बचा है। क्योंकि ज्यादातर नाराज नेता या तो पार्टी के साथ आकर अपनी बात कहने लगे हैं और पार्टी उन्हें न सिर्फ तवज्जो दे रही है बल्कि जिम्मेदारियों के साथ आगे भी बढ़ रही है। इसके अलावा कुछ नेता ऐसे हैं जो पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में चले गए हैं। इसलिए अब इस संगठन का न तो कोई अस्तित्व बचा है और न ही कोई बहुत सक्रिय नेता इसमें शामिल है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के एक पदाधिकारी कहते हैं कि बीते कुछ दिनों से जिस तरीके से कांग्रेस पार्टी ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए संसद से लेकर सड़क तक पर अपना प्रदर्शन शुरू किया और बड़े नेताओं को जिम्मेदारी देनी शुरू की, उससे न सिर्फ नाराजगी खत्म हुई है बल्कि एक बड़ा जनसमर्थन भी मिलना शुरू हुआ है।
जल्द मिलने वाली हैं बड़ी जिम्मेदारियां
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि जब पार्टी के नाराज नेताओं ने मिलकर एक साथ पार्टी की नीतियों और आलाकमान पर निशाना साधना शुरू किया था, तब भी आलाकमान ने उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। वरिष्ठ नेता का कहना है दरअसल जिस बात को लेकर के नेता नाराज थे, उसका कोई आधार था ही नहीं। यही वजह है कि वक्त के साथ सारी चीजें दुरुस्त होती चली गईं। उनका कहना है जो नेता दूसरी पार्टियों के संपर्क में थे, वह उसमें चले गए और जिन नेताओं को इस बात का एहसास हुआ कि उनकी नाराजगी की कोई वजह नहीं थी, तो वह सब मिलकर कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए आगे आने लगे हैं।
कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में होने वाली कांग्रेस की एक अहम बैठक में इन्हीं नाराज नेताओं के कई बड़े चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां भी मिलने वाली है। इनमें से कुछ नेताओं को तो कांग्रेस के बड़े आंदोलनों की कमान भी मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बात की जानकारी कांग्रेस के उन सभी नेताओं को दे दी गई है, जिन्हें यह बड़ी जिम्मेदारियां मिलने वाली हैं। वह कहते हैं कि बुधवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात का संकेत भी मिल चुका है। यही वजह है कि अब पार्टी में किसी भी तरीके की नेताओं के बीच में कोई बड़ी नाराजगी जैसी चीज नहीं है। हालांकि यह बात अलग है कि बहुत से नेताओं का आपसी मतभेद हो सकता है, लेकिन उसका पार्टी पर कोई असर दिखने वाला नहीं है।