देश को गांधी जी के रास्ते से भटकाने की कोशिश में लगी है भाजपाः सोनिया गांधी
- कांग्रेस अध्यक्ष ने छोड़े जहर बुझे तीर
- देश को आरएसएस का प्रतीक बनाने की हो रही है कोशिश
- साम, दाम, दंड, भेद का खुला कारोबार कर लोग समझ रहे हैं खुद को ताकतवर
- देश की हालत देखकर गांधी जी की आत्मा को दु:ख पहुंच रहा होगा
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देश की नींव में गांधी जी के विचार
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने संबोधन में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद लगातार महात्मा गांधी का नाम लेकर जो प्रयास हो रहे हैं, उसपर सवाल उठाया है। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पदयात्रा के समापन पर बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि राष्ट्रपिता का नाम लेना आसान है, लेकिन उनके कदमों पर चलना आसान नहीं है। सोनिया गांधी ने कहा कि इस देश की नींव में गांधी जी के विचार हैं। महात्मा गांधी ने पूरे विश्व को सत्य, अहिंसा का रास्ता अपनाने की प्रेरणा दी है।
भारत और गांधी जी दोनों एक दूसरे के पर्याय
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पहले भी गांधी जी का नाम लेकर देश को उनके बताए रास्ते से हटाकर अपने रास्ते पर ले जाने वाले कम नहीं थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से यह कोशिश साम, दाम, दंड भेद का खुला कारोबार करके हो रही है। सोनिया गांधी ने कहा कि ये लोग अब ऐसा करके अपने आपको बहुत ताकतवर समझने लगे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसके बाद भी भारत का वजूद नहीं घट रहा है, क्योंकि भारत गांधी जी के बताए रास्ते पर आगे बढ़ा है। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत और गांधी जी दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं।
सोनिया गांधी ने कहा कि वे चाहते हैं, भारत गांधी जी के बजाय आरएसएस का प्रतीक बन जाए। मैं ऐसे लोगों को साफ शब्दों में बता देना चाहती हूं कि भारत मिली जुली संस्कृति, मिली जुली सभ्यता, मिले जुले समाज में गांधी जी के सर्व समावेशी व्यवस्था के अलावा कभी कुछ और नहीं सोच सकती।
सत्ता को मुट्ठी में रखने की प्यास
सोनिया गांधी ने काफी धारदार हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि जो लोग असत्य की राजनीति कर रहे हैं, वह कैसे समझेंगे कि गांधी जी सत्य के पुजारी थे। जिन्हें अपनी सत्ता के लिए सब कुछ करना मंजूर है, वे कैसे समझेंगे कि गांधी जी अहिंसा के पुजारी थे। जिनके पास देश की सत्ता को मुट्ठी में रखने की प्यास है, आखिर वह गांधी जी के स्वराज के सपने को कैसे समझेंगे?
खुद को सर्वेसर्वा बताने की इच्छा
सोनिया गांधी ने कहा कि जिन्हें मौका मिलते ही खुद को सर्वेसर्वा बताने की इच्छा है, वे कैसे समझेंगे कि गांधी जी की नि:स्वार्थ सेवा का मूल्य क्या था। आज जिन पर जुल्म हुआ वह जेल में डाले जा रहे हैं। गांव का किसान दु:खी है, युवा परेशान है, बेरोजगारी से जूझ रहा है, उद्योग धंधा बंद है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पिछले चार-पांच साल में देश की जो हालत हुई है, उसे देख कर गांधी जी की आत्मा को दु:ख पहुंच रहा होगा।