सुभाष चोपड़ा को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर सोनिया गांधी ने फेंका राजनीति का पासा
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजनीति का पासा फेंक दिया है। दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर कीर्ति आजाद दौड़े जरूर लेकिन बाजी पुराने नेता सुभाष चोपड़ा के हाथ लग गई है। अब सुभाष चोपड़ा प्रदेश अध्यक्ष होंगे। चोपड़ा की इस पद पर ताजपोशी से जहां भाजपा थोड़ा सा खुश हो सकती है, वहीं आम आदमी पार्टी का गणित कुछ गड़बड़ा सकता है। सुभाष चोपड़ा न केवल पुराने कांग्रेसी है, बल्कि दिल्ली की हर राजनीतिक नब्ज से वाकिफ हैं। चोपड़ा दिल्लीवासी भी हैं और अंत में चोपड़ा भी हैं।
पूर्वांचली वोटों पर मनोज तिवारी का असर
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी जहां पूर्वांचल मतों को ध्यान में रखकर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, वहीं विजय गोयल दिल्ली के हैं। भाजपा ने दिल्ली की जिम्मेदारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के कंधे पर डाली है। जावड़ेकर अच्छा होमवर्क करके आगे बढ़ते हैं। भाजपा अब मुद्दों पर भी खेल रही है। बुधवार को ही केन्द्र सरकार ने दिल्ली की 1797 अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने का फैसला ले लिया। इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास शीला दीक्षित के जमाने से कई बार भेजा गया है। अरविंद केजरीवाल सरकार ने भी इसे आगे बढ़ाया था।
अब सुभाष चोपड़ा देंगे टक्कर
सुभाष चोपड़ा के हाथ में कमान आने से पूर्व अध्यक्ष अजय माकन, अरविंदर सिंह लवली और मौजूदा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष हारुन युसुफ, राजेश लिलोठिया और देवेंद्र यादव को भी कोई परेशानी नहीं होगी। चोपड़ा दिल्ली के मतदाताओं को जहां संदेश दे सकेंगे, वहीं मुद्दों की समझ होने के कारण वह लगातार ग्राफ में पिछड़ रही कांग्रेस पार्टी को संजीवनी दे सकते हैं। चोपड़ा राजनीति में जितने खरे हैं, उतने ही बारीकी से लक्ष्य को साधने में माहिर हैं। ऐसे में उनके पास सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश कांग्रेस को एकजुट रखने की होगी। इस तरह से वह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।