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राफेल पर राहुल का नया 'खेल', एचएएल के कर्मचारियों से मिलकर साधेंगे सरकार पर निशाना

Wed, 10 Oct 2018 03:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 10 Oct 2018 03:28 PM IST
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Congress president rahul gandhi to meet hal employees in bengaluru on 13 October
राहुल गांधी

राफेल विमान सौदे को लेकर कांग्रेस लगातार मोदी सरकार को घेरने में लगी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने तो इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को झटका दे ही दिया है और अब कांग्रेस भी सरकार को एक अलग झटका देने की तैयारी में है। 

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दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे को लेकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के कर्मचारियों से मिलेंगे और 13 अक्टूबर को कर्नाटक के बेंगलुरु में कैंडल मार्च निकालेंगे। राहुल गांधी का ये कैंडल मार्च कर्नाटक कांग्रेस के दफ्तर से लेकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के दफ्तर तक चलेगा। इस मार्च के जरिए राहुल गांधी मोदी सरकार पर निशाना साधेंगे।
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कांग्रेस का कहना है कि इस घोटाले से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कर्मचारियों को सबसे बड़ा नुकसान हुआ है, क्योंकि इस कंपनी में 30 हजार के करीब लोग नौकरी करते हैं और इस सौदे के रद्द होने के बाद करीब 10 हजार लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा है। 
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गौरतलब है कि राफेल मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार घेरने की कोशिश कर रही हैं। इस मामले पर पीएम मोदी द्वारा साधी गई चुप्पी पर राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं। 

दरअसल, कांग्रेस का आरोप है कि पीएम मोदी ने फ्रांस की सरकार से 36 लड़ाकू विमान खरीदने का जो सौदा किया है उसका मूल्य यूपीए कार्यकाल में किए गए सौदे की तुलना में अधिक है। जिसकी वजह से सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पार्टी का दावा है कि पीएम मोदी ने इस सौदे को बदलवाया और ठेका हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से लेकर रिलायंस डिफेंस को दे दिया। 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया झटका 

भारत और फ्रांस के बीच हुए राफेल सौदे के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में दायर की गई याचिकाओं पर आज सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने केंद्र सरकार से राफेल पर फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में सौंपने को कहा है। इसके लिए अदालत ने केंद्र को 29 अक्टूबर तक का समय दिया है। 


हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ये स्पष्ट कर दिया है कि उसे राफेल की कीमत और सौदे के तकनीकी विवरणों से जुड़ी सूचनाएं नहीं चाहिए। अदालत ने सिर्फ सौदे की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वह याचिकाओं में लगाए गए आरोपों को ध्यान में नहीं रख रहा है। 

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