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राहुल गांधी ने थपथपाई गडकरी की पीठ, कहा- यही है हर भारतीय का सवाल, कहां है नौकरियां?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 06 Aug 2018 10:59 AM IST
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नितिन गडकरी
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बढ़ती बेरोजगारी, एससीएसटी एक्ट और मराठा आरक्षण पर बार-बार घेरी जा रही भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के रविवार को दिए बयान के बाद और बढ़ने जा रही है। बढ़ती बेरोजगारी और मराठा आरक्षण आक्रोश रैली के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गडकरी के बयान को सीधा कैच कर लिया है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि गडकरी जी ने बिलकुल सही सवाल किया है। यही हर भारतीय सरकार से पूछ रहा है कि आखिर नौकरियां कहा हैं?
रविवार को नितिन गडकरी ने कहा था कि नौकरियां हैं कहां कि आरक्षण दें, उन्होंने यह भी कहा था कि सरकारी नौकरियों की भर्ती पर रोक लगी हुई है।
गडकरी के नौकरियों वाले बयान पर भाजपा पूरी तरह से घिरती नजर आ रही है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि आरक्षण दे दिया जाता है तो भी फायदा नहीं है, क्योंकि नौकरियां नहीं हैं। बैंक में आईटी के कारण नौकरियां कम हुई हैं। सरकारी भर्ती रुकी हुई हैं। नौकरियां कहां हैं? नितिन गडकरी ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की तरफ इशारा करते हुए कहा कि एक ‘सोच’ है जो चाहती है कि नीति निर्माता हर समुदाय के गरीबों पर विचार करें।
उन्होंने कहा था एक सोच कहती है कि गरीब- गरीब होता है, उसकी कोई जाति, पंथ या भाषा नहीं होती। उसका कोई भी धर्म हो, मुस्लिम, हिंदू या मराठा सभी समुदायों में एक धड़ा है जिसके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं है, खाने के लिए भोजन नहीं है।
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कल ही बयान के बाद गडकरी ने इस पर सफाई भी दी थी उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि मुझे कुछ खबरें देखने को मिलीं जिसमें मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। लेकिन मैं साफ करना चाहता हूं कि आरक्षण में बदलाव को लेकर सरकार की कोई योजना नहीं है।
पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में 16 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदायों का पुणे, नासिक,औरंगाबाद में आंदोलन जारी है। इस आंदोलन के आवेश में आकर कई युवाओं ने जहां आत्महत्या कर ली है वहीं हिंसा की खबरे भी हैं।
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रविवार को नितिन गडकरी ने कहा था कि नौकरियां हैं कहां कि आरक्षण दें, उन्होंने यह भी कहा था कि सरकारी नौकरियों की भर्ती पर रोक लगी हुई है।
गडकरी के नौकरियों वाले बयान पर भाजपा पूरी तरह से घिरती नजर आ रही है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि आरक्षण दे दिया जाता है तो भी फायदा नहीं है, क्योंकि नौकरियां नहीं हैं। बैंक में आईटी के कारण नौकरियां कम हुई हैं। सरकारी भर्ती रुकी हुई हैं। नौकरियां कहां हैं? नितिन गडकरी ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की तरफ इशारा करते हुए कहा कि एक ‘सोच’ है जो चाहती है कि नीति निर्माता हर समुदाय के गरीबों पर विचार करें।
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उन्होंने कहा था एक सोच कहती है कि गरीब- गरीब होता है, उसकी कोई जाति, पंथ या भाषा नहीं होती। उसका कोई भी धर्म हो, मुस्लिम, हिंदू या मराठा सभी समुदायों में एक धड़ा है जिसके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं है, खाने के लिए भोजन नहीं है।
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कल ही बयान के बाद गडकरी ने इस पर सफाई भी दी थी उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि मुझे कुछ खबरें देखने को मिलीं जिसमें मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। लेकिन मैं साफ करना चाहता हूं कि आरक्षण में बदलाव को लेकर सरकार की कोई योजना नहीं है।
पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में 16 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदायों का पुणे, नासिक,औरंगाबाद में आंदोलन जारी है। इस आंदोलन के आवेश में आकर कई युवाओं ने जहां आत्महत्या कर ली है वहीं हिंसा की खबरे भी हैं।