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ब्राह्मण कार्ड के जरिए यूपी में वापसी की राह तलाश रही कांग्रेस, 17 जिलाध्यक्षों में 7 ब्राह्मण चेहरों को मौका     

Wed, 29 Jul 2020 07:15 PM IST
Rohit Ojha डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Rohit Ojha Updated Wed, 29 Jul 2020 07:15 PM IST
सार

अगले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रियंका गांधी की चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है संगठन में बदलाव।             

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Congress looking for way to return to UP through Brahmin card
प्रियंका गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन यहां के सियासी माहौल में राजनीतिक खुशबू अभी से महसूस की जाने लगी है। सत्ता पर विराजे योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर हिंदुत्व कार्ड पर ही भरोसा है, सो राम मंदिर निर्माण को पुरजोर तरीके से प्रचारित करने की कोशिश की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिए राम मंदिर की नींव रखवाकर इसे कालजयी घटना बताने की कोशिश अभी से शुरू हो चुकी है। 

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मगर इसके बाद भी भाजपा के लिए यह अच्छी खबर नहीं है कि हिंदुत्व के झंडाबरदार ब्राह्मण मतदाताओं में उसके लिए एक विशेष प्रकार की नाराजगी देखी जा रही है। यह नाराजगी उसे भाजपा से दूर भी कर सकती है। स्थिति को भांपते हुए कांग्रेस ने अपने इस पुराने कोर वोटर को लुभाने की कोशिश शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश के 17 नए जिलाध्यक्षों में सात ब्राह्मणों को उतारकर पार्टी ने ब्राह्मणों को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।   

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कांग्रेस ने बुधवार को घोषित सूची में महत्त्वपूर्ण लखनऊ जिले की जिम्मेदारी वेदप्रकाश त्रिपाठी को सौंपी है, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले गोरखपुर सिटी से आशुतोष तिवारी को जिलाध्यक्ष बनाया है। मिर्जापुर से राजन पाठक, सोनभद्र सिटी से राजीव कुमार त्रिपाठी और लखीमपुर सिटी से सिद्धार्थ त्रिवेदी को मौका दिया गया है। जेपी मिश्रा को बहराइच जिले की जिम्मेदारी दी गई है। 15 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाताओं वाले उत्तर प्रदेश में इस बदलाव को एक बड़े सियासी संकेत के रूप में देखा जा रहा है।  

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ब्राह्मणों के पास विकल्प नहीं 

कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही अमेठी के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेन्द्र मिश्रा का मानना है कि यूपी का ब्राह्मण मतदाता इस समय बेहद क्षुब्ध है। हिंदुत्व के भ्रमजाल में फंसकर वह भाजपा के पास चला तो जरुर गया, लेकिन केंद्र की छह साल की सत्ता और उत्तर प्रदेश की साढ़े तीन साल की सत्ता में उसे केवल उपेक्षा ही मिली है। उन्होंने कहा कि इस समय प्रदेश भर में हो रही ब्राह्मणों की हत्याओं से वह बेहद विचलित है और अपने लिए एक मजबूत विकल्प की तलाश कर रहा है।


अगर पार्टी सही रणनीति के साथ ब्राह्मण चेहरों को सही जिम्मेदारी देकर जमीन पर उतारे तो उसे इसका बड़ा फायदा मिल सकता है। वहीं, पूर्वांचल के वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता चंद्रभूषण तिवारी कहते हैं कि ब्राह्मण के लिए हमेशा राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा। उसने देश निर्माण के समय कांग्रेस का साथ दिया तो बाद में सामाजिक उत्थान में अपनी भागीदारी निभाने के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ भी गया। मगर उत्तर प्रदेश का पिछले 30 साल का इतिहास बताता है कि उसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका के बाद भी किसी भी सरकार में उसे सही भागीदारी नहीं मिली।
 

ब्राह्मणों का एक भी मजबूत चेहरा भाजपा के पास नहीं

सपा-बसपा ने उसे इस्तेमाल तो जरूर किया, लेकिन उसे उसकी भागीदारी देने से मना कर दिया। अब वही काम भाजपा भी कर रही है, यही कारण है कि अब बदले माहौल में उसे इन दलों से कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने ब्राह्मणों से हिंदुत्व का झंडा तो जरूर उठवाया, लेकिन आज जब वह सत्ता में है तो ब्राह्मणों को पूरी तरह नजरंदाज किया जा रहा है।

आज राष्ट्रीय स्तर पर ब्राह्मणों का एक भी मजबूत चेहरा भाजपा के पास नहीं है। उत्तर प्रदेश में भी कलराज मिश्रा और लक्ष्मीकांत वाजपेयी को किनारे लगा दिया गया है। आज भाजपा के पास उत्तर प्रदेश में एक भी ऐसा ब्राह्मण चेहरा नहीं है जिसे वह ब्राह्मण नेता के तौर पर पेश कर सके। यही कारण है कि अब ब्राह्मण भाजपा का विकल्प तलाश रहा है। उनका मानना है कि अगर पार्टी सही रणनीति के साथ इस वर्ग को अपने से जोड़ने का काम करती है तो बाजी पलट सकती है। 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी विकल्प तलाश रहा ब्राह्मण मतदाता 

राजबब्बर के उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए जनांदोलन कमेटी के प्रदेश सहप्रभारी रहे अभिमन्यु त्यागी बताते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वर्तमान सरकार से बेहद निराश है। आए दिन ब्राह्मण व्यवसायियों की हत्या हो रही है और सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। गाजियाबाद के बिजनेस मैन विक्रम त्यागी के अपहरण को एक महीने से ज्यादा हो गया है, लेकिन प्रदेश सरकार अभी तक उनकी कोई खोज-खबर नहीं लगा पाई है। इससे ब्राह्मणों में प्रदेश सरकार के प्रति भारी नाराजगी है और वह किसी भी कीमत पर अब एक बदलाव देखना चाहता है। 

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